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प्रेगनेंसी के दूसरे महीने के लक्षण
प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में हो सकती हैं ये समस्याएं

आपको बार-बार लार बन सकता है।
कब्ज की शिकायत हो सकती है।
सीने और पेट में जलन।
अपच, गैस या फिर पेट खराब हो सकता है।
खाने की इच्छा में कमी।
सिरदर्द, चक्कर आना बहुत कॉमन है।
निप्पल के आसपास का भाग अधिक डार्क हो जाना।
शरीर में खासकर, पैरों में सूजन रहना।

प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में हो सकती हैं ये समस्याएं

आपको बार-बार लार बन सकता है।
कब्ज की शिकायत हो सकती है।
सीने और पेट में जलन।
अपच, गैस या फिर पेट खराब हो सकता है।
खाने की इच्छा में कमी।
सिरदर्द, चक्कर आना बहुत कॉमन है।
निप्पल के आसपास का भाग अधिक डार्क हो जाना।
शरीर में खासकर, पैरों में सूजन रहना।
योनी से हल्का रक्तस्राव होना।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में बरतें ये सावधानियां (precautions for second month of pregnancy)

आराम करें। अधिक भारी चीजें ना उठाएं।
लिक्विड पदार्थ अधिक लें। प्रेग्नेंसी में खुद को हाइड्रेट रखना जरूरी है।
भोजन घर का खाएं। फल-सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर खाएं।
एक बार में ही अधिक खाने से बचें। थोड़ा-थोड़ा खाएं। इससे खाना जल्दी पच जाएगा।
ब्रेस्ट का साइज बढ़ने लगता है, ऐसे में सपोर्टिव ब्रा पहनें।

प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में डाइट (Second month pregnancy diet)

यदि आप दो महीने की प्रेग्नेंट हैं, तो यह स्टेज शिशु के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आपका खानपान हेल्दी और पौष्टिक चीजों से भरपूर होना चाहिए। बाहर का खाना बंद कर दें। घर का बना ताजा और पौष्टिक भोजन ही करें। स्वस्थ और संतुलित आहार लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, अधिक मात्रा में तरल पदार्थ, साबुत अनाज, स्प्राउट्स, अंडा, मछली आदि को अपनी डाइट में शामिल करें। प्रेग्नेंसी में हड्डियों को मजबूती देने के लिए दूध, दही, पनीर भी खाएं। शरीर में खून और आयरन की कमी ना हो, इसके लिए आयरन से भरपूर फूड्स, फल-सब्जी जैसे पालक, चुकंदर आदि खाएं। फॉलिक एसिड, फोलेट, कैल्शियम, जिंक, आयरन, आयोडीन, विटामिन डी गर्भावस्था में बहुत जरूरी हैं। डॉक्टर आपको सप्लीमेंट्स लेने की भी सलाह देंगे, इनके सेवन से बच्चों में जन्म–दोष को रोका जा सकता है।

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