Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
बायोप्सी या फाइब्रो स्कैन की जगह अल्ट्रासाउंड से ही सस्ते में बिना चिरफाड़ के फैटी लिवर की सटीक जांच
फैटी लिवर की समस्या से ग्रसित मरीजों को लिवर सिरोसिस होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। ऐसी स्थित में मरीज की जांच के लिए लिवर में छेद कर बायोप्सी ली जाती है। इससे मरीज को शारीरिक पीड़ा तो सहनी पड़ती ही है। साथ ही आर्थिक मार भी। इसके अलावा जांच करने व रिपोर्ट आने में भी काफी समय लग जाता है। वैसे तो फाइब्रो स्कैन के माध्यम से भी फैटी लिवर की जांच की जाती है, लेकिन मोटे लोगों की जांच में इसकी रिपोर्ट सही नहीं आ पाती है। ऐसे में चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आइएमएस), बीएचयू के विज्ञानियों ने एक विकल्प ढूंढा है। अब यह जांच अल्ट्रासाउंड से भी हो सकती है, जिसकी रिपोर्ट सटीक भी है।
100 मरीजों पर किया गया शोध
संस्थान के तीन विभागों इंडोक्राइनोलाजी, गैस्ट्रोएंट्रोलाजी व रेडियोलाजी के विज्ञानियों ने 100 मरीजों पर शोध किया है। यह शोध इंडोक्राइनोलाजी विभाग के प्रो. एसके सिंह के निर्देशन में हुआ है। इसमें डा. भारमल वाहिद, प्रो. आशीष वर्मा, प्रो. वीके दीक्षित, डा. सौरभ सिंह की भी अहम भूमिका रही है।
प्रो. एसके सिंह आइएमएस के निदेशक भी हैं। शोध में पाया गया है कि डाप्लर अल्ट्रा साउंड से भी फैटी लिवर की जांच हो सकती है। यह शोध जर्नल आफ डायबिटीज एंड मेटोबोलिक सिंड्रोम क्लिनिकल रिसर्च एंड रिव्यू में पिछले माह आनलाइन हुआ।
तुरंत पता चलेगा लिवर में फैटी की मात्रा
प्रो. सिंह बताते हैं कि नान अल्कोहलिक फैटी लिवर की प्रमुख समस्या में से एक है। गले की मोटी नस की मोटाई के आधार पर ही अल्ट्रासाउंट से पता चल जाएगा कि लिवर में फैट की मात्रा कितनी है। इस जांच में मरीज को भर्ती होने की भी जरूरत नहीं है, जबकि बायोप्सी में तमाम प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
यह एक प्रकार का आपरेशन भी हो जाता है। इसमें रिस्क भी रहता है। इसके बाद एक टूकड़ा काटकर लैब में जांच के लिए भेजा जाता है, जिसकी रिपोर्ट आने में भी एक सप्ताह से अधिक का समय लग जाता है। बताया कि शोध के दौरान शुगर के 253 मरीजों की जांच करी गई थी, जिसमें 100 मरीजों में फैटी लिवर की समस्या पाई गई थी।
| --------------------------- | --------------------------- |