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ओवेरियन सिस्ट का प्रकार और आकार (Ovarian Cyst Size Chart in Hindi)
ओवरी में गांठ यानी सिस्ट बनने की स्थिति को मेडिकल भाषा में ओवेरियन सिस्ट कहते हैं। ओवरी महिला की प्रजनन प्रणाली का एक महतवपूर्ण हिस्सा होता है। हर महिला में दो ओवरी होते हैं।
अंडों का निर्माण ओवरी में होता है और वे वहीं पूर्ण रूप से तैयार (परिपक्व/मैच्योर) होते हैं। ओवरी से अंडो के बाहर आने की प्रक्रिया को ओवुलेशन कहते हैं।
मैच्योर होने के बाद अंडे ओवरी से बाहर निकलकर फैलोपियन ट्यूब में चले जाते हैं जहां पुरुष स्पर्म उन्हें फर्टिलाइज करता है।
फर्टिलाइजेशन के बाद प्रेगनेंसी की प्रक्रिया शुरू होती है। ओवरी में किसी तरह की समस्या होने पर ओवुलेशन नहीं होता है।
ओवुलेशन नहीं होने पर अंडे रिलीज नहीं होते हैं। नतीजतन, महिला को गर्भधारण करने में दिक्कते आती हैं। ओवरी में कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं, सिस्ट बनना भी उन्हीं में से एक है।
ओवेरियन सिस्ट का प्रकार और आकार (Types of Ovarian Cyst & Their Sizes in Hindi)
ओवेरियन सिस्ट कई प्रकार के होते हैं जिन्हें उनके कारण और प्रवृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ओवेरियन सिस्ट का आकार भी इस बात पर निर्भर करता है कि यह किस प्रकार का सिस्ट है।
ओवेरियन सिस्ट का आकार कई कारकों में से एक है जो यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि सिस्ट को सर्जरी द्वारा हटाने की आवश्यकता है या नहीं।
आमतौर पर ओवेरियन सिस्ट का आकार 50-60 मिलीमीटर यानी 2-2.5 इंच से कम होने पर सर्जरी का सुझाव नहीं दिया जाता है। हालांकि, यह दिशानिर्देश हर स्थिति में लागु नहीं होता है।
उदाहरण के तौर पर, एक साधारण सिस्ट जब तक 10 सेमी (4 इंच) का नहीं हो जाता उसे छोड़ा जा सकता है। और कैंसरयुक्त सिस्ट का आकार बहुत छोटा होने पर भी उसे सर्जरी की मदद से निकाला जा सकता है।
आइए प्रत्येक प्रकार के सिस्ट और उनके आकार के बारे में विस्तार से जानते हैं:-
फंक्शनल सिस्ट
फंक्शनल सिस्ट को कार्यात्मक सिस्ट भी कहते हैं। जब आपका मासिक धर्म अपने सामान्य पैटर्न को फॉलो करता है तो फंक्शनल सिस्ट बनते हैं। कुछ मामलों में इनका आकार लगातार बढ़ सकता है।
फंक्शनल सिस्ट के दो उदाहरण निम्न हैं:-
फॉलिकुलर सिस्ट
मासिक धर्म के दौरान ओवरी में अंडों का निर्माण होता है जिसे फॉलिकल कहते हैं। फॉलिकल एक थैली की तरह होता है जो अंडाशय के अंदर मौजूद होता है।
समय आने पर जब यह थैली नहीं फटती है तो अंडे बाहर नहीं निकल पाते हैं। नतीजतन, थैली में मौजूद द्रव जमा होकर सिस्ट का निर्माण करते हैं।
फॉलिकुलर सिस्ट का आकार डायमीटर में कुछ मिलीमीटर से लेकर 15 सेमी तक हो सकता है।
कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट
ओवुलेशन के बाद खाली फॉलिकल नहीं सिकुड़ने के कारण कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट का निर्माण हो सकता है।
थैली सिकुड़ने के बजाय बंद हो जाती है और इसमें तरल पदार्थ भरना शुरू हो जाता है जो बाद में कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट का कारण बनता है।
अधिकतर फंक्शनल सिस्ट का आकार 2-5 सेमी होता है। ओव्यूलेशन तब होता है जब इन सिस्ट का आकार लगभग 2-3 सेमी होता है। हालांकि, कुछ सिस्ट का आकार 8-12 सेमी तक भी हो सकता है।
ड्रमोइड सिस्ट
डर्मोइड सिस्ट को टेराटोमास भी कहा जाता है। उनमें त्वचा, बाल और वसा जैसे विभिन्न प्रकार के ऊतक मौजूद हो सकते हैं। अधिकतर मामलों में डर्मोइड सिस्ट के लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि, इनका आकार बढ़ने पर लक्षण और जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। डर्मोइड सिस्ट का आकार बहुत धीमी गति से बढ़ता है। इसका आकार अक्सर प्रति वर्ष लगभग 1.8 मिमी की दर से बढ़ता है।
हालांकि, डर्मोइड सिस्ट में बड़े होने की क्षमता होती है। शोध के मुताबिक, कुछ डर्मोइड सिस्ट अधिक तेजी यानी प्रति वर्ष 8-25 मिमी की दर से बढ़ सकते हैं।डर्मोइड सिस्ट का आकार डायमीटर में 1 सेंटीमीटर से 45 सेंटीमीटर तक हो सकता है।
सिस्टेडेनोमास
सिस्टेडेनोमास सौम्य ट्यूमर हैं जो अंडाशय की सतह पर विकसित होते हैं। उनमें मवाद जैसा द्रव भरा हो सकता है। जब अल्ट्रासाउंड का उपयोग करके देखा जाता है तो सिस्टेडेनोमा अक्सर एक फंक्शनल सिस्ट की तरह दिखता है। फंक्शनल सिस्ट आमतौर पर कुछ मासिक धर्म चक्र के बाद अपने आप ही दूर हो जाते हैं, लेकिन सिस्टेडेनोमा का आकार लगातार बढ़ता रहता है। सिस्टेडेनोमा का आकार 1-30 सेमी तक हो सकता है।
