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प्रेगनेंट महिला के शरीर में बदलाव
फिलहाल आपको बहुत ज्‍यादा थकान महसूस होगी। आपके बच्‍चे को बाहर आने में अभी समय है। फुल टर्म प्रेगनेंसी 40 सप्‍ताह की होती है जिसमें अभी कुछ समय बाकी है। डिलीवरी और शिशु के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर चिंता हो सकती है। अगर आपके मन में कोई सवाल है तो डॉक्‍टर से उसके बारे में जरूर बात करें।

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- हर इंसान को गैस और पेट फूलने की प्रॉब्‍लम होती है। आम इंसान दिन में लगभग 12 से 14 बार गैस पास करता है। वहीं प्रेगनेंट महिलाओं में प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन लेवल के बढ़ते लेवल की वजह से शरीर की मांसपेशियां रिलैक्‍स हो जाती हैं।

इसका मतलब है कि पाचन मार्ग की सभी मांसपेशियां भी रिलैक्‍स हो जाती हैं जिससे पाचन धीमा पड़ जाता है। इससे पेट में गैस अधिक बनने लगती है।

प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन के बढ़ने के कारण न सिर्फ प्रेगनेंट महिलाओं को ज्‍यादा गैस बनती है बल्कि उन्‍हें पब्लिक प्‍लेस में भी अक्‍सर यह समस्‍या ज्‍यादा होती है।

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गर्भवती महिलाओं का पाचन पहले की तुलना में लगभग 30 फीसदी धीमा हो जाता है। इसके कारण अधिक गैस बनने लगती है और ये गैस डकार या गुदा मार्ग के जरिए शरीर से बाहर निकलती है।

वहीं, गर्भ में शिशु को जगह देने के लिए गर्भाशय का आकार बढ़ता रहता है जिससे पेट, आंतों, मूत्राशय और आसपास के हिस्‍सों पर दबाव पड़ता है। पाचन धीमा पड़ जाता है और गैस अधिक बनती है।


अमूमन हर महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इस परेशानी से गुजरना ही पड़ता है। हालांकि, आप अपनी जीवनशैली और आहार में कुछ बदलाव कर के गैस की समस्‍या को खत्‍म कर सकती हैं।

ब्रोकली और बींस ज्‍यादा गैस बनाते हैं इसलिए प्रेगनेंसी डायट में इनका कम ही इस्‍तेमाल करें। इसके अलावा बंदगोभी, फूलगोभी, कार्बोहाइड्रेट युक्‍त और कुछ डेयरी प्रोडक्‍ट भी गैस पैदा करते हैं। शुगर फ्री चीजें खाएं और कार्बोनेटेड ड्रिंक्‍स कम पिएं।


जैसा कि हमने पहले भी बताया कि गर्भावस्‍था में गैस बनने की शिकायत अधिक रहती है इसलिए इससे निजात पाने के लिए खूब पानी पिएं। पानी पाचन को तेज करता है और कब्‍ज होने से बचाता है।

एक ही बार में ज्‍यादा खाने की बजाया थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। खाने को अच्‍छी तरह से चबाकर खाने से भी फायदा होता है। रोज एक्‍सरसाइज करें।


आपके बच्‍चे का विकास
आपका बच्‍चा इस समय करीब 18 इंच के आसपास है इसका वजन सवा दो से पौने तीन किलो के बीच हो सकता है। बच्‍चा बाहरी दुनिया के लिए खुद को तैयार कर चुका है हां उसका पाचन तंत्र पैदा होने के लगभग साल भर तक विकसित होता रहेगा। बहुत मुमकिन है कि वह जन्‍म लेने की अपनी पोजीशन में आ चुका हो, मतलब सिर नीचे। अगर नहीं, तो परेशान न हों अभी समय है वह इस स्थिति में आ सकता है।


प्रेगनेंसी के 36वें सप्‍ताह के लक्षण
बढ़ते वजन के सारे लक्षण पिछले हफ्तों जैसे ही रहेंगे इनमें पैरों में क्रैम्‍प्‍स पड़ना या ऐंठन, थकान के साथ चक्‍कर आना, कब्‍ज और बवासीर, नाक से खून आना, ब्रेस्‍ट से दूध आना वगैरह शामिल हैं। पर इस सप्‍ताह आपको जिन लक्षणों पर निगाह रखनी है वे हैं:

नकली लेबर पेन : इसे डॉक्‍टरी भाषा में Braxton Hicks Contractions भी कहते हैं। इनके होने का मतलब है कि आपका शरीर डिलीवरी की रिहर्सल कर रहा है। इस दौरान आपके गर्भाशय के ऊपरी हिस्‍से से संकुचन शुरू होकर नीचे की ओर बढ़ते हैं।ये 15 से 30 सेकंड तक रहते हैं कभी-कभी इससे ज्‍यादा भी। ऐसी स्थिति में आपको अपनी पोजीशन बदल लेनी चाहिए। मतलब अगर बैठी हैं तो खड़ी हो जाइए या कुछ कदम चलने लगिए। ये रुक जाएंगे। अगर ये न रुकें और समय के साथ बढ़ते जाएं तो समझ लीजिए आपके लेबर पेन की शुरूआत हो चुकी है। डॉक्‍टर से संपर्क कीजिए।
वजाइनल डिस्‍चार्ज : इस समय वजाइना से गाढ़ा पदार्थ निकलता है। यह आपको इन्‍फेक्‍शन से बचाने के लिए है। लेकिन अगर इसकी जगह पानी जैसा तरल निकलने लगे तो समझ जाइए कि डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू हो गई है।ऐसी स्थिति में बिना घबराए कोई सूती चादर या तौलिया इस तरह अपने पैरों के बीच लगा लीजिए कि पानी तेजी से न निकले और डॉक्‍टर के पास जल्‍द से जल्‍द पहुंचने की कोशिश करें।
बच्‍चे का बर्थ कैनाल में नीचे उतरना : यह आपके लिए राहत की सांस हो सकती है, क्‍योंकि इससे आपको सांस लेने में जो दिक्‍कत हो रही है वह कम हो जाएगी। बच्‍चा आपकी पेल्विक केविटी या बर्थ कैनाल में नीचे की ओर सरक आता है। इससे आपके अंदरूनी अंगों पर दबाव कुछ कम हो जाता है। अब आप भोजन भी आराम से कर सकेंगी।

हां, इस दौरान भी बच्‍चे के मूवमेंट पर पूरी नजर रखें, कम मूवमेंट या जरूरत से ज्‍यादा मूवमेंट करने पर डॉक्‍टर से संपर्क करें।

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प्रेगनेंट महिलाएं क्‍या करें
अगर आपको पेट में संकुचन महसूस हो रहा है तो डॉक्‍टर को फोन करें या अस्‍पताल जाएं। वजाइनल ब्‍लीडिंग (योनि से खून आना) या पेट में तेज दर्द होने पर भी आपको डॉक्‍टर को बताना चाहिए।

यदि शिशु की मूवमेंट में कमी महसूस हो रही है (एक घंटे में 10 से कम बार मूव करना) तो इस बारे में डॉक्‍टर को जरूर बताएं।

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