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बाह्मी
को आयुर्वेद की ऐसी जड़ी-बटी माना गया है जो दिमाग की 97 प्रतिशत विकारों का आसानी से इलाज कर सकती है। इसके नियमित सेवन से न सिर्फ हमारी यादशात बेहतर होगी बल्कि हमारी बौद्धिक क्षमता में भी सुधार होगा। बाह्मी में बॉक्साइड, सिटग्मास्टोरोल जैसे कई बायो एक्टिव रसायन होते हैं जो हमारे मस्तिक की कार्य क्षमता में सुधार करते हुए अधिक उम्र में भी हमारी यादशात को बेहतर बनाए रखता है।
सेब
हर दिन एक सेव खाने से डाक्टर की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि सेव में कई ऐसे रसायन होते हैं जो न सिर्फ हमारे शरीर को बल्कि हमारे मस्तिष्क को ऊर्जा प्रदान करते हैं। सेव में क्यूरसेटिन नाम एंटी ऑक्साइड होता है जो मस्तिक में एक समय के बाद होने वाली कोशिकाओं के होने वाले क्षरण को बचाता है। साथ ही पार्किसन और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के खतरे को भी कम करता है।
फिश ऑयल सप्लीमेंट
मछली के तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिट और इको सेप्टॉनाइक एसिड सहित डो-कोसेहैक्सेनाइड एसिड होता है जो फैट तनाव और एंग्जायटी को कम करते हुए यादशात को बढ़ाने का काम करता है। अगर आपकी यादशात कमजोर है तो मछली का सेवन आपके लिए फायदेमंद है।
जिंगसेन का सेवन
जिंगसेन को भी याददाश्त और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने वाली जडी-बूटी के लिए बेहतर माना जाता है। इसमें जिनसेनोसाइड नामक एक्टिव तत्व होता है जो नूटोपिक प्रभाव को बढ़ाने का काम करता है। जिसकी मदद से लंबे समय तक किसी चीज को याद रखने में मदद मिलती है।
शंखपुष्पी का सेवन
शंखपुष्पी का सेवन भी याददाशत को मजबूत करने में लाभकारी माना जाता है। इस जड़ी-बूटी में कई तरह के एंटी ऑक्साइड होता है जो हमारी कम होती याददाशत को बेहतर बनाने में न सिर्फ मदद करता है ब्लकि इसके इस्तेमाल से तनाव, अनिद्रा, एंग्जाएटी का भी इलाज होता है। ये मस्तिष्क की कोशिशकाओं के बीच संबंध को बढ़ाती है और मस्तिष्क के कार्य मे सुधार होता है।
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