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क्या बीपी बढ़ने का कारण खराब जीवनशैली है? यहाँ जानिए बीपी बढ़ने के कई अन्य कारण। साथ ही पढ़ें इसके लक्षण और बचने के उपाय।
हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति को अनदेखा करना सही नहीं है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं या जटिलताओं का कारण बन सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि वक़्त रहते बीपी बढ़ने का कारण जानकर इसके ट्रीटमेंट पर या बचाव पर ध्यान दिया जाए।
यही वजह है कि हम हाई बीपी को मैनेज करने के लिए बीपी बढ़ने का कारण और इससे जुड़ी अन्य जानकारियां शेयर कर रहे हैं।
हाई ब्लड प्रेशर क्या है?
जब ब्लड प्रेशर सामान्य (120/80 mm Hg) से अधिक हो जाता है, तो उसे हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहते है। आपकी एक्टिविटीज के आधार पर आपका ब्लड प्रेशर पूरे दिन बदलता रहता है। अगर ब्लड प्रेशर की रीडिंग लगातार नॉर्मल से ऊपर रहती है, तो हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन का निदान हो सकता है।
ब्लड प्रेशर की रीडिंग में 2 नंबर होते हैं। ऊपरी संख्या को सिस्टोलिक (systolic) ब्लड प्रेशर और निचली संख्या को डायस्टोलिक (diastolic) ब्लड प्रेशर कहते हैं। उदहारण के साथ समझें तो 120/80 mm Hg,में 120 mm Hg ऊपरी संख्या या सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर है और 80 mm Hg निचली संख्या या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर होती है।
ब्लड प्रेशर के स्टेजेस
ब्लड प्रेशर को निम्न कैटेगरीज या स्टेजेस में बांटा गया है:
नॉर्मल (Normal): यह ब्लड प्रेशर का सामान्य या नॉर्मल स्टेज है। इसमें सिस्टोलिक 120 mm Hg और डायस्टोलिक 80 mm Hg से कम होता है।
इलिवेटेड (Elevated): सिस्टोलिक 120-129 mm Hg के बीच और डायस्टोलिक 80 mm Hg से कम होता है।
स्टेज 1 हाइपरटेंशन: इसमें सिस्टोलिक 130-139 mm Hg के बीच या डायस्टोलिक 80-89 mm Hg के बीच होती है।
स्टेज 2 हाइपरटेंशन: सिस्टोलिक 140 mm Hg या उससे अधिक और डायस्टोलिक 90 mm Hg या इससे अधिक होता है।
हाइपरटेंशन क्राइसिस - इस स्टेज में ब्लड प्रेशर अचानक 180/120 mm Hg या इससे अधिक हो जाता है। यह एक गंभीर मेडिकल स्थिति होती है। इसमें तुरंत डॉक्टर से ट्रीटमेंट कराने की आवश्यकता होती है।
हाई ब्लड प्रेशर के प्रकार
स्टेजेस की तरह ही हाई ब्लड प्रेशर के प्रकार भी हैं। बता दें हाई ब्लड प्रेशर दो तरह के होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:
1. प्राइमरी हाइपरटेंशन
प्राइमरी, या एसेंशियल बीपी, हाई ब्लड प्रेशर का सबसे आम प्रकार है। अधिकांश लोगों के लिए जिन्हें इस प्रकार का रक्तचाप होता है, उनमें यह उम्र के साथ-साथ विकसित होता जाता है।
2. सेकंडरी हाइपरटेंशन
अचानक बीपी बढ़ने का कारण सेकंडरी हाइपरटेंशन हो सकता है और यह प्राइमरी या एसेंशियल हाइपरटेंशन की तुलना में अधिक गंभीर हो सकता है। सेकंडरी हाई ब्लड प्रेशर किसी अन्य हेल्थ कंडीशन, लम्बे समय से चलने वाली बीमारी या कुछ दवाओं के उपयोग के कारण हो सकता है।
आमतौर पर, इसका इलाज करने के बाद या जिन दवाइयों के कारण यह कंडीशन हुआ है, उन्हें बंद करने के बाद ठीक हो सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर के कारण
