Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
पित्त बढ़ने से स्किन पर दिखते हैं ये 5 लक्षण, आयुर्वेद एक्सपर्ट से जानें कैसे संतुलित करें पित्त
आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर तीन दोषों से जुड़े रहता है। जैसे कि वात, पित्त और कफ। इन्हीं तीनों दोष का शरीर के अलग-अलग अंगों पर असर होता है। पर परेशानी तब होती है जब ये तीनों दोष असंतुलित हो जाता है। वात,पित्त और कफ दोष तीनों में से कोई भी असंतुलित होने पर शरीर में अलग-अलग लक्षण नजर आने लगते हैं। लेकिन आज हम बात सिर्फ पित्त दोष की करेंगे कि कैसे ये हमारी स्किन को प्रभावित करता है। इसी बारे में हमने आयुष क्लीनिक के डॉ. रमाकांत शुक्ला से बात की, जिन्होंने बताया कि कैसे पित्त दोष बढ़ने से स्किन से जुड़ी समस्याएं हो सकती है और इससे बचाव के उपाय क्या हैं?
चेहरे पर पित्त बढ़ने के लक्षण-Pitta dosha symptoms on skin
त्वचा की दूसरी परत में अधिक संयोजी ऊतक, रक्त वाहिकाएं और प्लाज्मा होते हैं। यह अधिक नम और गर्म होता है। जब इस परत में विषाक्त पदार्थ का संचार होता है, तो त्वचा चिड़चिड़ी, गर्म और लाल हो जाती है। गर्म खून वाले लोगों में पित्त दोष ज्यादा होता है। ये आमतौर पर खराब डाइट और जीवन शैली के कारण होता है। ऐसे में पाचन अग्नि असंतुलित होती है और कुछ भोजन विषाक्त पदार्थों में परिवर्तित हो जाते हैं। इसका असर त्वचा की ऊपरी परत पर ज्यादा नजर आते हैं। ऐसे लोगों में त्वचा से जुड़ी कुछ लक्षण ज्यादा नजर आते हैं। जैसे कि
1. ड्राई स्किन
पित्त दोष होने पर त्वचा ज्यादा ड्राई हो जाती है। इसके कारण त्वचा ड्राई हो जाती है। इसके कारण त्वचा पर जलन,स्केलिंग,सूजन और संक्रमण हो सकता है। ये त्वचा के पोर्स को ब्लॉक करती है और स्किन पर नमी की कमी का कारण बनती है। ऐसे में आहार और जीवन शैली इसे और प्रभावित करती है।
2. एक्जिमा
एक्जिमा पित्त दोष वाले लोगों को ज्यादा होता है। ये एक ऐसी स्थिति है जो आपकी त्वचा को लाल और खुजलीदार बनाती है। यह बच्चों में आम है लेकिन किसी भी उम्र में हो सकता है। एटोपिक जिल्द की सूजन लंबे समय तक चलने वाली होती है और समय-समय पर दोबारा आ जाती है। यह अस्थमा या हे फीवर के साथ हो सकता है। ऐसे में पित्त दोष को संतुलित करना बेहद जरूरी है।
3. रोसैया
रोसैया (Rosacea) एक सामान्य त्वचा की स्थिति है जो आपके चेहरे को पूरी तरह से प्रभावित करती है। ये ब्लड सर्कुलेशन की कमी से और बढ़ता है। ये चेहरे पर दाने का कारण बनते हैं जिसमें कि कई बार दानों मेंमवाद भी भर जाते हैं। ये संकेत कभी भी भड़क सकते हैं और फिर थोड़ी देर में चले भी जाते हैं। ये रह-रह कर आपको परेशान कर सकता है।
4. चेहरे में रेडनेस और सूजन
चेहरे में रेडनेस और सूजन का ज्यादा होना भी पित्त दोष बढ़ने का लक्षण है। इसमें चेहरा ज्यादा लाल हो जाता है। दरअसल, जिन लोगों के चेहरे पर रह-रह कर सूजन आ जाती है या फिर रेडनेस आ जाती है, उनमें ये पित्त बढ़ने के कारण हो सकती है।
5. रह-रह कर पित्त एलर्जी होना
रह-रह कर एलर्जी होना भी पित्त दोष बढ़ने का लक्षण है। पित्त एलर्जी अक्सर तब होती है जब एक एलर्जेन के गर्म, तेज गुण त्वचा के संपर्क में आते हैं और इसके परिणामस्वरूप रक्त प्रवाह में प्रवेश करते हैं। ये स्किन पर कई प्रतिक्रियाओं के रूप में नजर आते हैं जैसे पित्ती, चकत्ते, खुजली, एलर्जी, सूजन आदि।
पित्त दोष वाले लोगों त्वचा की देखभाल कैसे करें?
पित्त त्वचा के प्रकार को संतुलित रहने के लिए धूप से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। ऐसे में एलोवेरा, गुलाब और चमेली जैसी ठंडी और हीलिंग जड़ी-बूटिया त्वचा को शांत और पोषित करने में मदद करते हैं। ऐसे में आप घर पर उबटन बना कर भी चेहरे पर लगा सकते हैं। इसके लिए आधा चम्मच उबटन लें और उसमें गुलाब जल मिलाएं। मिश्रण को सोखने के लिए एक मिनट के लिए छोड़ दें। अब पानी से अपना चेहरा धोएं और मॉइस्चराइज लगा लें।
इस तरह पित्त दोष वाले लोगों त्वचा की देखभाल कर सकते हैं। बस ध्यान रखं कि पित्त को बढ़ने ना दें। इसके लिए खाने में मसालेदार भोजन का सेवन ना करें। साथ ही ज्यादा पानी पिएं और योग करें।
| --------------------------- | --------------------------- |