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शास्त्रानुसार किस दिन शारीरिक संबंध बनाना माना जाता है शुभ, बुधवार को जन्मी संतान हो सकती है बुद्धिमान
शास्त्रों में मानव जीवन के हर एक पहलू के बारे में बताया गया है। इनमें एक है स्त्री-पुरुष के बीच शारीरिक संबंध बनाने का समय। कुछ लोग बिना किसी समय के शारीरिक संबंध बना लेते हैं। लेकिन शास्त्रों में इसे पवित्र नहीं बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि अगर स्त्री-पुरुष सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार शारीरिक संबंध बनाते हैं तो यह एक पवित्र घटनाक्रम होता है। शास्त्रों में विवाह के बाद ही स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबंधों को पूर्ण रूप से शुद्ध माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि संतान की प्राप्ति की सोच से मंगलवार के दिन बनाए गए संबंध सबसे अशुभ माने जाते हैं। शनि का स्वामी मंगल को माना जाता है, इसे क्रोधी और विनाशकारी ग्रह माना गया है। शास्त्रों के अनुसार हर दिन शुभ नहीं माना जाता है। मंगल ग्रह के प्रभाव में जन्मे बच्चे बहुत ही क्रोधी और स्वभाव से घमंडी पाए जाते हैं। इसी तरह शनिवार और रविवार को भी संतान प्राप्ति के लिए बनाए गए संबंध शुभ नहीं माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह क्रूर और पापी ग्रह माना जाता है। शनि प्रभाव से होने वाली संतान निराशावादी और नकारात्मक सोच वाली मानी जाती है। रविवार का दिन भगवान सूर्य का दिन माना जाता है और इस दिन पूजा अर्चना के लिए समर्पित किया जाता है। संतान रविवार को बनाए गए संबंधों के कारण होती है तो उसे ईर्ष्या भाव होना बहुत सामान्य हो जाता है।
शास्त्रों के अनुसार सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को संतान प्राप्ति के लिए बनाए गए संबंध सबसे ज्यादा शुभ माने जाते हैं। इन हफ्ते के चार दिनों के गर्भधारण से उत्पन्न हुई संतान गुणी और मानसिक रुप से तेज होती है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में कई ऐसे दिनों के बारे में बताया गया है, जिनमें स्त्री-पुरुष को संभोग नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस दिन स्त्री-पुरुष व्रत रखते हैं, उस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए। अमावस्या के दिन शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं तो वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
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