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आरोपण रक्तस्राव (इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग) क्या है?

गर्भावस्था की शुरुआत में रक्तस्त्राव का कारण भ्रूण का गर्भाशय की दीवार में आरोपित होना माना जाता था, इसलिए इसे आरोपण रक्तस्राव (इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग) नाम दिया गया है।

मगर इस सिद्धांत को अब माना नहीं जाता, क्योंकि हल्का रक्तस्त्राव आमतौर पर भ्रूण के आरोपित होने के बाद होता है।

जब डिंबवाही नलिका में शुक्राणु द्वारा डिंब निषेचित होता है, तो यह तेजी से कोशिकाओं का विभाजक गुच्छा बन जाता है, जिसे ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं। यह ब्लास्टोसिस्ट नलिका से नीचे आते हुए आपके गर्भाशय में पहुंचता है।

वहां यह ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय की दीवार में स्थापित होकर जगह बना लेता है, ताकि यह भ्रूण और अपरा के रूप में विकसित होना शुरु कर सके। निषेचन से आरोपण तक की इस यात्रा में पांच से छह दिन का समय लगता है।

हल्का रक्तस्त्राव शायद ब्लास्टोसिस्ट के आरोपित होने के बाद अपरा के विकसित होने के कारण होता है।

जिस दौरान अपरा आपके शिशु को पोषण और ऑक्सीजन प्रदान करने के लिए तैयार हो रही होती है, गर्भावस्था के हॉर्मोनों से उत्तेजित आपका शरीर अपना काम कर रहा होता है।

गर्भावस्था की शुरुआत में रक्तस्त्राव तीन दिन से भी कम समय के लिए रहता है। सामान्य रक्तस्त्राव हल्का होता है, इसलिए शायद शौचालय में जाकर पौंछने पर ही आपको इस रक्तस्त्राव का अहसास होगा या अपने अंडरवियर में खून के धब्बे दिखाई देंगे।

हालांकि, शुरुआती रक्तस्त्राव काफी आम है, मगर बेहतर है कि हमेशा डॉक्टर को दिखा लिया जाए। कभी-कभार रक्तस्त्राव किसी और गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

आपकी डॉक्टर चेक-अप करके रक्तस्त्राव के कारण का पता लगाएंगी। वे आपको निम्नांकि सलाह दे सकती हैं:

हॉर्मोन स्तरों की जांच के लिए पेशाब या खून की जांच
ग्रीवा की जांच। छोटी व अहानिकारक गांठ या सर्वाइकल या योनि संक्रमण भी रक्तस्त्राव का कारण हो सकता है।
योनि के जरिये अल्ट्रासाउंड स्कैन ताकि शिशु के दिल की धड़कन पता चल सके

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