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Pregnancy के आठवें महीने में ये सावधानियां बरतेंगीं तो स्‍वस्‍थ रहेगा बच्‍चा

प्रेग्‍नेंसी का आठवां महीना यानि शिशु के जन्‍म के अब बस कुछ ही दिन बाकी बचे हैं और इसलिए अब आपको पहले से भी ज्‍यादा सावधान रहना है।

वैसे तो प्रेग्‍नेंसी के पूरे नौ महीने महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन आखिरी महीनों में बहुत ज्‍यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आठवां महीना बहुत नाजुक होता है इसलिए इस समय आपको विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।
अपनी प्रेग्‍नेंसी के आठवें महीने में आप अपनी गर्भावस्‍था के अंतिम चरण में हैं। इस समय बच्‍चे का आकार ऐसा है कि उसने आपके गर्भाशय को घेर रखा है इसलिए वह अब पहले की तरह आपके पेट में उछलकूद नहीं कर सकता। अब उसके करवट लेने या हाथ-पैरों को हिलाने-डुलने की गतिविधियां होती रहेंगी। अब आपको उसके मूवमेंट पर पूरा ध्‍यान रखना है। इनमें कमी या तेजी होते ही अपने डॉक्‍टर से संपर्क कीजिए।
इस महीने आपको और कौन सी सावधानियां बरतनी हैं आइए उन पर कुछ चर्चा कर ली जाए:
प्रेग्‍नेंसी में हंसने से मां और बच्‍चे दोनों को मिलते हैं अनगिनत फायदे
प्रेग्‍नेंसी हार्मोंस के कारण प्रेगनेंट महिला को अचानक दुख और डिप्रेशन महसूस हो सकता है। प्रेग्‍नेंसी में दवाओं का सेवन कम से कम करना चाहिए। इसकी बजाय आप कॉमेडी और मजाकिया शोज देखकर या चुटकुले सुनकर हंस सकती हैं। इससे मूड भी ठीक रहता है और धीरे-धीरे डिप्रेशन के लक्षणों में भी कमी आती है।
जब भी आप अल्‍ट्रासाउंड के लिए जाती हैं तो जरा हंसकर देखें कि आपका शिशु कैसी प्रतिक्रिया देता है। जब मां प्रेग्‍नेंसी में खुश और उत्‍साह से परिपूर्ण रहती है तो बच्‍चा ज्‍यादा एक्टिव रहता है और उसका विकास भी बेहतर होता है।
ऐसे कई कारक हैं जो प्रीमैच्‍योर डिलीवरी का कारण बनते हैं और जब मां की इम्‍युनिटी कमजोर हो तो इसका खतरा और बढ़ जाता है। इम्‍युनिटी कमजोर होने पर वायरस, बैक्‍टीरिया आदि आसानी से प्रभावित करते हैं और इसका बुरा असर मां एवं बच्‍चे दोनों पर पड़ता है।
इंफेक्‍शन से मां से ज्‍यादा शिशु को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसकी वजह से बच्‍चे का नौ महीने से पहले जन्‍म या कोई जन्‍म विकार हो सकता है।

अगर आप इंटेलेजेंट बच्‍चा चाहती हैं तो प्रेग्‍नेंसी में वो सब काम करें जिससे शिशु के मस्तिष्‍क के विकास में मदद कर सके। डायट के अलावा मां का खुश रहना भी शिशु के विकास के लिए जरूरी होता है। इससे गर्भस्‍थ शिशु के मूवमेंट पर तो असर पड़ता ही है साथ ही दिमाग की कोशिकाओं का भी विकास होता है।

गर्भावस्‍था में मॉर्निंग सिकनेस, कमर दर्द, ऐंठन, पैरों में सूजन और गर्भावस्‍था में सिरदर्द होता है। हंसने से आपका ध्‍यान दर्द से हटता है और शरीर में कुछ ऐसे केमिकल रिलीज होते हैं जो नैचुरल पेन किलर यानी दर्द निवारक का काम करते हैं।
प्रेग्‍नेंसी में हाई ब्‍लड प्रेशर सबसे ज्‍यादा खतरनाक होता है और इससे जल्‍दी प्री-क्‍लैंप्‍सिया एवं कई तरह की समस्‍याएं हो सकती हैं। प्रीमैच्‍योर डिलीवरी भी हो सकती है या फिर स्थिति ज्‍यादा बिगड़ने पर सिजेरियन डिलीवरी करवाने की जरूरत पड़ सकती है। खुश रह कर और रोज हंसने से तनाव में कमी आती है जिससे ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल में और शरीर स्‍वस्‍थ रहता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि हंसने से प्रेगनेंट मां की इम्‍युनिटी भी बढ़ती है। हंसने से शरीर में तनाव कम होता है जिससे इम्‍युन सिस्‍टम को स्‍वस्‍थ रखने वाले हार्मोंस और केमिकल्‍स सक्रिय हो जाते हैं। इस तरह आप किसी सप्‍लीमेंट या दवा के बिना ही हंसकर प्रेग्‍नेंसी में स्‍वस्‍थ और बीमारियों से दूर रह सकती हैं।


देर तक खड़े न रहें
यह आठवें महीने की सबसे अहम सावधानी है। जैसे-जैसे बच्‍चे का वजन बढ़ता है आपके पेट और पेडू के इलाके में दबाव बढ़ता जाता है। अपने को झुकने से बचाने के लिए आप पीछे की ओर झुकती हैं। इससे आपकी पीठ में काफी दर्द होता है। इसलिए अपनी पीठ के दर्द को ध्‍यान में रखकर इस समय ज्‍यादा देर तक खड़े होने वाले काम न कीजिए।


पूरी नींद लें
इस समय बेहद जरूरी है कि आप कम से कम रात में आठ घंटे की नींद लें। इसके अलावा दिन में भी कुछ देर आराम अवश्‍य करें।

तनाव से दूर रहें
इस समय तनाव करने से बच्‍चे के ऊपर भी उसका असर पड़ता है। इसलिए तनाव से दूर रहें।

पीठ के बल न लेटें
आप अपनी पीठ के बल न लेटें। इस समय आपका वजन बहुत ज्‍यादा बढ़ गया है। पीठ के बल लेटना आपके लिए भी असहज होगा और बच्‍चे के लिए भी।


कई बार थोड़ा-थोड़ा खाएं
एक बार में ही भरपेट खाने की जगह आप थोड़ी मात्रा में कई बार खाएं। इससे एसिडिटी की समस्‍या नहीं होगी।

वॉक पर जरूर जाएं
सुबह-शाम आधे घंटे घूमने से शरीर में रक्‍त संचार ठीक रहेगा। इसके अलावा मनोदशा भी सुखद रहेगी और आप तनाव से दूर रहेंगी।

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