एंडोमेट्रियोमास
एंडोमेट्रियोसिस के कारण एंडोमेट्रियोमास बनता है। एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जहां गर्भाशय के अस्तर की कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित होती हैं। यह ऊतक अंडाशय की सतह से जुड़कर सिस्ट बना सकता है।
अनुमान लगाया गया है कि एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित 17 से 44 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोमा होगा। इन सिस्ट को कभी-कभी चॉकलेट सिस्ट कहा जाता है, क्योंकि इनमें गाढ़ा, गहरा रक्त हो सकता है जो उन्हें भूरा रंग प्रदान करता है।
एंडोमेट्रियोमा आमतौर पर छोटे होते हैं, लेकिन अन्य सिस्ट की तरह, वे कई आकारों के हो सकते हैं। एंडोमेट्रियोमा का आकार 5 सेमी से लेकर 20 सेमी तक हो सकता है।
ओवेरियन सिस्ट से कैसे छुटकारा पाएं (Ovarian Cyst Ka Ilaaj)
ओवेरियन सिस्ट से छुटकारा पाने के अनेक उपाय उपलब्ध हैं। डॉक्टर आमतौर पर ओवेरियन सिस्ट के कारण, प्रकार और गंभीरता की पुष्टि करने के बाद उपचार के विकल्प का चयन करते हैं।
ओवेरियन सिस्ट कुछ समय के अंदर अपने आप ही सिकुड़कर खत्म हो जाते हैं। ओवेरियन सिस्ट को दूर करने के लिए डॉक्टर हार्मोनल दवाओं, सर्जरी और डाइट एवं जीवनशैली में बदलाव का सुझाव देते हैं।
ओवेरियन सिस्ट होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए (When to See a Doctor For Ovarian Cyst)
कुछ महिलाओं को इस बात का अंदाजा नहीं होता है कि ओवेरियन सिस्ट होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।
अगर आप नीचे दिए गए लक्षणों को खुद में अनुभव करती हैं तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
चुभन होना
जी मिचलाना
योनि में दर्द महसूस होना
पेट के निचले हिस्से में रुक-रुक कर दर्द होना
पेट के निचले हिस्से में भारीपन जैसे महसूस होना
ओवेरियन सिस्ट के लक्षणों को नजरअंदाज या उसकी इलाज में देरी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ओवेरियन सिस्ट आगे जाकर कैंसर का कारण बन सकता है।
ओवेरियन सिस्ट का बचाव (Prevention of Ovarian Cyst)
कुछ बातों को ध्यान में रखकर ओवेरियन सिस्ट की संभावना को कम किया जा सकता है। अगर आप खुद को ओवेरियन सिस्ट से बचाना चाहती हैं तो नीचे दी गई बातों का पालन कर सकती हैं।
रूटीन चेकअप कराएं, क्योंकि इससे शुरुआती स्टेज में ओवेरियन सिस्ट का पता चलता है। सौम्य ओवेरियन सिस्ट कैंसर नहीं बनते हैं। हालांकि, ओवेरियन कैंसर के लक्षण ओवेरियन सिस्ट के लक्षणों जैसे हो सकते हैं।
इसलिए यह आवश्यक है कि आप समय पर डॉक्टर से मिलकर उचित निदान कराएं। निम्न लक्षण अनुभव होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
मासिक धर्म चक्र में बदलाव आना
पेल्विक क्षेत्र में दर्द होना
भूख में कमी आना
अस्पष्टीकृत रूप से वजन घटना
पेट फूलना
निष्कर्ष
ओवरी में सिस्ट बनने की स्थिति को ओवेरियन सिस्ट, ओवरी में गांठ या अंडाशय में गांठ के नाम से जाना जाता है। ओवेरियन सिस्ट का प्रकार और आकार अलग-अलग हो सकता है।
अधिकतर मामलों में ओवेरियन सिस्ट कुछ महीनों के भीतर अपने आप ही गायब हो जाते हैं। लेकिन ऐसा नहीं होने पर डॉक्टर मेडिकल उपचार का इस्तेमाल करते हैं।
कुछ ओवेरियन सिस्ट एक समय के बाद महिला की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में, महिला की प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए डॉक्टर सिस्ट को बाहर निकाल देते हैं।
फंक्शनल सिस्ट, सिस्टेडेनोमास या डर्मोइड सिस्ट प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:-
ओवरी में सिस्ट हो तो क्या खाना चाहिए?
ओवेरियन सिस्ट होने पर हरी पत्तेदार सब्जियों और ताजा फलों का सेवन करना चाहिए। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
ओवरी में सिस्ट हो तो क्या नहीं खाना चाहिए?
ओवेरियन सिस्ट होने पर जंक फूड्स, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब, सिगरेट और तैलीय एवं मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
ओवरी का साइज क्यों बढ़ता है?
ओवरी का आकार किसी विकार या ट्यूमर के कारण बढ़ सकता है।
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