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सिजेरियन डिलीवरी के बारे में इन बातों को जानने के बाद जरूर कर लेंगीं तौबा

आजकल कुछ महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी के दर्द से बचने के लिए सिजेरियन ऑपरेशन करवाने लगी हैं। हालांकि, इस बडी सर्जरी को चुनने से पहले प्रेगनेंट महिलाओं को यहां बताई गई बातों पर गौर जरूर देना चाहिए।

प्रेगनेंट महिलाओं को डिलीवरी को लेकर बहुत डर लगता है। इस बात को लेकर उनके मन में कई तरह के सवाल आते हैं। हम सभी जानते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी ज्‍यादा बेहतर होती है। लेकिन क्‍या हो अगर डिलीवरी के समय डॉक्‍टर ऑपरेशन करने की कह दें।

वहीं कुछ प्रेगनेंट महिलाओं को प्रेगनेंसी चेकअप के दौरान ही बता दिया जाता है कि उनकी सिजेरियन डिलीवरी होगी। अगर आपके साथ भी ऐसा है तो जाहिर सी बात है कि आपको प्रसव के इस तरीके के बारे में कुछ बातें तो पता होंगीं। लेकिन सी सेक्‍शन डिलीवरी के बारे में और भी ऐसी कई बातें हैं जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है। यहां हम आपको सिजेरियन डिलीवरी से जुडी कुछ महत्‍वपूर्ण बातों के बारे में ही बताने जा रहे हैं।


छोटी बात नहीं है सी सेक्‍शन
सिजेरियन के बारे में सबसे पहले तो आपको यह बात समझनी चाहिए कि य‍ह कोई छोटा ऑपरेशन नहीं है। सी सेक्‍शन कोई छोटी सर्जरी नहीं होती है। इससे कई जोखिम कारक जुडे होते हैं जैसे कि गर्भाशय के आसपास के अंगों को चोट लगना, खून बहना और संक्रमण। नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन में खून के थक्‍के बनना भी आम बात है। वहीं इस ऑपरेशन में शिशु को भी कुछ खतरे रहते हैं। कुछ बच्‍चों को डिलीवरी के बाद रेस्पिरेट्री सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है।
एंग्‍जायटी की वजह से हुई थी करीना कपूर खान की सिजेरियन डिलीवरी, जानिए इससे बचने के तरीके

गर्भावस्‍था में हार्मोनल बदलाव के कारण एंग्‍जायटी और पैनिक अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है। प्रेगनेंसी हार्मोंस बहुत ज्‍यादा स्‍ट्रेस की स्थिति में दिमाग के कुछ हिस्‍सों को सक्रिय कर देते हैं जिससे एंग्‍जायटी होना शुरू हो जाता है।

इसके अलावा डिलीवरी के आसपास अत्‍यधिक हार्मोनल बदलाव, लेबर पेन, नींद की कमी और आराम न करने, अस्‍पताल में रहने के डर से, मां बनने की जिम्‍मेदारियों के डर से और शिशु की सेहत को लेकर होने वाली चिंता की वजह से महिलाओं को एंग्‍जायटी हो जाती है।

ऐसा नहीं है कि डिलीवरी रूम में ही प्रेगनेंट महिलाओं को एंग्‍जायटी होती है, बल्कि इससे पहले ही उन्‍हें इसका एहसास होना शुरू हो जाता है। डिलीवरी को लेकर कुछ महीनों पहले ही महिलाओं को एंग्‍जायटी होने लगती है।

जब गर्भ में शिशु होने की एंग्‍जायटी के साथ-साथ लेबर पेन का डर भी सताने लगे तो फिर स्थिति को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

बच्‍चे को जन्‍म देना काफी तनावपूर्ण होता है और अगर आप प्रेगनेंसी के दौरान ही एंग्‍जायटी को कंट्रोल कर लें तो फिर बाद में इसे होने से रोका जा सकता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ अध्‍ययनों में पाया गया है कि पैनिक अटैक डिलीवरी के दौरान नहीं बल्कि इससे पहले और बाद में आता है। डिलीवरी से पहले महिलाओं को अस्‍पताल जाने के डर से या लेबर पेन की वजह से एंग्‍जायटी हो सकती है।

अध्‍ययनों में साफ कहा गया है कि डिलीवरी के बाद पैनिक अटैक आना सामान्‍य बात है। डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं को बॉडी को दोबारा शेप में लाने को लेकर भी एंग्‍जायटी हो जाती है।

