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एक्सट्रीमली ड्राय स्किन- Extremely Dry Skin

स्किन इतनी ड्राय हो सकती है कि, इतनी शुष्क हो सकती है कि खुरदरी और फ्लेकी Flaky हो जाती है।
टाइट और खिंची सी महसूस होती है और उसमें आसानी से क्रैक्स आ जाते हैं।
स्किन पर मछली की स्किन की तरह स्केल्स डेवलप हो जाते हैं।

अत्यधिक शुष्क त्वचा उन लोगों में आम है, जिनकी किडनी की बीमारी एंड या लास्ट स्टेज में होती है। और जिसके लिए डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
स्किन में इंचिंग (Itchy Skin)

बहुत ज्यादा खुजली महसूस होने वाली स्किन, किडनी रोग का एक कॉमन लक्षण है।

खुजली परेशान करने से लेकर लाइफ-डिस्रप्टिंग करने तक हो सकती है। आपको स्किन में हर समय या ज्यादातर टाइम खुजली कर सकती है।

कुछ लोगों को स्किन के एक पर्टिकुलर हिस्से में ही खुजली हो सकती है। लेकिन साथ ही, खुजली शरीर के अधिकांश भाग में फैल भी सकती है।
खरोंच के निशान और अन्य लक्षण (Scratch Marks And Other Signs Of Scratching)

स्किन को जरूरत से ज्यादा खरोंचने से स्किन तो इफेक्टेड हो ही जाती है, साथ ही उसमें रॉ स्किन ब्लीडिंग,घाव आदि डेवलप हो जाते हैं।

मोटी, चमड़े जैसी स्किन हो जाती है।

स्किन पर फर्म यानी कठोर और बेहद खुजली वाली गांठे या बम्प्स डेवलेप हो जाते हैं।

अगर स्किन इंचिंग यानी खुजली से राहत मिलने के कोई आसार नजर न आ रहे हों या हालत बद से बदतर होती महसूस हो, तो ऐसे में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

कुछ लोग जिन्हें लास्ट स्टेज की किडनी की बीमारी है, उन्हें यूवीबी फोटोथेरेपी नामक ट्रीटमेंट से ही इस खुजली से राहत मिलती है।
त्वचा में रंग बदलता है (Skin Color Changes)

जब गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं, तो शरीर में विषाक्त पदार्थों का निर्माण होता है। यह बिल्डअप त्वचा में रंग परिवर्तन का कारण बन सकता है। आप निम्न में से कोई भी लक्षण देख सकते हैं:-

गंदा सा अनहेल्दी पीला रंग- Unhealthy Yellow
ग्रे रंग- Grey Color
पीला रंग- Pale Yellow
कुछ-कुछ एरियाज में काली काली स्किन- Areas Of Darkened Skin
धक्कों और गहरी रेखाओं के साथ पीली, मोटी स्किन- Yellowish Skin With Bumps
सिस्ट और धब्बे जो व्हाइटहेड्स की तरह दिखते हों- Cysts And Spots That Look Like Whiteheads

ये लास्ट के दो लक्षण तब विकसित होते हैं, जब स्किन में लंबे समय तक खुजली होती होती रहती हैं और खुजाने से अक्सर खरोंचें लग जाती हैं।
नाखून में बदलाव (Nail Changes)


गुर्दे की बीमारी आपके नाखूनों, पैर की उंगलियों या दोनों ही के अपिएरेन्स को प्रभावित कर सकती है। जिन लोगों को एडवांस किडनी डिजीज है, उनमें निम्न लक्षण विकसत हो सकते हैं

अंगुलियों में एक-दो या सभी का आधा नाखून सफेद और बाकी गुलाबी हो सकता है।
नाखून पूरे और पूरी तरह पीले हो सकते हैं।
नाखूनों पर व्हाइट बैंडस यानी धारियां नजर आ सकती हैं।

