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घी के बारे में बहुत सारी सही-गलत मान्यताएं हैं। इनके बारे में जान लेना जरूरी है। आयुर्वेद में घी को औषधि माना गया है। कई बीमारियों के इलाज में देसी घी अर्थात शुद्ध घी खाने की सलाह दी जाती है। वहीं नई मां को तो खासतौर से शुरूआती एक महीने में घी और घी से बने पकवान दिए जाते हैं। घी मध्यम श्रृंखला फैटी एसिड से समृद्ध हाने के कारण लीवर द्वारा सीधा अवशोषित हो जाता है। जिससे एनर्जी का स्तर बढ़ने लगता है। इसलिए शारीरिक श्रम से जुड़े लोगों के साथ ही नई मां यानी स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए घी खाने की सलाह दी जाती है। इससे ब्रेस्ट मिल्क की मात्रा और गुणवत्ता में भी बढ़ोतरी होती है।
पोषक तत्वों से भरपूर है घी
घी में कैलोरी के अलावा विटामिन ए, डी, कैल्शियम, फॉरस्फोरस, मिनरल, पोटेशियम जैसे कई पोषक तत्व भी होते हैं। घी के सेवन से शरीर के साथ दिमाग भी चुस्त होता है। इससे दूध में ताकत आती है। जो बेबी की बोन हेल्थ और मांसपेशियों के लिए जरूरी है। पर अन्य पोषक आहारों के साथ घी का सही संतुलन होना जरूरी है। केवल घी खाने से मां और बेबी को पूर्ण पोषण नहीं मिल सकता।
कैसे खाएं घी
कई पोषक तत्वों से भरपूर घी का स्मोक पॉइंट 252 degree Celsius होता है। इसलिए घी के पकवान खाने से बेहतर है घी कच्चा ही खाया जाए। ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने के लिए घी को दूध, दाल, सब्जी आदि में डालकर खाया जा सकता है। पकने पर घी के केमिकल कम्पोजिशन में बदलाव आने लगता है। यह गुड कॉलेस्ट्रॉल की जगह बैड कॉलेस्ट्रॉल की ओर बढ़ जाता है। इसके बावजूद घी को किसी भी और कुकिंग ऑयल से बेहतर माना गया है। अगर आप घी के पकवान खाना चाहती हैं तो इसे जलाएं नहीं केवल गर्म करें।
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