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बच्चे के जन्म के साथ घर में खुशियों के साथ आता है जिम्मेदारी का अहसास और कुछ चिंताएं. ज्यादातर पेरेंट्स के मन में सवाल खड़े होते हैं कि बच्चा कब बोलना शुरू करेगा, कब चलेगा? अगर किसी का बच्चा थोड़ा देर से बोलना या चलना शुरू करता है तो वो डॉक्टर्स के चक्कर लगाने शुरू कर देते हैं. लेकिन, एक चीज ऐसी है, जिस पर कोई ध्यान नहीं देता. माता-पिता बनने चुके 95 फीसदी भारतीय नहीं जानते होंगे कि बच्चों को रंग दिखना कब शुरू होते हैं. क्या पैदा होते ही बच्चों को सभी रंग दिखने लगते हैं? क्या नवजात बच्चे रंगों में अंतर कर पाते हैं. हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब.
ज्यादातर बच्चे 8 महीने की उम्र में घुटनों से चलना शुरू कर देते हैं. वहीं, 11 महीने से लेकर 18 महीने की उम्र के बीच बच्चे चलना शुरू कर देते हैं. घुटनों से चलने के दौरान बच्चों में आंख, हाथ, पैर और शरीर के बीच को-ऑर्डिशन की स्किल डेवलप होती है. बच्चे 10 महीने से लेकर 24 महीने के बीच बोलना शुरू कर देते हैं. वहीं, कुछ बच्चे थोड़ा ज्यादा समय भी लेते हैं. रंगों को देखने या पहचाना करने के मामले में बच्चे युवाओं के मुकाबले कम संवेदनशील होते हैं. माना जाता है कि सामान्य तौर पर बच्चे 5 महीने की उम्र में रंगों को अच्छी तरह से देखना शुरू कर देते हैं. अगर ऐसा है तो पैदा होने के बाद के शुरुआती कुछ महीनों में रंगों को लेकर बच्चों की स्थिति क्या होती है?
पैदा होते ही बच्चों को कौन-से रंग दिखते हैं?
शोध व अध्ययनों के मुताबिक, पैदा होने के तुरंत बाद बच्चों को सभी रंग दिखाई नहीं देते हैं. नवजात बच्चे दुनिया को सिर्फ काले और सफेद में देखते हैं. उन्हें ज्यादातर चीजों में ग्रे शेड भी नजर आता है. इसे बाद बच्चे 4 महीने की उम्र तक धीरे-धीरे कलर विजन डेवलप करते हैं. आपने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जब बच्चा आपके चेहरे पर टकटकी लगाकर देख रहा होता है तो उसे आप सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट नजर आ रहे हैं. जब माएं बच्चों को दूध पिलाती है तो दोनों के चेहरे के बीच एक फुट से भी कम दूसरी होती है. उस समय बच्चे को मां के ब्लैक एंड व्हाइट चेहरे के साथ ग्रे शेड भी नजर आता है.
नवजात बच्चे सफेद और काले रंग के बीच की चमक को भी देख सकते हैं.
बच्चों को पहला रंग कौन-सा दिखता है?
नवजात बच्चे सफेद और काले रंग के बीच की चमक को भी देख सकते हैं. काले-सफेद के साथ ग्रे शेड के बाद बच्चे पैदा होने के एक सप्ताह बाद सबसे पहले लाल रंग को अलग से पहचानना शुरू करते हैं. फिर धीरे-धीरे बच्चे रंगों में अंतर करना शुरू कर देते हैं. इसके बाद 3 से 4 महीने की उम्र के बीच बच्चे हरे और लाल रंग में फर्क करना शुरू कर देते हैं. ज्यादातर बच्चे 1 महीने की उम्र में रंगों की चमक और उनके गहरेपन को पहचानना शुरू करते हैं. आपके बच्चों का कलर विजन पूरी तरह से 4 महीने की उम्र में डेवलप हो जाता है. इस उम्र में बच्चे बहुत सारे रंगों को देखना शुरू कर देते हैं. यहां तक कि 4 से 5 माह की उम्र के बीच वे रंगों के अलग-अलग शेड भी पहचानने लगते हैं.
बच्चे कितनी दूर तक साफ देखते हैं?
ज्यादातर बच्चे पैदा होने के तुरंत बाद 8 से 10 इंच दूर की चीजों पर ही फोकस कर पाते हैं. इस दौरान वे ज्यादा चमकदार चीजों को ही टकटकी लगाकर देखते हैं. इस दौरान वे एकसाथ दो अलग चीजों को भी साफ साफ नहीं देख पाते हैं. उनकी दोनों आंखों के बीच 1 माह की उम्र में समन्वय बन पाता है. इसके बाद उनके विजन में तेजी से सुधार होता है. इसके बाद से आंखों और हाथों के बीच तालमेल बनता है. बच्चे 8 सप्ताह का होने के बाद माता-पिता या नजदीकी लोगों के चेहरे पर आंखें फोकस कर पाते हैं. पहले 2 महीने बच्चों की दोनों आंखों के बीच बहुत अच्छा तालमेल नहीं हो पाता है. इसीलिए ज्यादातर परिवार के लोगों को भ्रम रहता है कि बच्चा ढेड़ा है, जबकि बच्चों में ये सामान्य है.
कब चीजों-चेहरों को पहचानना शुरू करते हैं?
बच्चों में 2 साल की उम्र होते-होते हाथों-आंखों के बीच अच्छे तालमेल के साथ ही ऊंचाई और गहराई का सेंस भी विकसित हो जाता है. इस उम्र के बच्चों के लिए सबकुछ नया होता है. लिहाजा, वे अपने आसपास के माहौल के बारे में सबकुछ जानना चाहते हैं. इस उम्र में हर बात को ध्यान से सुनते हैं और हर चीज को गौर से देखते हैं. वे रोज सामने आने वाली चीजों को पहचानना शुरू कर देते हैं. इस दौरान किताबों में नई चीजों को देखकर वे खुश होते हैं और रंग व पेंसिल की मदद से रेखाएं खींचना शुरू कर देते हैं. ज्यादातर बच्चों की आंखें पूरी तरह से स्वस्थ होती हैं. ज्यादातर बच्चे 2 साल की उम्र से अपने देखने की क्षमता को बढ़ाना शुरू कर देते हैं.
विजुअल डेवलपमेंट के लिए क्या करें पेरेंट्स?
पेरेंट्स बच्चों के विजुअल डेवलपमेंट में काफी मदद कर सकते हैं. इसके लिए वे कई चीजें कर सकते हैं. पेरेंट्स को बच्चे के जन्म से लेकर 4 महीने की उम्र तक कमरे में कम रोशनी के बल्ब का इस्तेमाल करना चाहिए. बच्चों के पालने की दिशा और लेटने की स्थिति में बार-बार बदलाव करना चाहिए. बच्चा जिस दिशा में देख रहा हो, उस तरफ खिलौने रखकर उनको छूना चाहिए और हाथ दूर ले जाना चाहिए. ध्यान रखें कि खिलौने की दूरी बच्चे से 8-12 इंच से ज्यादा ना हो. बच्चे से बात करते हुए कमरे में टहलना चाहिए. इससे वो आवाज की दिशा में अपनी आंखों को घुमाएगा. वहीं, 5 से 8 महीने की उम्र में बच्चों के पालने के आसपास अलग-अलग तरह की चीजें रखनी चाहिए. कुछ ऐसी चीजें भी रख सकते हैं, जिन्हें बच्चा खींच या किक कर सके.
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