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अल्ट्रासाउंड इमेजिंग, जिसे सोनोग्राफ़़ी भी कहते हैं, शरीर के अंदर की तस्वीर बनाने के लिए उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों (किसी इंसान को सुनाई दे उससे कहीं ज़्यादा उच्च) का उपयोग करती है।
अल्ट्रासाउंड तस्वीरें ऐसी दिखाई देती हैं जैसी वास्तव में शरीर में प्रतिक्रिया होती है। वे शरीर के आंतरिक अंगों की संरचना और प्रतिक्रिया को दिखा सकती हैं, साथ ही रक्त वाहिकाओं के माध्यम से खून का प्रवाह भी।
अल्ट्रासाउंड इमेजिंग में आयनीकृत रेडिएशन शामिल नहीं है, लेकिन कभी-कभी बेहोश करने की क्रिया का उपयोग होता है।
न्यूरोब्लास्टोमा से पीड़ित बच्चे में एड्रिनल मास (अधिवृक्क द्रव्यमान) दिखाता अल्ट्रासाउंड
न्यूरोब्लास्टोमा से पीड़ित बच्चे में एड्रिनल मास (अधिवृक्क द्रव्यमान) दिखाता अल्ट्रासाउंड
अल्ट्रासाउंड के उपयोग
रोग की पहचान
बचपन में होने वाले कैंसर के निदान में सहायता के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग किया जा सकता है:
न्यूरोब्लास्टोमा
हड्डियों का कैंसर
ईविंग सारकोमा
गुर्दे का कैंसर
जिगर का कैंसर
राबडोमायोसार्कोमा
जर्म सेल ट्यूमर
रेटिनोब्लास्टोमा
छाती, सिर, गर्दन, हाथ और पैर में मास (गांठ)
अल्ट्रासाउंड का उपयोग ट्यूमर की पहचान करने के लिए उपयोग की जाने वाली सुई बायोप्सी को निर्देशित करने के लिए भी किया जा सकता है। अल्ट्रासाउंड मददगार है क्योंकि इसकी मदद से चिकित्सक देख सकते हैं कि ट्यूमर आसपास की रक्त वाहिकाओं से कैसी प्रतिक्रिया कर रहा है।
अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया से गुज़रता बहुत कम उम्र का रोगी।
टेक्नोलॉजिस्ट, ट्रांसड्यूसर को रोगी की त्वचा पर उस जगह ठीक से दबाता है जहां जांच की जानी है।
अल्ट्रासाउंड इमेजिंग निम्निलिखित का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है
अपेंडिक्स
पेट/पाइलोरस (आमाशय का निचला द्वार)
जिगर
पित्ताशय की थैली
तिल्ली/प्लीहा
पाचक-ग्रंथि
आंत/बड़ी आंत
गुर्दा
मूत्राशय
वीर्यकोष
अंडाशय
गर्भाशय
थायराइड
धमनियां और नसें
जांच
कुछ बाल चिकित्सा सुविधाएं उन मरीजों की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग करती हैं, जिनकी आनुवांशिक स्थिति के कारण उनमें ट्यूमर विकसित होता है। उदाहरण के लिए, बेकविथ-विडेमैन, डेनिस-द्राश, फ्रेज़ियर और WAGR सिंड्रोम वाले रोगियों में विल्म्स ट्यूमर विकसित होने की संभावना होती है।
जेल के साथ अल्ट्रासाउंड ट्रांसड्यूसर की नज़दीक की तस्वीर
ट्रांसड्यूसर ध्वनि तरंगों को शरीर में भेजता है। तरंगें अंगों और ऊतकों से परावर्तित होती हैं, जिससे आंतरिक अंगों की तस्वीर बनती है।
यह कैसे काम करता है
एक अल्ट्रासाउंड टेक्नोलॉजिस्ट शरीर के अंदर की तस्वीर देखने के लिए ट्रांसड्यूसर नामक एक जांच का उपयोग करता है। ट्रांसड्यूसर ध्वनि तरंगों को शरीर में भेजता है। तरंगें अंगों और ऊतकों से परावर्तित होती हैं, जिससे आंतरिक अंगों की तस्वीर बनती है।
अल्ट्रासाउंड करने के लिए, रोगी को एक मेज पर लिटाया जाएगा। रोगी की वो जगह ढंकी नहीं होनी चाहिए जहां का अल्ट्रासाउंड होना है।
शरीर की जिस जगह का अल्ट्रासाउंड होना है वहां साफ़ जल-आधारित जेल लगाया जाता है। यह जेल एक कंट्रास्ट एजेंट नहीं है और उससे कोई दिक्कत नहीं होती। इस जेल की मदद से ट्रांसड्यूसर, त्वचा के साथ बेहतर संपर्क बना पाता है। जेल पहले ठंडा लग सकता है और जब अल्ट्रासाउंड खत्म हो जाता है, तो इसे पोंछ दिया जाएगा।
फिर टेक्नोलॉजिस्ट, ट्रांसड्यूसर को रोगी की त्वचा पर उस जगह ठीक से दबाता है जहां जांच की जानी है। सबसे अच्छी तस्वीर पाने के लिए, टेक्नोलॉजिस्ट उस जगह पर ट्रांसड्यूसर इधर-उधर हिलाता है।
कंट्रास्ट अध्ययन
