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राजकीय अमृतकौर अस्पताल में नसबंदी का ऑपरेशन कराने के लिए आने वाली महिलाओं में ऑपरेशन पद्धति की पेचीदगियों को लेकर उलझन बनी हुई है। ऑपरेशन से पहले और ऑपरेशन के बाद संदेहास्पद स्थिति बनी रहने से कई महिलाएं नसबंदी का ऑपरेशन कराने के बाद भी ऑपरेशन सफल होने या ना होने की बात को लेकर संतुष्ट नहीं हो पाती है। अस्पताल में दूरबीन के जरिए होने वाले नसबंदी ऑपरेशन में ट्यूब नहीं मिलने या ट्यूब पर रिंग नहीं लग पाने पर ऑपरेशन असफल माना जाता है। इसके बाद सर्जरी के माध्यम से ही नसबंदी किए जाने का रास्ता बचने से महिलाएं खुद को ठगा सा महसूस करती है। अधिकतर महिलाएं यह सोच कर नसबंदी का ऑपरेशन दोबारा कराने से गुरेज कर लेती हैं कि दो दो बार ऑपरेशन की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस कथित भय से कई बार महिलाएं दोबारा ऑपरेशन कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही।



ऑपरेशन के बाद भी संशय

अजमेरी गेट बाहर निवासी नरेश ((३०)) पत्नी सूरज का गत सोमवार को अस्पताल में नसबंदी का ऑपरेशन कराया गया। परिजन समेत नरेश को इस ऑपरेशन में एक छेद व टांका लगने की उम्मीद थी। लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे पता चला कि दूरबीन ऑपरेशन में दो जगह टांके आए। इसके अलावा दूसरे दिन तक ऑपरेशन सफल होने या नहीं होने को लेकर संशय बना रहा। परिजन ने विरोध भी जताया।

टांका खुलवाने के लिए भटकना पड़ा

मेवाड़ी गेट बाहर निवासी लीला ((२८)) पत्नी अमर चंद का गत ११ फरवरी को नसबंदी का ऑपरेशन किया गया। लेकिन ट्यूब में सूजन आने की वजह से ऑपरेशन में सफलता नहीं मिली। दूरबीन से ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने सर्जरी वाले ऑपरेशन की सलाह दी। लेकिन ऑपरेशन असफल होने से मरीज समेत उसके परिजन सकते में आ गए। लेकिन ऑपरेश के बाद आए टांकों को खुलवाने के लिए अस्पतला में भटकने से अब नसबंदी के ऑपरेशन कराने से गुरेज कर रहे है।

क्या कहते हैं डॉक्टर...

॥दूरबीन से दो तरह के ऑपरेशन होते है। डॉक्टर अपनी सुविधा के अनुसार ऑपरेशन करते हैं। दूरबीन के ऑपरेशन में पहले पता नहीं लगाया जा सकता कि नसबंदी में सफलता मिलेगी। ट्यूब की पोजीशन के अनुसार ही ऑपरेशन निर्भर करता है। इसमें सफलता नहीं मिलने पर फिर सर्जरी से नसबंदी करने का रास्ता बचता है। दूरबीन वाले टांकों को खुलवाने के लिए भटकने की जरूरत नहीं होती। ऐसे टांके स्वत: ही गल कर निकल जाते हैं। अस्पताल आने की जरूरत नहीं रहती।’

डॉ.विधा सक्सेना, गायनेकोलॉजिस्ट।

केस- २

केस- 1

राजकीय अमृतकौर अस्पताल में नसबंदी करने के लिए डॉक्टरों द्वारा दूरबीन से होने वाले ऑपरेशन में दो प्रकार की मशीनों का उपयोग किया जाता है। जानकारी के अनुसार एक मशीन ऐसी हैं जिससे मरीज के शरीर के एक ही जगह से दूरबीन प्रवेश करके उसी से ट्यूब तलाश कर उस पर रिंग पहना दी जाती है। इसमें ऑपरेशन के बाद एक ही टांका लगता है। जबकि दूसरी प्रकार की मशीन से एक तरफ से दूरबीन को प्रवेश करा कर ट्यूब को तलाशा जाता हैं और दूसरी ओर से दूरबीन का हिस्सा प्रवेश करा कर रिंग डालने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इस ऑपरेशन में मरीज के दो जगह टांके लगाए जाते है। अमूमन महिलाओं को एक ही टांका लगने का पता होने के चलते बाद में जब दो टांकों का पता चलता हैं तो विरोध की स्थिति पैदा हो जाती है।

सर्जरी वाले ऑपरेशन से बचाव को प्राथमिकता : दूसरे प्रकार के ऑपरेशन में सर्जरी ((शल्य क्रिया)) से नसबंदी का ऑपरेशन किया जाता है। इस प्रकार की नसबंदी कराने वाली महिलाओं में वे महिलाएं शामिल होती हैं जिनके दो बार ऑपरेशन से बच्चे हुए हो, या ऑपरेशन के वक्त ही डॉक्टर की सलाह व परिजन की सहमति मिलने के साथ ही नसबंदी कर दी गई हो। लेकिन दूरबीन वाले ऑपरेशन में सफलता नहीं मिलने पर डॉक्टरों द्वारा जब सर्जरी वाले ऑपरेशन की सलाह दी जाती हैं तो इस ऑपरेशन की जटिल प्रक्रिया को देखते हुए कई महिलाएं ऑपरेशन कराने से गुरेज कर लेती है।

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