क्योंकि आपके नाखून आपके स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ बताते हैं लिहाजा, अगर आपको अपने हाथों के नाखूनों या पैर के नाखूनों में कोई बदलाव दिखाई दे तो अपने डॉक्टर से तुरंत मिलें।
सूजन (Swelling)


आपके गुर्दे (Kidney) आपके शरीर से Extra Fluids अतिरिक्त तरल पदार्थ और नमक (Salt) निकाल देते हैं। जब वे ऐसा नहीं कर पाते है, तो वो सारा फ्लुइड और नमक शरीर में जमा होने लगता है। यही बिल्डअप सूजन का कारण बनता है। इसके लक्षणों में:-

पैर- Legs
एड़ियों- Ankle
पैर- Feet
हाथ- Hands
चेहरा- Face

शरीर के एक या कई क्षेत्रों में सूजन देख सकते हैं।
रैशेज (Rashes)

जब गुर्दे यानी किडनी शरीर से अपशिष्ट यानी वेस्ट को नहीं निकाल पाते हैं या निकाल पाने में अक्षम होते हैं, तो स्किन पर दाने या रैश डेवलप या विकसित हो सकते हैं या जाते हैं।

जो लोग किडनी के लास्ट स्टेज में होते हैं, उनमें होने वाले दाने में छोटे, गुंबद के आकार के और बहुत ही ज्यादा खुजली वाले बम्प का कारण बनता है। जैसे ही ये बम्पस ठीक होते हैं, उनकी जगह नए बन जाते हैं या सकते हैं। कभी.कभी, छोटे बम्पी दाने आपस में जुड़कर खुरदुरे, उभरे हुए पैचेज जैसा बना लेते हैं।
फफोले (Blisters)

कुछ लोग जो लास्ट स्टेज किडनी डिजीज से पीड़ित होते हैं, उनमें स्किन पर फफोले जैसे डेवलप हो जाते हैं या हो सकते हैं। ये फफोले उनके

हाथ
चेहरे
पैर कहीं भी डेवलप हो सकते हैं।

ये फफोले खुलेंगे, सूखेंगे और पपड़ी जैसे बनेंगे फिर जैसे ही वे अपने आप झड़ कर साफ होंगे, उनके स्कार यानी निशान दिखाई देंगे।
पेट में गांठ (Lump In Belly)

यह किडनी के कैंसर का संकेत हो सकता है। अपने शुरुआती चरणों में, किडनी के कैंसर शायद ही कभी लक्षण यानी सिम्पटम शो करते हों! जब कैंसर बढ़ता है या एडवांस स्टेज से बात आगे बढ़ जाती है, तो यह इन पर एक मास या गांठ यानी लम्प का कारण बन सकती है।

पीठ का साइड- Side
पेट- Belly
लोअर बैक- Lower Back

इन क्षेत्रों में से किसी एक में भी मास महसूस करना आपके शरीर के अंदर कुछ कम गंभीर होने का संकेत भी हो सकता है। यदि आपको कोई स्पॉट या गांठ मिलती है, तो जल्दी ही अपने डॉक्टर से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लें।
चुटकी लेने के लिए त्वचा बहुत तंग (Skin Too Tight To Pinch)

यह एक अत्यंत दुर्लभ दुष्प्रभाव है जो तब हो सकता है जब आप एक एमआरआई या कोई अन्य परीक्षण करवाते हैं।

जिसके लिए एक कॉन्ट्रास्टिंग एजेंट की आवश्यकता होती है। एक डॉक्टर आपके शरीर के किसी एरिया, जैसे ब्लड वेसल के अंदर के बेहतर व्यू के लिए कंट्रास्ट एजेंट से अनुरोध कर सकता है।

लेकिन स्किन इतनी टाइट होगी कि कॉन्ट्रास्टिंग एजेंट को आपकी वेन्स यानी नस में इंजेक्ट करना पड़ सकता है या डॉक्टर बेहतर टेस्ट रिजल्ट के लिए ऐसा ही करेंगे।

