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कंधे का केप्सूल मोटा होने की वजह से अधिक जगह लेता है और ऐसे में चिकनाई प्रदान करने के लिए तरल पदार्थ (श्लेष द्रव) की कम मात्रा मिलती है। यह दर्द का कारण बनता है और बाजूओं को मोड़ते समय कंधे को बाधित करता है और हम इसे कंधे का जाम हो जाना कहते हैं।
जाम हुए कंधे का कारण:
कंधे में गोल हिस्सा और सॉकेट जोड़ होता है जो ऊपरी बांह के सिरे पर श्लेष द्रव से भरा होता है। हड्डी इस सॉकेट में बैठ जाता है। कंधे के जमने की संभावना के सबसे आम कारण में निम्नलिखित शामिल हैं: –
कंधे के श्लेष द्रव के संकेंद्रण में कमी।
कंधे की हड्डी का टूटना।
कंधे के कैप्सूल में निम्न संयोजी ऊतक की आपूर्ति।
कंधे में गोल हिस्सा और सॉकेट जोड़ों का कड़ा होना।
श्लेष द्रव का बाहर की ओर बहाव।
हड्डी विकार के कारण हड्डियों का कमजोर होना।
कंधे के जाम होने के कुछ अन्य महत्वपूर्ण कारणों में शामिल हैं:
आयु और लिंग – ज्यादातर 40 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग, विशेष रूप से महिलाओं में कंधे के जाम होने की प्रवृत्त अधिक होती है।
प्रणालीगत रोग – मधुमेह, हाइपर और हाइपोथायरायडिज्म, क्षयरोग और हृदय तथा रक्तवाहिकाओं संबंधी जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों में कंधे के जाम होने की अधिक संभावना होती है।
गतिहीनता – लंबे समय तक गतिहीनता के उपचार से कंधे के जाम होने का जोखिम ज्यादा रहता है। गतिहीन कंधे की बीमारियों में से कुछ अंग को घुमाने वाली पेशी (रोटेटर कफ) का चोट और हाथ की हड्डी का टूटना है।
हार्मोनल असंतुलन – मधुमेह या एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों में सूजन का कारण बन सकती है। प्रतिरक्षा कमी क्षति का कारण बनती है और जाम हुए कंधे की संभावना को बढ़ाती है साथ ही साथ कंधे के गति के लिए आपकी सीमा को सीमित करती है।
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