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प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में तो नींद अच्छी तरह आ जाती है, लेकिन डिलिवरी की डेट नजदीक आते-आते समस्या गंभीर होती चली जाती है। ऐसा कई वजहों से हो सकता है जैसे कि टांगों में दर्द, पेट का बढ़ता साइज, कॉन्सटिपेशन और या फिर छाती में चुभन। लेकिन अच्छी और पूरी नींद लेना मां और होने वाले बच्चे के लिए बेहद ज़रूरी है।

दाईं तरफ करवट लेकर न सोएं

ज़्यादातर प्रेगनेंट महिलाएं कमर के बल सोती हैं। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान इस अवस्था में सोने के लिए मना किया जाता है। जब पेट में एक और ज़िंदगी पल रही हो तब इसका ख्याल रखना और भी ज़रूरी हो जाता है। कुछ अध्ययनों में बताया गया है कि प्रेग्नेंसी की सभी स्टेजों के दौरान साइड की करवट लेकर सोना सही है। इससे आप न सिर्फ अच्छी तरह से सांस ले पाएंगी बल्कि आपकी बॉडी भी नॉर्मल तरीके से फंक्शन करेगी। हालांकि अमेरिकन प्रेग्नेंसी असोसिएशन के मुताबिक, सोने के लिए सबसे बेस्ट पोज़िशन है लेफ्ट साइड। यानी प्रेगनेंट महिलाओं को बाईं तरफ करवट लेकर सोना चाहिए।

बाईं तरफ करवट लेकर सोने की वजह

बाईं तरफ करवट लेकर इसलिए सोना चाहिए क्योंकि लिवर, ऐब्डॉमन की दाईं तरफ स्थित होता है। जब आप दाईं तरफ करवट लेकर सोती हैं तो इससे लिवर पर ज़्यादा प्रेशर पड़ता है। बाईं तरफ करवट लेकर सोने से इस प्रेशर से लिवर को बचाया जा सकता है। बेबी की हेल्थ और नॉर्मल ग्रोथ के लिए ज़रूरी है कि आपका लिवर सही और नॉर्मल तरीके से फंक्शन करे और उसे पर्याप्त स्पेस मिले। इसके अलावा, इनफिरियर वेना केवा यानी IVC जोकि शरीर की सबसे बड़ी नस होती है, उस पर भी प्रेशर पड़ने की वजह से मां और बच्चे दोनों को ही नुकसानदायक हो सकता है।


ध्यान रखें
बाईं तरफ करवट लेकर सोने से एक फायदा यह भी होगा कि उससे बच्चे और आपके प्लेसेंटा को ज़्यादा से ज़्यादा पोषक तत्व और खून की आपूर्ति होगी। प्रेग्नेंसी में बेहद ज़रूरी है कि सही और पूरा पोषण व आराम मिले। इसके लिए टांगों के बीच तकिए लगाकर रखें। रात में सोते वक्त करवट बदलना भी ज़रूरी है, लेकिन अगर आप दाईं तरफ करवट लेकर भी उठती हैं तो उसमें कोई परेशानी नहीं है। डॉक्टर से सलाह-मशविरा कर सकती हैं।

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