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कंधे में दर्द के कारण
1. टेन्डिनाइटिस (Tendinitis) एवं बर्साइटिस (Bursitis)
दोनों ही सूजन संबंधी स्थितियां हैं जो कि कंधे में दर्द और कठोरता का कारण हैं। यह किसी गंभीर चोट या खेल-संबंधी गतिविधियों के कारण हो सकती हैं। 40 वर्ष से ऊपर के लोगों में इस तरह की समस्या ज़्यादा देखने को मिलती है। बात की जाए टेन्डिनाइटिस की, यह तब होती है जब रोटेटर कफ में स्थित टेन्डंस में सूजन या जलन आ जाती है। ऐसा होने पर कंधे में दर्द उत्पन्न होने लगता है। वहीं दूसरी तरफ बर्साइटिस उस स्थिति को कहते हैं जब बर्सा, जो कि शरीर के जोड़ों में स्थित एक तरल भरी थैली है, सूजन या जलन से ग्रस्त हो जाती है। इसके अंदर लुब्रिकेटिंग तरल पदार्थ होता है। इसका काम जोड़ों को घर्षण और रगड़ जैसी समस्याओं से बचाना होता है।
2. फ्रोज़न शोल्डर (Frozen Shoulder)
फ्रोज़न शोल्डर को आप कंधे में दर्द के प्रमुख कारणों में से एक मान सकते हैं। इसे अधेसिव कैप्सूलाइटिस (adhesive capsulitis) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी परिस्थिति है जिसकी वजह से कंधे में दर्द और अकड़न की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसके फलस्वरूप कंधे ओर ऊपरी बांह को हिलाना मुश्किल हो जाता है। यह परेशानी ज़्यादातर 40 से 60 वर्ष के लोगों में देखने को मिलती है। फ्रोज़न शोल्डर होने पर कंधे में दर्द तो आमतौर पर होता ही है, साथ ही समय के साथ-साथ अकड़न में भी वृद्धि होती है। कंधे में दर्द के साथ अकड़न होने पर कृपया डाॅक्टर से संपर्क कर उपचार ज़रूर करवाएं।
3. केल्सिफिक टेन्डिनाइटिस (Calcific Tendinitis)
इस तरह की समस्या आपके लिए दर्द भरी हो सकती है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो इंसान के टेंडन्स और मांसपेशियों में कैल्शियम के जमा होने से होती है। केल्सिफिक टेन्डिनाइटिस शरीर के दूसरे हिस्सों में भी हो सकती है, लेकिन ज़्यादातर रोटेटर कफ या उसके आसपास के हिस्सों में ही कैल्शियम जमा होने लगता है। आमतौर पर कैल्सिफिक टेन्डिनाइटिस से होने वाला दर्द कंधे के आगे व पिछले हिस्सों में होता है।
4. आर्थराइटिस (Arthritis)
आर्थराइटिस को आप जोड़ों के लिए सबसे बड़ी समस्याओं में से एक मान सकते हैं। कार्टिलेज एक मुलायम इलास्टिक टिशू है जो कि जोड़ों की लंबी हड्डियों के सिरों को ढकता है एवं उनकी रक्षा करता है। आर्थराइटिस जैसी अवस्था में कार्टिलेज धीरे-धीरे खत्म होने लगता है या उसे क्षति पहुंचती है जिसकी वजह से कंधे और बांह को हिलाना मुश्किल हो जाता है। दर्द के अलावा यह समस्या सूजन और जोड़ों को क्षति पहुंचाती है। लगभग 100 से भी ज़्यादा तरह के आर्थराइटिस यानि गठिया रोग मौजूद हैं, जिनमें आस्टियोआर्थराइटिस (osteoarthritis), रूमेटाॅइड आर्थराइटिस (rheumatoid arthritis) और पोस्ट-ट्राॅमेटिक आर्थराइटिस (post-traumatic arthritis) प्रमुख हैं। आर्थराइटिस उन स्थितियों में से एक है जिनका पूर्ण रूप से उपचार नहीं हो सकता। लेकिन फिर भी दर्द में आराम या प्रतिबंधित मूवमेन्ट के लिए कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। अगर दवाईयों, इंजेक्शन, फिज़िकल थैरेपी या आराम करने से मरीज़ को राहत नहीं मिलती, तो डाॅक्टर सर्जरी का सुझाव दे सकते हैं। जैसे कि शाॅल्डर रिप्लेसमेन्ट सर्जरी (shoulder replacement surgery) या फिर रिवर्स शाॅल्डर रिप्लेसमेन्ट सर्जरी (Reverse shoulder replacement surgery) आदि।
5. डिस्लोकेशन (Dislocation)
कंधे की हड्डी कुछ कारणों की वजह से अपने साॅकेट से खिसक सकती है और यही कंधे में दर्द का कारण बन सकती है। ह्यूमेरस थोड़ा या फिर पूर्ण रूप से साॅकेट से बाहर आ सकता है। ऐसी स्थितियां गिरने से, एक्सीडेन्ट से या फिर खेलते समय हो सकती हैं। जिस लोगों को इस तरह की परेशानी हो जाती है, उन्हें सूजन, दर्द, कमज़ोरी, अस्थिरता या फिर मांशपेशियों की ऐंठन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। शाॅल्डर डिस्लोकेशन के लिए क्लोस्ड रिडक्शन (closed reduction) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जो कि ऊपरी बांह को फिर से अपने साॅकेट में डाल देती है।
6. अस्थिरता (Instability)
यह स्थिति तब पैदा होती है जब किसी व्यक्ति के लिगामेन्ट्स और मांसपेशियां इतनी मज़बूत नहीं रह पाती कि वे कंधे की हड्डियों को साॅकेट में पकड़ के रख सकें। अस्थिरता होने का एक प्रमुख कारण डिस्लोकेशन भी है। यानि कि जितनी बार एक व्यक्ति डिस्लोकेशन से जुझेगा, उतना ही कंधे की स्थिरता कम होती रहेगी। इसके साथ ही लिगामेन्ट्स, जो कि ऐसे टिशूस हैं कि हड्डियों को दूसरी हड्डियों से जोड़कर रखते हैं, समय के साथ या फिर प्राकृतिक तौर पर ढीले हो जाते हैं। इस तरह की स्थिति का कारण ऐसी गतिविधियां हैं जिनमें बार-बार व्यक्ति अपनी बांह को सिर के ऊपर ले जाता है, जैसे कि स्विमिंग या टेनिस में।
7. फ्रेक्चर (Fracture)
हड्डी का टूटना शरीर के अन्य भागों के साथ-साथ कंधे में भी देखने को मिल सकता है। इसमें मुख्य रूप से काॅलर बाॅन, ऊपरी बांह की हड्डी या फिर शोल्डर ब्लेड की हड्डी टूट सकती है। वैसे तो ऐसी परिस्थिति किसी के भी साथ हो सकती है, लेकिन अधेड़ उम्र या उससे ऊपरी आयु वर्ग, जिन्हें आॅस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) की समस्या है, उन्हें खासतौर पर ध्यान रखने की ज़रूरत है।
8. विभाजन (Separation)
इस तरह की परिस्थति तब घटित होती जब काॅलरबोन और शोल्डर ब्लेड के बीच का संबंध बाधित हो जाता है। आमतौर पर यह परेशानी खेल-संबंधी गतिविधियों में देखने को मिलती है जब व्यक्ति अपने कंधे के बल गिर जाता है। ऐसा होने पर कंधे में तेज़ दर्द, सूजन, और नील जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
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