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चिंता-तनाव से दूर रहें, वर्ना एंग्जाइटी के हो जाएंगे शिकार
आ ज की अस्त-व्यस्त जीवन शैली में तनाव-चिंता आम बात हो गई है, लेकिन जब यह दोनों इतनी बढ़ जाएं कि आपके नियंत्रण से बाहर हो जाएं तो समझिए आप एंग्जाइटी के शिकार हो गए हैं। इसलिए तनावमुक्त रहने का हर संभव प्रयास करें। डॉक्टर से मिलें। काउंसेलिंग करवाएं। इसको लेकर लापरवाही न बरतेंं। अगर एंग्जाइटी के लक्षण 6 महीने से अधिक समय तक बने रहें तो यह समस्या गंभीर हो जाती है। इस डिसऑर्डर की समस्या यह है कि अक्सर इसके साथ अवसाद के लक्षण भी उभरने लगते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं जल्दी इसकी शिकार बनती हैं।एंग्जाइटी के लक्षण 6 महीने से अधिक समय तक बने रहें तो यह समस्या गंभीर हो जाती है
क्या है एंग्जाइटी डिसऑर्डर
हर समय चिंता, बेचैनी, वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित भविष्य का डर तन और मन, दोनों पर बुरा असर डालता है। एंग्जाइटी के प्रमुख लक्षण थकान, सिरदर्द और अनिद्रा हैं। व्यक्ति विशेष के लिए यह लक्षण अलग-अलग भी हो सकते हैं, लेकिन स्थायी डर और चिंता सभी में देखे जाते हैं। अगर यह लक्षण तीव्र नहीं हैं तो समय बीतने के साथ समाप्त हो जाएंगे, अन्यथा एंग्जाइटी डिसऑर्डर हो जाता है और रोजमर्रा का जीवन और कार्य करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

लक्षण
घबराहट, भय और बेचैनी नींद ठीक से न आना हाथ या पैर का ठंडा पड़ना, पसीने आना, सुन्न या झुनझुनाहट सांस लेने में दिक्कत जी मिचलाना

चक्कर आना तेजी से सांस लेना ज्यादा पसीने आना कमजोरी और सुस्ती पाचन संबंधी समस्याएं

योग और ध्यान से होगा फायदा
शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित एक्सरसाइज करने से मस्तिष्क में रक्त का संचरण बढ़ता है और उसकी कार्यक्षमता बढ़ती है। ब्रीदिंग एक्सरसाइज और शीतली प्रणायाम करें, इससे एंग्जाइटी डिसऑर्डर से जल्दी निजात मिलेगी।

योग मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाता है। मानसिक शांति के लिए ध्यान करें। ध्यान सेरिब्रल कोरटेक्स की मोटाई बढ़ाता है। मस्तिष्क की शरीर की कोशिकाओं से संपर्क करने की क्षमता भी बढ़ती है।

यदि आपको चिंता होती है, तो आपके जीवन में तनाव को कम करना महत्वपूर्ण है। आराम करने के तरीके ढूंढें। व्यायाम तनाव को दूर करने का एक अच्छा तरीका है। व्यायाम के अलावा, अपने नियमित काम से ब्रेक लें या छुट्टी की योजना बनाएं। यदि आपको किसी विशेष चीज़ का शौक है, तो उसके लिए समय निकालें। ऐसी चीजें करें जो आपको बेहतर महसूस करवाती हैं।

तनाव पर काबू करें
नशे से दूर रहें
तंबाकू, ड्रग्स और शराब से तनाव कम नहीं होता है, बल्कि इनका उपयोग शरीर को नुकसान पहुंचाता है। नशे से तनाव और चिंता का सामना करना मुश्किल हो जाता है। कैफीन से भी चिंता विकार हो सकता है या उसे बढ़ा सकता है। सामान्य तौर पर, जो चीज़ें आपको स्वस्थ बनाती हैं वह आपको तनाव और चिंता से निपटने में मदद भी करती हैं।

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