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शिशु के एक साल का हो जाने के बाद से डॉक्टर हर छह महीने में उसे डीवर्मिंग उपचार देने की सलाह देते हैं। जब आपका नन्हा शिशु चलने लग जाता है, तो उसे कीड़ों का इनफेक्शन होने का खतरा शुरु हो जाता है। अपने बच्चे को नियमित तौर पर डॉक्टर के पास जांच के लिए ले जाएं और नियत समय पर कीड़ों को खत्म करने का उपचार करवाएं।
शिशुओं और बच्चों में कीड़ों का इनफेक्शन होना कितना आम है?
कीड़ों का संक्रमण काफी आम हैं और आसानी से फैलता है। हालांकि, यह बता पाना मुश्किल है कि ये इनफेक्शन कितने आम हैं, क्योंकि इनके अक्सर कोई लक्षण नहीं होते और इनके बारे में सूचना भी नहीं मिल पाती।
अध्ययनों के अनुमान के अनुसार भारत में रहने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति को कम से कम एक प्रकार का कीड़ों का संक्रमण अवश्य होता है। वहीं, छोटे बच्चों में तो यह इससे भी अधिक आम माना जाता है।
कीड़ों के अलग-अलग तरह के इनफेक्शन होते हैं। पिनवर्म जिन्हें थ्रेडवर्म भी कहा जाता है छोटे बच्चों को प्रभावित करने वाले सबसे आम प्रकार के कीड़ें हैं। ये मोटे धागे के टुकड़े जैसे दिखते हैं, इनकी लंबाई करीब स्टेपल पिन जितनी, तीन मि.मी. से 10 मि.मी. तक लंबी हो सकती है।
हुकवर्म, राउंडवर्म और व्हिपवर्म इनफेक्शन भी भारत में आम हैं। शिशु में कीड़ों के इनफेक्शन का पता चलना काफी परेशान कर देने वाला हो सकता है। सौभाग्यवश, इन कीड़ों से पीछा छुड़ाना काफी आसान है और इसमें अपेक्षाकृत कम समय लगता है।
कीड़ों का इनफेक्शन होने के क्या लक्षण हैं?
अधिकांशत: कीड़ों का इनफेक्शन होने के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। या फिर हो सकता है कि ये लक्षण इतने हल्के हों, कि उन पर ध्यान ही न जाए।
शिशु को कीड़ों का कौन सा संक्रमण हुआ है और यह कितना गंभीर है, इसे देखते हुए बच्चे में कुछ आम संकेत या लक्षण हो सकते हैं। अगर आपके बच्चे को इनमें से कोई भी लक्षण हो, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं:
पेट में दर्द।
वजन घटना।
चिड़चिड़ापन।
मिचली।
मल में खून आना।
उल्टी या खांसी, संभव है कि खांसी या उल्टी के जरिये कीड़ा बाहर निकल आए।
गुदा के आसपास खुजली या दर्द, जहां से कीड़े अंदर दाखिल हुए। यह खासकर पिन वर्म के मामलों में होता है।
खुजलाहट की वजह से ठीक से नींद न आना।
मूत्रमार्ग संक्रमण (यू.टी.आई.) की वजह से बार-बार पेशाब जाना। यह लड़कियों में अधिक आम है।
आंतरिक रक्तस्त्राव जिससे की आयरन की कमी और एनीमिया, पोषक तत्वों का सही अवशोषण न होना, दस्त (डायरिया) और भूख न लगना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
अगर, बहुत सारे कीड़े हों, तो आंतों में अवरोध भी हो सकता है, मगर ऐसा बहुत ही दुर्लभ है। कुछ बच्चों में उल्टी के साथ कीड़े निकल सकते हैं (आमतौर पर राउंड वर्म जो कि अर्थवर्म जैसे दिखते हैं)।
गंभीर टेपवर्म इनफेक्शन की वजह से दौरे भी पड़ सकते हैं।
पाइका (न खाने योग्य, अपौष्टिक चीजें जैसे कि मिट्टी, चॉक, कागज आदि खाना) भी कीड़ों का इनफेक्शन होने का एक अन्य संकेत है।
कुछ डॉक्टरों का कहना है कि दांत पीसना भी कीड़ों का संक्रमण होने का संकेत हो सकता है। मगर इस विषय पर शोधकर्ताओं की राय अलग-अलग है।
अगर, आपके शिशु को थ्रेडवर्म का हल्का संक्रमण हो, तो हो सकता है उसे कोई लक्षण न हों। वह नितंबों में खुजली होने की शिकायत कर सकता है, खासकर कि रात में।
शिशु के सो जाने के बाद रात को उसके नितंब देखें। उसके दोनों नितंबों को थोड़ा अलग करते हुए, टॉर्च की रोशनी से उसकी गुदा के आसपास की जगह देखें।
अगर, उसे थ्रेडवर्म हुए तो, आपको एक या इससे ज्यादा कीड़े बाहर निकलते हुए, या शिशु के पायजामे और चादर पर दिख सकते हैं। शिशु के मल में भी आपको ये थ्रेडवर्म दिख सकते हैं।
यदि आपके शिशु को हुकवर्म से इनफेक्शन हुआ है, तो उसे निम्न लक्षण हो सकते हैं:
जिस जगह से कीड़ों ने त्वचा में प्रवेश किया है, उस स्थान पर चकत्ते और खुजलाहट हो सकती है, विशेषकर पित्ती (हाइव्स-आर्टिकेरिया)
एनीमिया
अगर आपके शिशु को ऐसे कोई भी लक्षण हों, तो अधिक जानकारी व उपचार के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
शिशु में कीड़ों के इनफेक्शन का उपचार कैसे करुं?
