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बिना ‘सोए’ कितने दिनों तक जिंदा रह सकता है इंसान, आइये जानते है इसका साइंटिफिक जवाब
– पूरे दिन काम करने के बाद जब इंसान रात को बेड पर जाता है, तो आराम और सुकून के पल प्राप्त करते ही उसे नींद आ जाती है। नींद न सिर्फ शारीरिक थकान को दूर करने का काम करती है, बल्कि इससे मानसिक तनाव भी दूर होता है और इंसान तरो ताजा महसूस करता है।
ऐसे में अगर कोई व्यक्ति बिना नींद लिए या कम नींद लिए कई घंटों तक काम करता रहता है, तो उसका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य खराब होने लगता है। इंसान को अच्छे खानपान के साथ-साथ भरपूर नींद की भी जरूरत होती है, ऐसे में क्या अगर इंसान नींद लेना बंद कर दे। तो आइए जानते हैं कि इंसान कितना दिनों तक बिना सोए जिंदा रह सकता है?
इंसान के लिए क्यों जरूरी है नींद? (Why is sleep necessary for humans?)
यकीनन आप में से बहुत से लोगों को नींद न लेना बहुत बड़ी समस्या नहीं लगती होगी, लेकिन हम आपको बता दें कि यह प्रक्रिया हमारे जीवन के लिए बेहद जरूरी है। नींद न लेने के साइट इफेक्ट जल्दी नजर नहीं आते हैं, लेकिन जब इसका असर शरीर और दिमाग पर पड़ने लगता है तो इंसान पागल भी हो सकता है।
डॉक्टरों की मानें तो इंसान को हर दिन कम से कम 8 से 6 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए, ताकि उसका शरीर अच्छे ढंग से काम कर सके। अगर हम अच्छी नींद नहीं लेते हैं, तो इसका असर हमारे इम्यून सिस्टम, दिल और हार्मोंस पर पड़ने लगता है।
भरपूर मात्रा में नींद न लेने पर इंसान का व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाता है और वह हर वक्त गुस्से में रहने लगता है, जिसका असर उसके फैसले करने की क्षमता और काम कर पड़ता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान को नींद क्यों आती है?
इंसान को क्यों आती है नींद? (Why do humans get sleepy?)
इंसान को नींद क्यों आती है इस बात का पता लगान के लिए वैज्ञानिकों ने कई तरह के शोध किए हैं, लेकिन अब तक इस प्रक्रिया का सबसे अहम कारण नहीं खोजा जा सका है। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि जब इंसान का दिमाग और शरीर थक जाता है, तो हार्मोंस उसे सोने का संदेश देते हैं।
दरअसल जब सूरज ढलता है, तो आसमान में लाल और नारंगी रंग का प्रकाश छा जाता है। जब इंसान इन रंगों को देखता है, तो आंखों में मौजूद रेटिना एक्टिव हो जाता है। ऐसे में इंसान के शरीर में मौजूद Melatonin हार्मोन की मात्रा तेजी से बढ़ने लगती है, जो हमारी नींद के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण हार्मोन माना जाता है। इस तरह बॉडी में Melatonin की मात्रा बढ़ने पर इंसान को नींद आने लगती है और वह सो जाता है।
बिना सोए कितने दिनों तक जीवित रह सकता है इंसान? (How many days can a human live without sleeping?)
