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परंतु आज इनके अलावा और भी तकनीकों से कैंसर का सफल इलाज किया जा रहा है ।

1 केमो आईडी थेरेपी

यह थेरेपी रोगी के हिसाब से काम करती है यानि हर रोगी अलग है इसलिए उसका इलाज भी अलग ही होना चाहिए । रोगी के कैंसर की कोशिकाएं जांच हेतु ली जाती हैं और उन कोशिकाओं को स्टेम सेल के रुप में इस्तेमाल किया जाता हैं। इसके बाद केमो ड्रग्स बेहतर परिणाम पाने के लिए इसकी कोशिकाओं की जांच करते हैं और फिर जो दवा बनती है, वह रोगी को दी जाती है। इस थेरेपी की खूबियां यह है कि यह -

हिट और ट्रेल्स से मरीज़ की रक्षा करते हैं ।
हिट और ट्रेल्स की वजह से पैसों की बचत होती है ।
हिट और ट्रेल की वजह से पीड़ा नहीं होती ।
परिणाम बेहतर हुए हैं ।
मरीज़ और चिकित्सक दोंनों का समय बचता है ।

2 रेडिएशन थेरेपी

रेडिएशन थेरेपी को बहुत बेहतर न मानकर इसे जोखिम भरा माना जाता था । रेडिएशन थेरेपी के बारे में यह कहा जाता था कि यह कैंसर की कोशिकाओं को प्रभावित करने के साथ ही शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है । आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने सब भ्रांतियों को सिरे से खारिज करते हुए पिन पॉइंट पोजिशन तकनीक को अवगत कराया । इस तकनीक ने इस बात पर मुहर लगा दी कि रेडिएशन थेरेपी से सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जाएगा और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा ।

3 इंटेंसिटी मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी

आईएमआरटी के नाम से मशहूर यह तकनीक भी आधुनिक चिकित्सा के दवारा ही उपलब्ध हो पाई है, इसमें कंप्यूटर के कंट्रोल से लीनियर ऐक्सेलरैट और उपयुक्तरेडिएशन मरीज के कैंसर पर डाले जाते हैं। इस तकनीक ने एक कदम आगे जाकर यह पक्का किया कि कैंसर के सैल्स को मारने के साथ-साथ यह सुरक्षा का ऐसा इंतज़ाम करेगी कि कैंसर के आस-पास वाले सैल्स भी प्रभावित नहीं होंगे । इस तकनीक का इस्तेमाल प्रोस्टेट कैंसर, ब्रैन कैंसर और गर्दन के कैंसर का इलाज करने में किया जाता है।

4 इमेज गाइडेड रेडिएशन थेरेपी

इमेज गाइडेड रेडिएशन थेरेपी, जिसे आईएमजीटी भी कहते हैं, शरीर में कैंसर की हलचल, उसके आकार की पहचान करती है और अगर कैंसर बढ़ रहा है तो उसे भी पहचान लेती है। कैंसर की पहचान करने के बाद यह उसके आकार और उसकी विकास दर के हिसाब से ही सटीक होकर अपना काम करती है, जिसकी वजह से दूसरे स्वस्थ और सामान्य कोशिकाओं को हानि नहीं पहुंच पाती । इस थेरेपी का इस्तेमाल लंग कैंसर, लिवर कैंसर और प्रोस्टेट कैंसरके लिए सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

5 थ्री-डायमेंशनल कंफर्मेशन रेडिएशन थैरेपी

इस थेरेपी में एक मशीन का प्रयोग किया जाता है जो मेडिकल टर्म में वाइड-बोअर सीटी सिम्युलेटर के नाम से जानी जाती है । यह मशीन ऑनकोरीडोलॉजी के लिए भी इस्तेमाल की जाती है। यह डॉक्टरों का काम आसान करते हुए उन्हें कैंसर और उसके आस-पास के सैल्स का थ्री-डायमेंशनल मैप बनाने में सहायता करती है।

6 हाई-डोज़ रेट

कैंसर से बचाव करने के लिए आधुनिक चिकित्सा की तकनीक है, जो हाई-डोज़ रेट के नाम से जानी जाती है ।कैंसर सेल्स को रेडिएशन से खत्म करने के लिए यह एक कैथेटर का उपयोग करती है, जिससे कैंसर को सीधा रेडिएशन मिलता है ।

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