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दिल की विफलता, जन्मजात हृदय दोष, अतालता, धमनीविस्फार और कोरोनरी धमनी रोग जैसी हृदय की समस्याओं का इलाज ओपन-हार्ट सर्जरी से किया जाता है। एक सर्जन प्रक्रिया के दौरान हृदय तक पहुंचने के लिए रिबकेज को फैलाता है और ब्रेस्टबोन को काटता है। ओपन-हार्ट सर्जरी के दौरान हार्ट ट्रांसप्लांट, सी. ए.
अस्वस्थ जीवनशैली, सिगरेट, शराब और दूसरी नशीली चीजों का सेवन, निष्क्रियता, तनाव, मोटापा आदि हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। इन सबके कारण हमें अनेक प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है जिसमें मुख्य रूप से दिल से संबंधित बीमारियां शामिल हैं। दिल से संबंधित अनेक बीमारियों का इलाज करने के लिए ओपन हार्ट सर्जरी का उपयोग किया जाता है।
ओपन हार्ट सर्जरी क्या है
ओपन हार्ट सर्जरी को कई बार हार्ट सर्जरी भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, डॉक्टर मरीज की छाती में चीरा लगाकर उसे खोलते हैं और दिल यानी हृदय की मांसपेशियों, वाल्वों या धमनियों की सर्जरी करते हैं।
ओपन हार्ट सर्जरी के दौरान, अवरुद्ध धमनियां (Blocked Arteries) में सुधार करने के लिए डॉक्टर उन्हें नई आर्टरीज से जोड़ते हैं। इससे अवरुद्ध धमनियों को बायपास करके फ्रेश यानी ताजा खून को दिल तक पहुँचाया जाता है।
नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार, ओपन हार्ट सर्जरी का सबसे सामान्य प्रकार है कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग। चिकित्सा विज्ञान में विकास होने के कारण आज दिल से संबंधित अनेक बीमारियों को छोटे चीरे की मदद से ठीक किया जा सकता है। इसलिए काफी लोग ओपन हार्ट सर्जरी करवाने से कतराते हैं।
ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता
सीएबीजी यानी कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग करने के लिए ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है। हार्ट डिजीज यानी दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों का उपचार करने के लिए कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
कोरोनरी हार्ट डिजीज से पीड़ित मरीज के दिल की मांसपेशियां ठोस और संकुचित (solid and compact) हो जाती हैं जिसके कारण वे रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन और खून नहीं पहुंचा पाती हैं। जब दिल तक खून सही ठंग से नहीं पहुंचता है तो हार्ट अटैक का खतरा होता है।
निम्न स्थितियों में डॉक्टर ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है:
हार्ट ट्रांसप्लांट करना
हार्ट वाल्वस को बदलना या उसे ठीक करना
दिल के किसी खराब हिस्से का इलाज करना
दिल में मेडिकल उपकरण फिट करना जिससे दिल अच्छी तरह धड़क सके
ओपन हार्ट सर्जरी कैसे होती है
विशेषज्ञ के अनुसार, ओपन हार्ट सर्जरी को पूरा होने में आमतौर पर 3-6 घंटे का समय लगता है। ओपन हार्ट सर्जरी करने से पहले डॉक्टर मरीज को अनेक जांच करने का सुझाव देते हैं ताकि इस बात की पुष्टि की जा सके की मरीज इस सर्जरी के लिए पूर्ण रूप से तैयार है।
जांच के परिणामों के बाद जब डॉक्टर हर तरह से संतुष्ट हो जाते हैं तो सर्जरी की एक तारीख तय करते हैं, मरीज को सर्जरी से पहले की कुछ दिशा-निर्देश देते हैं और अंतत चयनित दिन पर सर्जरी को पूरा किया जाता है।
ओपन हार्ट सर्जरी में निम्न चरण शामिल हैं:
सबसे पहले मरीज को एनेस्थीसिया देना जिससे मरीज बेहोश हो जाता है। इससे सर्जरी के दौरान मरीज को जरा भी दर्द या दूसरी परेशानियां नहीं होती है और डॉक्टर सर्जरी को आराम से पूरा करते हैं।
एनेस्थीसिया देने के बाद, छाती पर 8-10 इंच का चीरा लगाना और मरीज के ब्रेस्टबोन को हटाकर पूरे दिल को देखना
जब दिल पूरी तरह से दिखने लगे तो लंग बायपास मशीन से जोड़ना
लंग को बायपास से जोड़ने के बाद, स्वस्थ नस और आर्टरी की मदद से अवरुद्ध धमनी (Blocked Artery) के लिए रास्ता बनाना
अवरुद्ध धमनी के लिए रास्ता बनाने के बाद, ब्रेस्टबोन को वापस स्टिच करके लगाए गए चीरा को बंद करना
ओपन हार्ट सर्जरी खत्म होने के बाद मरीज की छाती में 2-3 ट्यूब लगे होते हैं जिससे फ्लूइड बाहर निकलता है। इसके अलावा, मरीज को इंट्रावेनस ट्यूब भी लगी होती है जिससे उन्हें आवश्यक पोषक पहुंचाए जाते हैं। साथ ही, कैथिटर भी लगा होता है जिससे मरीज आसानी से यूरिन पास कर पाता है।
ओपन हार्ट सर्जरी खत्म होने के बाद, मरीज को कुछ 5-7 दिनों तक आईसीयू में रखा जाता है। उसके बाद, उन्हें रेगुलर केयर में और फिर बाद में सभी रिपोर्ट्स नार्मल होने के बाद दवाएं और दिशा-निर्देशों के साथ हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
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