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्‍टर की सलाह जरूर मानें। प्रेगनेंसी और डिलीवरी को लेकर ऑनलाइन कोई भी डरावनी कहानी न सुनें। जितना हो सके डिलीवरी से पहले और गर्भावस्‍था के दौरान हल्‍के व्‍यायाम करें। मेडिटेशन की मदद से भी आप प्रेगनेंसी के दौरान और बाद में एंग्‍जायटी से बच सकती हैं
वैजाइनल ब्‍लीडिंग होगी
नॉर्मल डिलीवरी के बाद योनि से ब्‍लीडिंग होती है लेकिन अगर आपको लगता है कि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद ऐसा नहीं होता है तो आप गलत हैं। डिलीवरी के बाद कब्‍ज भी हो सकती है। ऐसे में जल्‍दी रिकवर करने के लिए महिलाओं को फाइबर युक्‍त आहार लेने की सलाह दी जाती है। अगर कब्‍ज हो गई है तो खूब पानी पिएं। तब भी लक्षण खत्‍म नहीं हाे रहे हैं तो डॉक्‍टर की सलाह पर दवा भी ले सकती हैं।

बच्‍चे की इम्‍यूनिटी होती है कमजोर
ऐसा जरूरी नहीं है कि सिजेरियन ऑपरेशन से पैदा होने वाले सभी बच्‍चों की इम्‍यूनिटी कमजोर नहीं होती है। नॉर्मल डिलीवरी में शिशु को मां की आंत और योनि से सिंबायोटिक माइक्रोब्‍स मिलते हैं जो उसे कई तरह के संक्रमणों से बचाते हैं।

कहा जाता है कि सिजेरियन से जन्‍मे बच्‍चों की इम्‍यूनिटी कमजोर होती है। इस बात पर अभी भी अध्‍ययन किए जा रहे हैं। हालांकि, यह बात सच है कि इन बच्‍चों में एलर्जी का खतरा, लो इम्‍यूनिटी और मोटापे का खतरा नॉर्मल डिलीवरी से पैदा हुए बच्‍चों की तुलना में अधिक होता है।
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गर्भावस्‍था में हार्मोनल बदलाव के कारण एंग्‍जायटी और पैनिक अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है। प्रेगनेंसी हार्मोंस बहुत ज्‍यादा स्‍ट्रेस की स्थिति में दिमाग के कुछ हिस्‍सों को सक्रिय कर देते हैं जिससे एंग्‍जायटी होना शुरू हो जाता है।

इसके अलावा डिलीवरी के आसपास अत्‍यधिक हार्मोनल बदलाव, लेबर पेन, नींद की कमी और आराम न करने, अस्‍पताल में रहने के डर से, मां बनने की जिम्‍मेदारियों के डर से और शिशु की सेहत को लेकर होने वाली चिंता की वजह से महिलाओं को एंग्‍जायटी हो जाती है

ऐसा नहीं है कि डिलीवरी रूम में ही प्रेगनेंट महिलाओं को एंग्‍जायटी होती है, बल्कि इससे पहले ही उन्‍हें इसका एहसास होना शुरू हो जाता है। डिलीवरी को लेकर कुछ महीनों पहले ही महिलाओं को एंग्‍जायटी होने लगती है।

जब गर्भ में शिशु होने की एंग्‍जायटी के साथ-साथ लेबर पेन का डर भी सताने लगे तो फिर स्थिति को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

बच्‍चे को जन्‍म देना काफी तनावपूर्ण होता है और अगर आप प्रेगनेंसी के दौरान ही एंग्‍जायटी को कंट्रोल कर लें तो फिर बाद में इसे होने से रोका जा सकता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ अध्‍ययनों में पाया गया है कि पैनिक अटैक डिलीवरी के दौरान नहीं बल्कि इससे पहले और बाद में आता है। डिलीवरी से पहले महिलाओं को अस्‍पताल जाने के डर से या लेबर पेन की वजह से एंग्‍जायटी हो सकती है।
अध्‍ययनों में साफ कहा गया है कि डिलीवरी के बाद पैनिक अटैक आना सामान्‍य बात है। डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं को बॉडी को दोबारा शेप में लाने को लेकर भी एंग्‍जायटी हो जाती है।

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्‍टर की सलाह जरूर मानें। प्रेगनेंसी और डिलीवरी को लेकर ऑनलाइन कोई भी डरावनी कहानी न सुनें। जितना हो सके डिलीवरी से पहले और गर्भावस्‍था के दौरान हल्‍के व्‍यायाम करें। मेडिटेशन की मदद से भी आप प्रेगनेंसी के दौरान और बाद में एंग्‍जायटी से बच सकती हैं।

रिकवरी में लगता है अधिक समय
कई महिलाएं यह सोचकर सिजेरियन ऑपरेशन करवाती हैं कि इसमें दर्द कम होता है जबकि ऐसा नहीं है। भले ही आपको डिलीवरी के समय दर्द न हो, लेकिन इसके बाद रिकवर करने में बहुत समय लगता है और इस दौरान शरीर में बहुत थकान रहती है। ऑपरेशन के बाद हिलने डुलने में दर्द हो सकता है, खांसने और छींकने तक में दिक्‍कत होती है। ऑपरेशन के बाद महिलाओं को चार से सात दिनों तक अस्‍पताल में ही रहना पड़ता है।

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