कुछ अल्ट्रासाउंड में अंगों में खून के प्रवाह को देखने में सहायता के लिए एक कंट्रास्ट एजेंट का उपयोग किया जाता है।
अगर रोगी को पहले से IV या पोर्ट लगाया नहीं गया है, तो नर्स को IV की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। अगर IV की आवश्यकता है, तो कर्मचारी ऐसा करने से पहले माता-पिता और बच्चे से बात करेंगे।
प्रयोग किया जाने वाला कंट्रास्ट एजेंट एक प्रकार का माइक्रोबबल है, यह छोटे कणों में होता है जो लगभग लाल रक्त कोशिकाओं के समान आकार के होते हैं और अल्ट्रासाउंड इमेजिंग पर साफ़ दिखाई देते हैं। यह अल्ट्रासाउंड तस्वीर को साफ़ तरीके से लेने के लिए एक सुरक्षित, प्रभावी तरीका है। कंट्रास्ट एजेंट एक छोटी 3 मिलीलीटर की शीशी में होता है और दूधिया रंग का होता है। दुष्प्रभाव मुश्किल से ही होते हैं और जब वे होते हैं, तो वे हल्के और कम समय रहते हैं (जैसे आपके मुंह में एक अज़ीब स्वाद)। अगर माता-पिता के पास माइक्रोबबल के उपयोग को लेकर कोई सवाल है, तो उन्हें टेक्नोलॉजिस्ट या चिकित्सक से पूछना चाहिए।
डॉपलर अल्ट्रासाउंड
एक डॉपलर अल्ट्रासाउंड अध्ययन, अल्ट्रासाउंड परीक्षा का एक हिस्सा हो सकता है। डॉपलर अल्ट्रासाउंड एक ऐसी तकनीक है जो शरीर की प्रमुख धमनियों और नसों सहित रक्त वाहिकाओं के माध्यम से खून के प्रवाह को दिखाती है। यह इस तरह की चीजें दिखाने में मददगार है
खून के प्रवाह को अवरुद्ध करने वाली चीजें, जैसे थक्के
रक्त वाहिकाओं का अधिक पतला होना
रक्त वाहिकाओं और नाड़ी तंत्र में ट्यूमर और दोष
बचपन में होने वाले कैंसर से पीड़ित बच्चा पिता, अल्ट्रासाउंड टेक्नोलॉजिस्ट और बाल जीवन विशेषज्ञ के साथ अल्ट्रासाउंड कमरे में जाता है
अल्ट्रासाउंड तस्वीरें ऐसी दिखाई देती हैं जैसी वास्तव में शरीर में प्रतिक्रिया होती है।
अल्ट्रासाउंड की तैयारी के लिए रोगी क्या करते हैं?
रोगियों को आरामदायक, ढीले-ढाले कपड़े पहनने चाहिए। उन्हें शरीर की उस जगह के कुछ कपड़ों या गहनों को हटाना होगा जहां की जांच की जाएगी या रोगियों को अल्ट्रासाउंड के दौरान अस्पताल का गाउन पहनना पड़ सकता है।
जिगर, पित्ताशय की थैली, तिल्ली/प्लीहा और पाचक-ग्रंथि के अल्ट्रासाउंड के लिए, मरीजों को निर्देश दिया जाता है कि वे परीक्षण से पहले 6 से 8 घंटे तक न कुछ खाएं और न पिएं।
गुर्दा, मूत्राशय और पेल्विस के अल्ट्रासाउंड के लिए, मरीजों को मूत्राशय को भरने के लिए परीक्षण से पहले 2 से 3 घंटे (पेशाब के बिना) 64 औंस तक तरल पदार्थ पीने के लिए कहा जा सकता है। पीने के लिए सबसे अच्छा तरल पदार्थ पानी होता है। हो सकता है कि एक छोटा बच्चा 64 औंस न पी सके, लेकिन खास बात यह है कि मूत्राशय को खाली किए बिना जितना संभव हो उतना पीना है।
बचपन में होने वाले कैंसर से पीड़ित बच्चे का अल्ट्रासाउंड करवाते समय उसके पिता पास ही होते हैं
बचपन में होने वाले कैंसर से पीड़ित बच्चे को एक मेज पर लिटाया जाएगा। रोगी की वो जगह ढंकी नहीं होनी चाहिए जहां का अल्ट्रासाउंड होना है।
परिणामों की जांच कौन करता है और मुझे परिणाम कब मिलेंगे?
रेडियोलॉजी की देखरेख और जांच के लिए प्रशिक्षित एक चिकित्सक, जिसे विकिरण चिकित्सक कहते हैं तस्वीरों को ध्यान से देखेगा। फिर वह चिकित्सक, प्राथमिक देखभाल करने वाले चिकित्सक या अल्ट्रासाउंड में शामिल अन्य स्टाफ़ सदस्य को एक हस्ताक्षरित रिपोर्ट भेजेगा। प्राथमिक चिकित्सक, रोगी और माता-पिता के साथ परिणाम साझा करेगा। दुर्लभ मामलों में, विकिरण चिकित्सक रोगी के अल्ट्रासाउंड के अंत में परिणामों के बारे में बात कर सकता है।
अनुवर्ती जांच हो सकती है, ताकि देखा जा सके कि समय के साथ कोई असामान्यता तो नहीं है। अनुवर्ती जांच कभी-कभी यह देखने का सबसे अच्छा तरीका है कि क्या इलाज काम कर रहा है या समय के साथ एक असामान्यता बनी हुई है।
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