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योग शास्त्र के अनुसार शरीर में सात चक्र होते हैं। इनके नाम है मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धख्य, आज्ञा और सहस्रार। किसी भी एक चक्र, दो, तीन या इससे ज्यादा चक्र जागृत होने के अलग अलग परिणाम होते हैं। समय-समय पर चक्रों वाले स्थान पर ध्यान दिया जाए तो मानसिक स्वास्थ्य और सुदृढ़ता प्राप्त की जा सकती है। आओ जानते हैं कि मणिपुर चक्र क्या है और इसे जागृत करने से क्या होता है।
मणिपुर चक्र : मणि यानी गहना और पुर यानी स्थान। योग शास्त्र में नाभि चक्र को मणिपुर चक्र कहते हैं। मणिपुर का प्रतिनिधित्व करने वाला पशु मेष है। इसका अनुरूप तत्त्व अग्नि है, इसलिए यह 'अग्नि' या 'सूर्य केन्द्र' के नाम से भी जाना जाता है। इस चक्र के देवता विष्णु और लक्ष्मी हैं। नाभि के मूल में स्थित रक्त वर्ण का यह चक्र शरीर के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है, जो 10 दल कमल पंखुरियों से युक्त है। मणिपुर का एक अतिरिक्त प्रतीक त्रिभुज है, जिसका शीर्ष बिन्दु नीचे की ओर है। यह ऊर्जा के फैलाव, उद्गम और विकास का द्योतक है।
कैसे जाग्रत करें : मूलाधार चक्र के जागृत होने के बाद ही नाभि चक्र जागृत होता है या कहें कि सक्रिय होता है। ध्यान में 'रं' मंत्र के जाप के साथ पेट से श्वास लेने का अभ्यास करें। इससे यह चक्र सक्रिय होने लगेगा। इस चक्र को जागृत करने के लिए योगासन करके शरीर को फिट रखना भी जरूरी है।
10 फायदे:
1. जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है, उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे लोगों को 'कर्मयोगी' कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं। आपने कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएं।
2. इस चक्र के सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं।
3. यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं। आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।
4. सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। इससे सिद्धियां प्राप्त होती है। जब हमारी चेतना मणिपुर चक्र में पहुंच जाती है तब हम स्वाधिष्ठान के निषेधात्मक पक्षों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं।
5. इस चक्र के जागृत होने से अनिद्रा और हर तरह की चिंता दूर हो जाती है।
6. स्पष्टता, आनन्द, ज्ञान, बुद्धि और सही निर्णय लेने की योग्यता जैसे गुण विकसित हो जाते हैं।
7. मणिपुर चक्र स्फूर्ति का केन्द्र है। यह हमारे स्वास्थ्य को सुदृढ़ और पुष्ट करने के लिए हमारी ऊर्जा नियंत्रित करता है।
8. इस चक्र का प्रभाव एक चुंबक की भांति होता है, जो ब्रह्माण्ड से प्राण को अपनी ओर आकर्षित करता है।
9. पाचन तंत्र में गड़बड़ी को यह चक्र ठीक कर देता है।
10. एक दृढ़ और सक्रिय मणिपुर चक्र अच्छे स्वास्थ्य में बहुत सहायक होता है और बहुत सी बीमारियों को रोकने में हमारी मदद करता है।
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