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कैसे फैलता है एड्स, कैसे करें बचाव

एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वाइरस) एएक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) का प्रमुख कारण है। एड्स एक जानलेवा बीमारी है। एचआईवी संक्रमण की अंतिम अवस्था एड्स है। वर्तमान में विश्व में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोग एचआईवी से ग्रस्त हैं। इन दिनों भारत में लगभग 23.9 लाख व्यक्ति एचआईवी व एड्स पीड़ित हैं। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार एचआईवी पीड़ितों की संख्या कम हो रही है और संक्रमण दर में भी गिरावट आ रही है।

प्रिंसिपल जतिंदर शर्मा व प्रिंसिपल राकेश जिंदल ने कहा कि बेशक दुनिया में एचआईवी वायरस को लेकर लोगों के मन में भय पाया जा रहा हैं। फिर भी समाज सेवी लोगों व सेहत विभाग द्वारा एड्स के बारे में चेतना पैदा करने के परिणाम स्वरूप ताजा आंकड़ों के अनुसार एचआईवी पाजेटिव से पीडि़त नए रोगियों की दर में कमी पाई जा रही हैं। निश्चय ही यह कुछ राहत देने वाली बात हैं।

एचआईवी क्या है

डाक्टर भीम सैन गर्ग ने कहा कि मानव शरीर में कुदरती तौर पर एक प्रतिरक्षा तंत्र होता है जो शरीर के अंदर संक्रमण और बीमारियों का मुकाबला करता है यह इसका सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। एक कोशिका जिसे सीडी फोर सेल कहते है। आम तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 500 से 1800 सीडी फोर सीयूएमएल पाई जाती है।

शरीर पर हमला

डाक्टर अशोक बांसल ने कहा कि एचआईवी वायरस शरीर में प्रवेश कर सीडी फोर सेल्स पर हमला करता है और उनमें अपनी संख्या बढ़ाकर सीडी फोर सेल्स का विनाश शुरू कर देता है। कई सालों के दौरान धीरे-धीरे सीडी फोर सेल्स कम होने लगती है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। परिणामस्वरूप शरीर सामान्यत: संक्रमण और बीमारियों का सही तरह से मुकाबला नहीं हर पाता। इस अवस्था को एड्स कहते है जो अन्तत मृत्यु का कारण बनता है। इस मर्ज में संक्रमण निरोधक शक्ति का धीरे-धीरे क्षय हो जाता है। इस कारण साधारण संक्रमण भी जानलेवा बीमारी का रूप लेते है टीबी, डायरिया, निमोनिया, फंगल और हरपीज आदि ऐसे रोग है, जिनमें एचआईवी संक्रमण इन रोगों को और जटिल बना देता है।

कैसे फैलता है एड्स

1-एचआईवी का एक मुख्य कारण संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करना है।

2-ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान शरीर में एचआईवी संक्रमित रक्त के चढ़ जाने से।

3-एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति पर इस्तेमाल की गई इंजेक्शन की सुई का इस्तेमाल करने से।

4-एचआईवी पाजिटिव गर्भवती महिला गर्भावस्था के समय, प्रसव के दौरान या इसके बाद अपना दूध पिलाने से नवजात शिशु को संक्रमणग्रस्त कर सकती है।

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