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5 योगासन, जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मददगार हैं -
1. अधो मुख श्वानासन (Downward-Facing Dog Pose)
अधो मुख श्वानासन ब्लड सर्कुलेशन के लिए बहुत अच्छा है। क्योंकि ये आपके कूल्हों को दिल से ऊपर और दिल को सिर के ऊपर रखता है, जिसका अर्थ है कि गुरुत्वाकर्षण आपके सिर में रक्त के प्रवाह को सुविधाजनक बनाने में मदद करता है। यह आपके पैरों को भी मजबूत करता है, उसमें सर्कुलेशन में सुधार करता है।
इसके अभ्यास से,
हैमस्ट्रिंग
लैटिसिमस डॉर्सी
डेल्टोइड्स
ग्लूट्स
सेराटस एंटेरियर
क्वाड्रिसेप्स
आदि मसल्स को मजबूती और स्ट्रेच मिलता है।
2. वीरभद्रासन 2 (Warrior II)
वीरभद्रासन 2 आपके पैरों की मांसपेशियों की टोन करने में मदद करता है। ये आपकी मांसपेशियां और पैरों में नसों को कंप्रेस करने के बाद फ्री करता है। इससे रक्त संचार को बढ़ाने में मदद मिलती है। ये योगासन रनिंग करने वाले एथलीट्स के लिए भी बहुत जरूरी है।
वीरभद्रासन 2 अभ्यास से,
क्वाड्रिसेप्स
पिरिफोर्मिस
हिप लिगामेंट्स
स्केलेंसेस
पेक्टोरलिस माइनर
को मजबूती और स्ट्रेच मिलता है।
3. त्रिकोणासन (Triangle)
त्रिकोणासन भी एक स्टैंडिग पोज या खड़े रहकर किया जाने वाला आसन है। इसलिए ये आसन मांसपेशियों की टोन करने और पैर में सर्कुलेशन को बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा है। इस मुद्रा में आपको छाती को खोलना और फेफड़ों के विस्तार में भी मदद मिलती है। इसके अभ्यास से पूरे धड़ में ब्लड सर्कुलेशन को सुधारा जा सकता है।
त्रिकोणासन के अभ्यास से
सार्टोरियस
पिरिफोर्मिस
ग्लूटस मेडियस
ऑब्लिक्स
ट्राइसेप्स
आदि को स्ट्रेच करने और मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
4. विपरीत करणी (Legs up the wall)
अपने पैरों को दीवार के ऊपर रखना ही इस आसन को सही अर्थ में नहीं समझा सकता है। ये आसन आपके पैरों को आपके दिल से ऊपर रखता है, बल्कि ये इसलिए भी उलटा है क्योंकि हम में से अधिकांश लोग दिन भर जिस स्थिति में बैठते हैं। ये आसन उसके ठीक उलट होता है।
विपरीत करणी योगासन की ये स्थिति आपके रक्त के प्रवाह को सामान्य करने में मदद कर सकती है। इस आसन का अभ्यास जवानी से करने वाले योगी को बुढ़ापे में रक्त या तरल पदार्थ के जमने की समस्या नहीं होती है।
विपरीत करणी के अभ्यास से,
हैमस्ट्रिंग
गर्दन
धड़
की मांसपेशियों को स्ट्रेच और मजबूती मिलती है।
5. उत्तानासन (Uttanasana)
उत्तानासन योग विज्ञान का बहुत ही अच्छा आसन है। इस योगासन के अभ्यास से रक्त का प्रवाह दिमाग की तरफ होने लगता है। ये फ्रोजन शोल्डर की समस्या को भी कारगर तरीके से दूर करता है। इस योगासन का अभ्यास डेस्क जॉब के कारण स्पाइन में होने वाली जकड़न को दूर करता है और साइटिका की समस्या के निदान में भी मदद करता है।
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