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कान में आवाज आने का मुख्य स्रोत न्यूरल सर्किट (ब्रेन सेल्स का नेटवर्क) होता है, जिसकी वजह से हमें किसी भी तरह की आवाज सुनने का आभास होता है। इसका मतलब यह है कि, जिस समस्या को हम कान से जोड़कर देखते हैं, वो दरअसल दिमाग से जुड़ी होती है। कान में आवाज आने के दिमागी कारण के पीछे वैज्ञानिकों के बीच अभी भी मतभेद बना हुआ है। कुछ लोगों को लगता है टिनिटस क्रोनिक पेन सिंड्रोम की तरह ही होता है, जिसमें किसी घाव या टूटी हड्डी के जुड़ जाने के बाद भी दर्द रहता है। इसके अलावा, अंदरुनी कान के क्षतिग्रस्त होने की वजह से ऑडिटरी सिस्टम को भेजे जा रहे साउंड के सिंग्नल का न्यूरल सर्किट द्वारा संतुलन बिगड़ जाने से भी कान में आवाज आने की समस्या हो सकती है।

इसके अलावा निम्नलिखित कारणों की वजह से भी कान में आवाज आने की समस्या हो सकती है। जैसे-


कानों में वैक्सहोने से भी कान में आवाज आने की समस्या हो सकती है।
कान में आवाज आने की समस्या के पीछे एस्पिरिन, कुछ एंटीबायोटिक्स, एंटी डिप्रेशन दवाएं या कीमोथेरेपी से संबंधित दवाएं खाना भी हो सकता है।
सिर की चोट भी कान में आवाज आने का कारण बन सकती है। इसलिए, डॉक्टर टिनिटस का उपचार करते हुए आपकी मेडिकल हिस्ट्री भी पूछते हैं।
दांत दर्द (Toothache) के कारण भी टिनिटस की शिकायत हो जाती है। क्योंकि, कानों की कुछ नसें आपके जबड़ों से जुड़ी रहती है। जिसके कारण कान में आवाज आ सकती है।
कुछ बीमारियों के कारण भी कान में आवाज आने की समस्या होती है। सर्दी-जुकाम, साइनस आदि में कभी-कभी कान जाम हो जाता है और उसमें आवाज आने लगती है।

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