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कुछ लोगों को दोपहर में सोना बहुत पसंद होता है, वहीं कुछ इसे हेल्थ प्रॉब्लम्स ( Health problems ) से ग्रसित होने का एक तरीका मानते हैं. सोना हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा है. अगर हम 7 से 8 घंटे रोजाना ठीक से नींद लेते हैं, तो इससे स्वस्थ रहने में मदद मिलती है. रात में नींद लेना अच्छा माना जाता है.

हेल्थ पर प्रभाव

आयुर्वेद और एलोपैथी में कहा जाता है, कि दोपहर में सोने से पेट संबंधित समस्या जैसे, पेट का फूलना, एसिडिटी और सूजन की प्रॉब्लम होने लगती है. आयुर्वेद एक्सपर्ट का कहना है कि खाने के बाद तुरंत बाद सोने से शरीर में कफ के गुण बर्बाद हो जाते हैं. आयुर्वेद कहता है कि इस स्थिति में स्निग्धा गुण बढ़ता है, जो कफ को प्रभावित करता है. ऐसे में पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है और पेट संबंधी समस्याएं होने लगती है.

इन लोगों को दोपहर में सोना चाहिए

आयुर्वेद का कहना है कि जिन लोगों की शारीरिक गतिविधियां अधिक हो, उन्हें थकान दूर करने के लिए दोपहर में सोना चाहिए. जो लोग लॉन्ग ट्रैवल करके, फिजिकल एक्टिविटी जैसे वर्कआउट करते हैं, बच्चे और जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें दोपहर में थोड़े समय के लिए सोकर आराम करना चाहिए. गर्मी में आपको वात की समस्या हो सकती है. गर्मी में दिन बड़े और रात छोटी होती है, ऐसे में आप दिन के समय सो सकते हैं.

इन लोगों को दोपहर में नहीं सोना चाहिए

आयुर्वेद के अनुसार जिन लोगों की कफ की गुणवत्ता कम हो उन्हें दिन में सोने से बचना चाहिए. जो लोग मोटापे से ग्रसित हों या फिर जो प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाते हो, उन्हें दिन में सोने से बचान चाहिए. ऐसे लोग दिन में सोते हैं, तो ये तरीका शरीर को बीमारियों का घर बना सकता है.
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