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ल्यूकेमिया तब होता है, जब आपके शरीर में वाइट ब्लड सेल्स बढ़ जाती हैं। वाइट ब्लड सेल्स रेड ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स को बाहर निकाल देती हैं जिनकी आपके शरीर को स्वस्थ रहने के लिए आवश्यकता होती है। ब्लड कैंसर यानी ल्यूकेमिया में कैंसर की कोशिकाएं तेजी से और अनियंत्रित तरीके से हड्डियों के अस्थि मज्जा में बढ़ने लगती हैं।
ब्लड कैंसर होने की कोई उम्र निर्धारित नहीं है, यह किसी भी उम्र में हो सकता है । बल्ड कैंसर होने पर कैंसर की कोशिकाएं यानि सैल्स व्यक्ति के शरीर में खून को बनने नहीं देते इंसान को, जिस वजह से व्यक्ति में खून की कमी होने लगती है । शरीर के खून के साथ कैंसर व्यक्ति की बोन मैरो को भी नुकसान करता है।
ब्लड कैंसर के प्रकार
ल्यूकेमिया
यह ब्लड कैंसर का प्राथमिक और प्रमुख प्रकार है, जिसमें व्हाइट ब्लड सेल की मात्रा रेड ब्लड सेल की तुलना में काफी ज्यादा हो जाती है।आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि कुछ लोगों में ल्यूकेमिया कैंसर की शुरूआत धीरे-धीरे होती है और बाद में यह खतरनाक हो जाता है।
ल्यूकेमिया कैंसर भी कईं तरह का होता है और लोग इससे अंजान होते हैं । ल्यूकेमिया कैंसर के 4 मुख्य प्रकार हैं :
एक्यूट ल्यूकेमिया :जब रक्त और मौरो के सैल्स तेज़ी से बढ़ते और बढ़कर इकट्ठा होने लगते हैं, तो उसी स्थिति को एक्यूट ल्यूकेमिया कहते हैं । यह कोशिकाएं बहुत तेज़ी से बोन मैरो में जमा होने लगती है ।
क्रोनिक ल्यूकेमिया :शरीर के बाकि सैल्स के अलावा जब शरीर में कुछ अविकसित सैल्स के बनने की प्रक्रिया होती है, तो उसे ही क्रोनिक ल्यूकेमिया कहते हैं । क्रोनिक ल्यूकेमिया भी समय के साथ बढ़ता रहता है और अगर इलाज न कराया जाए तो यह स्थिति को बहुत गंभीर कर देता है ।
लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया :यह वह स्थिति होती है जब बोन मैरो के सैल्स व्हाइट ब्लड सैल्स में बदलना शुरु हो जाते हैं ।
मायलोजनस ल्यूकेमिया :मौरो सैल्स द्वारा रेड ब्लड सैल्स और व्हाइट ब्लेड सैल्स के अलावा जब प्लेटेट्स का निर्माण होता है, उसे मायलोजनस ल्यूकेमिया कहते हैं ।
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