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किडनी खराब से शरीर में अतिरिक्त पानी जमा हो जाता है, जिस कारण फेफड़ों में पानी भर जाता है। उनकी कार्य क्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या या बीमारी की पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती समय में दिखाई नहीं देते। जब किडनी से जुड़ा कोई भी रोग दुसरे या तीसरे चरण में पहुँच जाता है तब उसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। सामान्य तौर नेफ्राइटिस होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं :-

नींद न आने की समस्या

पेल्विस (pelvis) के आसपास तेज़ दर्द होना

किडनी में या उसके आसपास दर्द होना

पेट में असहनीय दर्द होना

अधिक मात्रा में पेशाब आना

पेशाब में पस (मवाद) आने लगता (यह और भी कई बीमारियों में हो सकता है)

पेशाब के रंग में परिवर्तन होना

ठंड लगना और बुखार साथ में होना

त्वचा में अचानक नमी आना

लगातार ब्लड प्रेशर हाई होना

झागदार पेशाब आना

शरीर के बाहरी हिस्सों में सूजन आ जाना

पेशाब की मात्रा में परिवर्तन होना

पेशाब के दौरान दर्द और जलन महसूस होना

पेशाब में खून आना या गहरे रंग का पेशाब आना

मतली और उल्टी आना (यह अपच और अन्य कारणों के भी हो सकता है)

बुखार और त्वचा पर चकत्ते

मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे उनींदापन या उलझन महसूस होना

अचानक से शरीर का वजन बढ़ जाना (सूजन के कारण किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, जिसके कारण शरीर में तरल उत्पाद यानि पानी बढ़ जाता है और वजन बढ़ने लगता है)

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