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न छूने से और न ही साथ खाने से फैलता कुष्ठ रोग

कुष्ठ रोगियों के पहचान, विकलांगता व इसके उपचार के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण कैंप के बारे में उपाधीक्षक ने बताया कि कुष्ठ लाइलाज बीमारी नहीं है। यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। अगर शरीर में तांबे की रंग की तरह दाग दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। खासकर अगर उस दाग में सूनापन दिखे तो यह कुष्ठ हो सकता। हालांकि यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकता है। परंतु अगर समय पर इलाज ना हुआ तो कुष्ठ रोगियों को विकलांगता का दंश झेलना पड़ सकता है। यह बीमारी छुआछूत वाली बीमारी भी नहीं है। समय पर पूरी इलाज कराने से कुष्ठ रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। यह रोग छूने एवं साथ में खाने से नहीं फैलता है। प्रशिक्षण शिविर में देवघर से आए अचिकित्सा सहायक अशोक कुमार ने कुष्ठ रोगियों के विक्लांगता की जानकारी दी। प्रशिक्षण कैंप में पीएमडब्ल्यू जियाउल अंसारी, बीटीटी डिपल कुमारी, एमपीडब्ल्यू राकेश कुमार, आरती देवी सहिया साथी हसीना खातून सहिया के अलावे सायरा बानो, आबिद खान, हसीना खातून, कुंदन रजवार, आभा देवी सहित अन्य मौजूद थे।

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