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जन्म के समय शिशु का नॉर्मल वेट 2.5 से 3.5 किलो के बीच होना चाहिए। नौ महीने यानि फुल टर्म में पैदा हुए 80 पर्सेंट बच्चों का वजन इतना ही होता है। इससे कम या ज्यादा वजन वाले बच्चे नॉर्मल होते हैं लेकिन डिलीवरी के बाद नर्स और डॉक्टर को बारीकी से यह देखना होता है कि इन बच्चों में कहीं कोई प्रॉब्लम तो नहीं है।
कम जन्म वजन शिशु क्या होता है?
भारतीय शिशु का औसत वजन 2.8 किलोग्राम होता है। इसका मतलब है कि पूर्ण अवधि, अर्थात नौ महीने पर पैदा होने वाले अधिकांश भारतीय शिशुओं का वजन 2.5 किलोग्राम से तीन किलोग्राम के बीच होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के अनुसार, 2.5 कि.ग्रा. से कम वजन वाला शिशु कम जन्म वजन शिशु कहलाता है। भले ही वह गर्भावस्था के किसी भी चरण पर पैदा हुआ हो। भारत में 10 में से दो पूर्ण अवधि वाले शिशु कम वजन के साथ पैदा होते हैं।
2 कि.ग्रा. से कम वजन वाले शिशुओं को जन्म के बाद कुछ सप्ताह तक विशेष प्रसवोपरांत नवजात देखभाल की जरुरत होती है। इसलिए स्वस्थ और हृष्ट-पुष्ट होने और घर जाने के लिए तैयार होने तक उन्हें विशेष देखभाल में रखा जाता है।
कम जन्म वजन शिशु, समय-पूर्व जन्मे शिशु से किस प्रकार अलग है?
समय-पूर्व जन्मे शिशु (प्रीमैच्योर शिशु) वे हैं, जो गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले पैदा होते हैं। चूंकि उन्होंने माँ के गर्भ में अपना समय और विकास पूरा नहीं किया, इसलिए उन्हें प्रसवोपरांत नवजात गहन देखभाल कक्ष (एन.आई.सी.यू.) में खास देखरेख की आवश्यकता हो सकती है। आमतौर पर ऐसे शिशुओं का जन्म के समय वजन कम होता है।
दूसरी ओर, कम जन्म वजन जन्म शिशु पूर्ण अवधि शिशु (गर्भावस्था के 37वें सप्ताह के बाद जन्मे) होते हैं, परन्तु उनका वजन 2500 ग्राम से कम होता है। उन्हें अवधि से छोटे शिशु (स्मॉल फॉर डेट /एस एफ डी) भी कहा जाता है।
पूर्ण अवधि वाले शिशुओं का जन्म के समय वजन कम क्यों होता है?
शिशु में कम जन्म वजन होने के कई कारण हैं, जैसे:
जुड़वां या इससे अधिक शिश अक्सर जल्दी पैदा होते हैं और कम वजन के होते हैं। उन्हें गर्भ में विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती।
कभी-कभी शिशु इसलिए छोटे होते हैं, क्योंकि उन्हें कोई बीमारी या जटिलता विरासत में मिली है। यह जन्म के बाद कोई रुग्णता या विकलांगता का कारण बन सकती है।
हो सकता है अपरा संबंधी कोई जटिलता रही हो, शायद प्रीएक्लेम्पसिया के कारण। इससे शिशु तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। इस कारण पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व न मिलने से शिशु का सही प्रकार से विकास नहीं हो पाता है।
शिशु का जन्म के समय कम वजन तब भी हो सकता है, अगर आपको गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य सम्बंधी या भावनात्मक समस्याएं हुई हों जैसे:
गर्भावस्था के दौरान एनीमिया या खून कि कमी
पिछला कोई गर्भपात, मृत शिशु का जन्म, पिछला कोई कम वजन का जन्म अथवा समयपूर्व प्रसव
पहले से मौजूद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे दमा, मधुमेह या गुर्दों की बीमारी
गर्भावस्था के दौरान कुछ प्रकार के संक्रमण जैसे टॉक्सोप्लाज्मोसिस अथवा लिस्टिरीओसिस
आर.एच. असंगतता, गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं या नीचे स्थित अपरा (प्लेसेंटा प्रेविया) जैसी जाटिलताएं
प्रसवपूर्व देखभाल की कमी
यौन संचारित रोग जैसे एचआईवी-एड्स
तनाव अथवा गर्भावस्था अवसाद
हेरोइन या कोकीन जैसी अवैध नशीली ड्रग्स लेना
बहुत ज्यादा मदिरा पान और धूम्रपान (स्वयं द्वारा अथवा आसपास अन्य लोगों द्वारा) करना
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