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कान के रोग कई प्रकार के हो सकते हैं। जैसे कि कान में दर्द, कान में संक्रमण, ग्लू ईयर और कैंसर आदि।
कान का संक्रमण (Ear Infection)
बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से कान में संक्रमण की वजह होती है। यह संक्रमण कान में या फिर ऊतकों के माध्यम से कान के अंदर प्रवेश करता है। कान में संक्रमण होने पर आपको खुजली, दर्द और कान में भारीपन महसूस हो सकता है।
कान में फोड़े
कान में फोड़े होने से भी आपको परेशानी हो सकती है। यह कनाल में उगने वाला फोड़ा है। यह अधिकतर जीवाणु संक्रमण की वजह से फैलता है। त्वचा पर होने वाली क्षति की वजह से यह संक्रमण फैलता है।
टिनिटस
कान में टिनिटस नामक रोग भी हो सकता है। इसकी वजह से आपको कान में सीटी बजने की आवाज आने लगती है। ऐसी स्थिति में आपको श्रवण हानि भी हो सकती है।
कणकवता (ओटोमाइकोसिस)
ओटोमाइकोसिस एक कवक की वजह से कान में यह रोग हो सकता है। यह बाहरी कान के कनाल में फैलने वाला संक्रमण है। इससे आपको कान में काफी दर्द का अनुभव करना पड़ सकता है।
मेनियर रोग
कान में मेनियल नामक रोग भी हो सकता है। इसकी वजह से आपका कान बहने लगता है। इसके अलावा आपको कान बजना और चक्कर आना जैसी परेशानी भी हो सकती है।
कान का कैंसर
कान का कैंसर अक्सर बाहरी कान की स्किन पर फैलता है। यह कान के अंदर भी विकसित हो सकता है। हालांकि, यह बहुत ही दुर्लभ स्थिति है। कान को विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसे- कार्सिनोमा और मेलेनोमा प्रभावित कर सकते हैं।
स्विमर्स ईयर
कान में पानी या फिर नमी की वजह से स्विमर्स ईयर की समस्या हो सकती है। इसकी वजह से कान के बाहरी परत पर सूजन आ सकती है। ऐसे में कान में पानी जाने से रोके। ताकि आपको यह परेशानी न हो।
इन रोगों के अलावा कान में अन्य रोग भी हो सकते हैं। जैसे-
दाब-अभिघात (Barotrauma)
वेस्टिबुलर न्यूराइटिस
प्रेस्बाइक्यूसिस (Presbycusis)
कोलेस्टेटोमा (Cholesteatoma)
कान के पर्दे में छेन होना।
बहरापन
कान में दर्द होना (ओटेलजिया)
कान बंद होना इत्यादि।
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