यह एक रेयर साइड इफेक्ट है। यदि आपको किडनी डिजीज है या किसी जानने वाले को है, तो अपने डॉक्टर को अपनी इस हालत की पूरी जानकारी दें, जो आपको मेडिकल टेस्ट प्रिस्क्राइब करता है।
स्किन के नीचे कैल्शियम डिपॉजिट होना (Calcium Deposit Under Skin)

किडनी के हमारे शरीर में कई काम होते हैं। उनमें से एक है, ब्लड में सोडियम और फॉस्फेट जैसे मिनरल्स को बैलेंस करना।

जब किडनी, एक हेल्दी बैलेंस मेंटेन रखने में अक्षम हो जाती है, जो संतुलन गड़बड़ जाता है और लेवल राइज कर सकते हैं।

जिसके परिणामस्वरूप कुछ लोगों में स्किन के नीचे कैल्शियम जमा होने लगता है।

कैल्शियम डिपॉजिट आमतौर पर जॉइंट के आसपास विकसित होते हैं और पेनफुल नहीं होते हैं। हालांकि, जब वे उंगलियों की टिप पर हो जाते हैं, तो वे बेहद पेनफुल हो सकते हैं।
स्किन को इफेक्ट करने से पहले किडनी की बीमारी का पता कैसे लगाएं (
गुर्दे की बीमारी यानी किडनी डिजीज का सबसे आम या कॉमन रूप क्रोनिक किडनी रोग है। यह तब विकसित होता है जब किडनी पर्मानेंटली डैमेज हो जाती हैं।

रोग नियंत्रण केंद्र, सीडीस के अनुसार, लगभग 37 मिलियन लोगों के सीकेडी होने का अनुमान है, जिनमें से अधिकांश नहीं जानते कि वे इस रोग से पीड़ित हैं।

लेकिन, किडनी प्रॉब्लम्स का फटल (fatal) होने से पहले पता लगाया जा सकता है। अपने डॉक्टर से उचित परामर्श लेकर और, प्रॉपर ब्लड और यूरीन टेस्ट करवाने से, आपके डॉक्टर आपको बता सकते हैं, किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है या नहीं कर रही है।

आपके लिए यह टेस्ट भी बेहद जरूरी हैं

डायबिटीज- Diabetes
हाई ब्लड प्रेशर- High Blood Pressure
सेफ रहते हुए, 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को किडनी डिजीज स्क्रीनिंग करवानी चाहिए।

त्वचा विशेषज्ञ किडनी की बीमारी के रोगियों मदद कैसे करते हैं?

किडनी डॉक्टर्स, जिन्हें नेफ्रोलॉजिस्ट (Nephrologist) कहा जाता है, अक्सर किडनी डिजीज से पीड़ित रोगियों की देखभाल करते हैं।

जब किडनी की बीमारी स्किन को प्रभावित करने लगती है, तो नेफ्रोलॉजिस्ट स्किन स्पेशलिस्ट के पास आपको भेज सकता है या खुद मिल सकता है।

(Kidney) गुर्दे की बीमारी के कारण विकसित होने वाली कुछ त्वचा की स्थितियों को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी रोगी की स्किन में बहुत ही ज्यादा इचिंग है, तो रात भर सोना असंभव हो सकता है। लिहाजा एक अच्छा स्किन स्पेशलिस्ट रोगी को कुछ राहत दिलाने में हेल्प कर सकता है।

इसमें मॉइश्चराइज़र और दवा के सही संतुलन का उपयोग करना शामिल हो सकता है जिसे या तो डॉक्टर या आप खुद स्किन पर लगाते हैं। कुछ गंभीर रोगियों को यूवीबी फोटोथेरेपी नामक उपचार से राहत मिलती है।

राइट स्किन केयर हमेशा ही हेल्पफुल सिद्ध हो सकती है।

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