अगर आपके मन में यह सवाल है कि ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है, तो बता दें कि हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन के प्रकारों के आधार पर इसके कारणों को 2 भागों में विभाजित किया जा सकता है। नीचे हमने प्राइमरी हाइपरटेंशन और सेकंडरी हाइपरटेंशन के कारणों के बारे में विस्तार से बताया है:
प्राइमरी हाई ब्लड प्रेशर के कारण
प्राइमरी या एसेंशियल हाइपरटेंशन को विकसित होने में सालों लग जाते हैं। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
आनुवंशिक- जिन लोगों के परिवार में किसी को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रही हो या पेरेंट्स को हाई बीपी की परेशानी हो तो आपको भी हाई ब्लड प्रेशर होने का रिस्क हो सकता है।
आयु- वृद्ध वयस्कों (>60 वर्ष) को हाई बीपी होने का अधिक रिस्क हो सकता है।
मोटापा- अधिक वजन या ओबेसिटी हाई बीपी के जोखिम कारकों में से एक है।
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां- डायबिटीज या किडनी डिसऑर्डर, जैसी क्रॉनिक कंडीशन हाई बीपी के रिस्क को बढ़ा सकती हैं।
जीवन शैली- गतिहीन जीवन शैली, अनहेल्दी खाने की आदतें और धूम्रपान या शराब के सेवन जैसी आदतें हाई बीपी का कारण बन सकती हैं।
सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर के कारण
सेकंडरी हाइपरटेंशन के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिनमें शामिल है:
किडनी डिसऑर्डर (Kidney disorders) - अगर किसी को किडनी से संबंधित कोई समस्या लंबे समय से हो।
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive sleep apnea) - नींद में सांस लेने में रूकावट होना।
थायरॉयड समस्याएं (Thyroid problems) - अगर थयरॉयड ग्लैंड पर्याप्त थयरॉयड हॉर्मोन रिलीज़ न कर सके या जरूरत से ज़्यादा थयरॉयड हॉर्मोन रिलीज़ करे, तो इन स्थितियों में भी ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
जन्मजात हृदय दोष (Congenital heart defects) - इसमें जन्म लेने के बाद हृदय में असामान्यता देखी जाती है। यही आगे चलकर सेकंडरी हाइपरटेंशन का कारण बन सकता है।
अधिवृक्क ग्रंथि ट्यूमर(Adrenal gland tumors) - एड्रेनल ट्यूमर (Adrenal tumors) तब होता है, जब एड्रेनल ग्रंथि में कोशिकाएं कुछ शक्तिशाली हॉर्मोन्स की अधिकता का कारण बनती हैं। वहीं, एड्रेनल ट्यूमर हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है।
दवाइयां - कुछ दवाइयां जैसे बर्थ कण्ट्रोल की गोलियाँ, डिकंजेस्टेंट्स (Decongestants: दवाई जो बंद नाक को खोलने में राहत प्रदान कर सकती है) और ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक।
बीपी बढ़ने के लक्षण
हाई ब्लड प्रेशर वाले अधिकांश व्यक्ति किसी भी लक्षण का अनुभव नहीं करते हैं, जब तक कि उनका ब्लड प्रेशर बहुत अधिक न बढ़ जाए। तो ब्लड प्रेशर हाई होने से कुछ लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:
बहुत तेज सिरदर्द
सांस लेने में कठिनाई
दृष्टि या आंखों में ब्लड स्पॉट
नाक से खून आना
थकान
हृदय की अनियमित धड़कन
चेहरा लाल होना
चक्कर आना
हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम कारक
हाई बीपी का रिस्क निम्न प्रकार के लोगों को हो सकता है:
परिवार में अगर किसी को हाई बीपी है
धूम्रपान करने वालों को
प्रेग्नेंट महिलाओं को
जो महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं
अत्यधिक शराब पीने वालों को
अधिक फैट वाला खाना या बहुत अधिक नमक खाने वालों को
जिन लोगों को स्लीप एपनिया है
बीपी बढ़ने के कारण क्या जटिलताएं हो सकती है?
अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर के कारण निम्न जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं:
1. हार्ट अटैक या स्ट्रोक (Heart Attack or Stroke)
हाई ब्लड प्रेशर के कारण आपकी धमनी की दीवारों में फैट, कोलेस्ट्रॉल, या अन्य पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे आपकी रक्त वाहिकाएं सख्त हो सकती है। इस वजह से धमनियां संकुचित हो सकती हैं (एथेरोस्क्लेरोसिस) और हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी समस्या हो सकती है।
2. एन्यूरिज्म (Aneurysms)
धमनीविस्फार या एन्यूरिज्म एक धमनी की दीवार में बलून जैसा उभार होता है। धमनियां रक्त वाहिकाएं होती हैं जो ऑक्सीजन युक्त ब्लड को हृदय से शरीर के अन्य भागों में ले जाती हैं। वहीं, जब ब्लड वेसेल्स में मौजूद धमनीविस्फार या गुब्बारे जैसा सूजन बड़ा हो जाता है, तो यह फट सकता है और यह रक्तस्राव या जान के जोखिम का कारण बन सकता है। यह कई कारणों से हो सकता है, जिसमें से एक मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर भी है।
3. हार्ट फेलियर (Heart Failure)
जब ब्लड को ब्लड वेसल्स में भेजने में आपके हृदय को अधिक काम करना पड़ता है, तो हार्ट चैम्बर की दीवारें मोटी हो सकती हैं, जिसके कारण हार्ट फेल भी हो सकता है।
4. किडनी डिजीज (Kidney Disease)
हाई ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को संकरी कर सकती है, जिससे रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। जिससे अंततः किडनी में ब्लड वेसल्स डैमेज हो सकती है, जिससे किडनी ठीक तरह से काम करना बंद कर सकती है।
5. आँखों से सम्बन्धी समस्या (Vision Problems)
अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर आंखों की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे दृष्टि से सम्बन्धी समस्या हो सकती है। इससे आपको धुंधला दिखाई दे सकता है या कुछ मामलों में इससे आपको दिखाई देना भी बंद हो सकता है।
6. मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic Syndrome)
मेटाबोलिक सिंड्रोम एक साथ होने वाली कुछ कंडीशंस का एक समूह है। इसमें डायबिटीज, हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम बढ़ सकते हैं। इन कंडीशंस में हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर, वजन बढ़ना (विशेष रूप से कमर के आसपास), और असामान्य लिपिड स्तर (कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड लेवल्स) आदि आते हैं।
7. मेमोरी लॉस (Memory Loss)
अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर आपके सोचने-समझने और याद रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। यह आपकी याददाश्त को प्रभावित कर सकता है। हाई बीपी के कारण आपको कोई कांसेप्ट समझने में भी कठिनाई हो सकती है।
8. डिमेंशिया (Dementia)
कुछ व्यक्तियों में हाई ब्लड प्रेशर के कारण डिमेंशिया भी हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जो याददाश्त कमजोर कर सकती है और संज्ञानात्मक कार्य (cognitive function - सोचने समझने और याद रखने की क्षमता) को भी प्रभावित कर सकती है। यह स्थित तब पैदा हो सकती है, जब मस्तिष्क को ब्लड पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाएं डैमेज होने लगती हैं।
हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के उपाय
ब्लड प्रेशर कम करने के उपाय में आप स्वस्थ जीवनशैली अपना सकते हैं और हाई ब्लड प्रेशर के हानिकारक प्रभावों से बच सकते हैं। नीचे दिए छोटे-छोटे स्टेप्स अपनाकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रख सकते हैं।
हेल्दी वेट को मेंटेन रखें
एक्टिव रहें
योग या व्यायाम करें
सीमित मात्रा में सोडियम का सेवन करें
हेल्दी डाइट लें
स्ट्रेस को मैनेज करना सीखें
धूम्रपान छोड़ दें
शराब पीना छोड़ दें
बीपी बढ़ने का कारण कोई एक नहीं है। आपके ब्लड प्रेशर के हाई होने के कई कारण हो सकते हैं, जो इस लेख में ऊपर बताये गए हैं। आप अपने हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए पहले उनके कारणों को जानें कि क्या ब्लड प्रेशर को ट्रिगर कर रहा है। साथ ही साथ यहां बताए गए उपायों को आजमा सकते हैं और अपने ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रख सकते हैं।
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