अब तक आप यह सोचते होंगे कि इंसान के जिंदा रहने के लिए खाना, पानी और शुद्ध हवा मुख्य जरूरतें होती हैं, लेकिन इन सभी चीजों के साथ-साथ मनुष्ट को जीवित रहने के लिए भरपूर और अच्छी नींद की भी आवश्यकता होती है।
ऐसे में अगर इंसान नींद लेना छोड़ देता है, तो शुरुआत में उसे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते जाएंगे, उसमें तनाव और चिड़चिड़ेपन के लक्षण दिखाई देने लगेंगे। व्यक्ति को 2 से 3 दिनों तक नींद न लेने पर सामान्य दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
लेकिन चौथे से छठे दिन तक उसको बेचैनी और घबराहट महसूस होने लगती है, यह स्थिति सातवें और आठवें दिन भी जारी रहती है और इंसान का शरीर कमजोर होने लगता है। इसके बाद 11 दिन तक नींद न लेने की स्थिति में इंसान पागल हो जाता है और जोर-जोर से चीखने व चिल्लाने लगता है।
नींद न लेने की वजह से इंसान की शारीरिक और मानसिक स्थिति पूरी तरह बिगड़ जाती है, जिसकी वजह से उसके समझ नहीं आता है कि वह क्या कर रहा है। ऐसे में 12वां दिन आने तक नींद न लेने की वजह से व्यक्ति का शरीर हार मान चुका होता है, जिसकी वजह से उसकी मौत हो जाती है।
इस तरह हम यह कह सकते हैं कि इंसान खाना खाए बिना 1 महीने और पानी के बिना 7 से 10 दिनों तक जिंदा रह सकता है, जबकि बिना सोए उसके लिए 12 दिनों तक जिंदा रह पाना भी मुश्किल हो जाता है।
इतिहास में नींद को लेकर किए गए थे एक्सपेरिमेंट
इंसान के शरीर और उसकी नींद को लेकर वर्तमान में ही नहीं, बल्कि प्राचीन काल से रिसर्च और एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सन् 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ के वैज्ञानिकों ने नींद को लेकर 5 युद्ध के कैदियों पर प्रयोग करने का फैसला किया था।
इस प्रयोग के दौरान युद्ध के दौरान बंदी बनाए गए कैदियों को 30 दिनों तक एक बड़े से कमरे में बंद कर दिया गया था और उनके सामने शर्त रखी गई थी कि जो 30 दिनों तक नहीं सोएगा, उसे आजाद करके उसके मुल्क भेज दिया जाएगा।
जिस कमरे में उन कैदियों के रखा गया था, वहाँ खाने पीने और पढ़ने की व्यवस्था मौजूद थी। लेकिन उनके सोने या बैठने के लिए कोई सुविधा नहीं थी, क्योंकि उन कैदियों को 30 दिनों तक लगातार जागते रहना था।
इसके अलावा कमरे में वन वे विजन वाले दो शीशे लगाए गए थे, ताकि शोधकर्ताओं की टीम कैदियों पर बराबर नजर रख सके। इतना ही नहीं कैदियों को 24 घंटे जगाए रखने के लिए कमरे में थोड़ी-थोड़ी देर बार एक गैस छोड़ी जाती थी।
इस तरह प्रयोग के पहले 3 दिन कैदियों का व्यवहार शांत रहा, लेकिन चौथे दिन से उन्होंने अजीब हरकतें करना शुरू कर दिया था और वह जोर-जोर से चिल्लाते थे। उनकी हालात दिन ब दिन खराब होती जा रही थी और 10वां दिन आते-आते कमरे से आने वाली आवाजे बिल्कुल बंद हो गई थी।
इसके बाद जब रिसर्च टीम ने कमरे के अंदर झांक कर देखा, तो वहाँ का खूनी मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। पर्याप्त नींद न लेने की वजह से वह कैदी इतने पागल हो गए थे कि उन्होंने खाने के बजाय एक दूसरे को काटकर उनका मांस खाना शुरू कर दिया था।
उनके लगातार चिल्लाने की वजह से कुछ कैदियों का वोकल कॉर्ड तक फट चुका था, जबकि उनका शरीर पूरी तरह से जख्मी हो गया था। वह कैदी अब आजाद नहीं होना चाहते थे, बल्कि एक दूसरे को मारकर खुद भी मरने के लिए तैयार थे।
इसके बाद रिसर्च टीम ने उन कैदियों को काबू में करने के लिए मार्फिन के 8 इंजेक्शन दिए, जिसके बाद इलाज के दौरान 5 से 3 कैदियों की मौत हो गई थी। लेकिन इतना कुछ हो जाने के बावजूद भी जिंदा बचे 2 कैदियों को इलाज के बाद वापस उसी कमरे में बंद कर दिया गया था।
लेकिन इस बार उन दोनों कैदियों के साथ रिसर्च कर रहे 3 शोधकर्ताओं को भी कमरे में रखा गया था, ताकि वह उनके व्यवहार को काबू कर सके। लेकिन नींद न लेने की वजजह से उन कैदियों का व्यवहार इतना भयानक हो चुका था कि वह शोधकर्ताओं पर ही हमला करने को तैयार हो गए थे।
ऐसे में उन शोधकर्ताओं में से एक ने अपनी जान बचाने के लिए दोनों कैदियों को गोली मार दी, जिसकी वजह से उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नींद पर हो रहे प्रयोग को रोक दिया था, लेकिन रूस ने आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई भी प्रयोग किए जाने से साफ इंकार किया है।
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