सौभाग्यवश, कीड़ों के लगभग सभी संक्रमणों का उपचार मुंह से लेने वाली (ओरल) दवाओं से किया जा सकता है। आपके बच्चे को किस तरह का संक्रमण है, उसके आधार पर डॉक्टर दवाएं या कीड़ों को खत्म करने का उपचार (डीवर्मिंग) शुरु करेंगे। बच्चे को यदि एनीमिया हो तो उसे आयरन अनुपूरक लेने की भी जरुरत होगी।
कीड़ों के संक्रमण के लिए डॉक्टर की पर्ची के बिना मिलने वाली कोई भी दवा या औषधि न लें। कुछ एंटी-वर्म दवाएं दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए उचित नहीं होती हैं।
हो सकता है आप वैकल्पिक उपचारों जैसे कि जड़ी-बूटी या आयुर्वेदिक उपचार अपनाना चाहें। इनकी प्रभावशीलता के बारे मे ज्यादा प्रमाण उपलब्ध नहीं है। बेहतर यही है कि कुछ भी उपचार आजमाने से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य बात करें।
कीड़ों का संक्रमण आसानी से फैलता है और इसका दोबारा हो जाना भी काफी आम है। एहतियात के लिए डॉक्टर शायद आपके पूरे परिवार को कीड़ों को खत्म करने का उपचार करवाने की सलाह दे सकते हैं, चाहे फिर अन्य किसी को कीड़े हों या न हों।
मैं शिशु को कीड़े होने से बचाने के लिए क्या कर सकती हूं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की सलाह है कि प्रीस्कूल के बच्चों को नियमित रूप से कीड़ों को खत्म करने का उपचार दिया जाए। शिशु के एक साल का हो जाने के बाद से डॉक्टर हर छह महीने में उसे डीवर्मिंग उपचार देने की सलाह देते हैं।
जब आपका नन्हा शिशु चलने लग जाता है, तो उसे कीड़ों का इनफेक्शन होने का खतरा शुरु हो जाता है। अपने बच्चे को नियमित तौर पर डॉक्टर के पास जांच के लिए ले जाएं और नियत समय पर कीड़ों को खत्म करने का उपचार करवाएं।
निम्नांकित सुझावों को अपनाकर आप उसे कीड़ों के संक्रमण से सुरक्षित रख सकती हैं:
शिशु की लंगोट (नैपी) नियमित रूप से बदलती रहें और इसके बाद अपने हाथों को अच्छे से धो लें।
अपने घर को अक्सर अच्छे कीटनाशक से साफ करती रहें
जब आपका शिशु चलना शुरु कर देता है, तो उसे पैरों को ढक लेने वाले जूते पहनाएं। सुनिश्चित करें कि बाहर खेलते समय बच्चा ये जूते अवश्य पहने। घर आने के बाद उसके हाथों और पैरों को अवश्य धो दें।
अपने बच्चे को झीलों, बांधों और कीचड़ से दूर रहकर ही खेलने दें।
शिशु को कीचड़ वाली जगहों, नमी वाले रेत की टीलों और मिट्टी से दूर रखें। मानसून के दिनों में विशेष ध्यान रखें, जब अक्सर पानी जमा हो जाता है। दूषित पानी कहीं से भी आ सकता है।
हमेशा ध्यान रखें कि शिशु साफ और सूखी जगह पर ही खेले।
अपने बच्चे को पानी की जगहों पर जैसे कि कीचड़, गढ्ढ़ों, झीलों या बांधों के आसपास न खेलने दें।
सुनिश्चित करें कि शिशु पेशाब या शौच के लिए स्वच्छ शौचालय का ही इस्तेमाल करे।
अपने शौचालय को साफ रखें। हर बार पेशाब करने या मल त्याग के बाद शिशु के नितंबों को धो दें। इसके बाद अपने हाथों को भी अच्छी तरफ धोएं। यदि आपका शिशु बड़ा है तो आप उसे हर बार शौचालय के इस्तेमाल के बाद हाथ धोने के बारे में सिखाएं।
सुनिश्चित करें कि आपके परिवार के सदस्य खाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद अपने हाथ साबुन से अवश्य धोएं।
बच्चे के नाखून छोटे और साफ रखें। कीड़ों के अंडे लंबे नाखूनों में फंस सकते हैं और पूरे घर में फैल सकते हैं।
हमेशा साफ पानी पीएं। आप पानी को उबाल सकते हैं या फिर फिल्टर कर सकती है।
फल और सब्जियों को साफ पानी में अच्छे से धोएं। हरी पत्तेदार सब्जियों को धोते समय विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि उनमें मिट्टी और धूल लगी रह सकती है।
खाना बनाने से पहले देख लें कि मांस और मछली ताजा हो। मांस और मांस और मछली को अच्छी तरह पकाएं, ताकि वह कच्चा न रहे।
अगर आपके घर में कामवाली या आया शिशु की देखभाल करती है, तो सुनिश्चित करें कि वह साफ-सुथरी रहती हो। परिवार के अन्य सदस्यों के साथ-साथ घर में काम करने वाली कामवाली को भी कीड़े खत्म करने की दवाई दिलवाना सही रहता है।
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