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आंतों में मल जमने के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके
पेट फूलना, जी मिचलाना या रह-रहकर पेट दर्द होना. ये कुछ ऐसे सामान्य लक्षण हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि आपकी आतों की सफाई ठीक से नहीं हो रही है. ऐसे में आपको किन बातों पर ध्यान देना चाहिए जानें

आंतों में मल जमना
आंतों में मल जमने की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है. यह एक आम समस्या है और आज के समय में ज्यादातर लोग इसका सामना कर रहे हैं. इस बीमारी के बारे में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं है हालांकि वे इसके कारण परेशान रहते हैं. आज हम आपको इस समस्या के लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में बता रहे हैं. ताकि बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी लोग इससे होने वाली समस्याओं से बच सकें...

आंतों में मल जमने के लक्षण

पेट में अक्सर दर्द रहना या रहरहकर दर्द होना
लगातार मन खराब रहना, मितली आना या उल्टी आना
हर समय थका-थका महसूस करना
लगातार कमजोरी बने रहना
पेट में भारीपन और पेट फूलने की समस्या होना
मल त्याग के दौरान पेट में दर्द और ऐंठन होना
मल त्याग के बाद या इस दौरान नाभि के निचले हिस्से में तेज चुभन होना

आंत में मल जमने के कारण

खान-पान की गलत आदतें.
पर्याप्त मात्रा में पानी ना पीना.
सोने और जागने का समय निश्चित ना होना.
फास्ट फूड और जंक फूड अधिक खाना
मैदा से बनी चीजों का अधिक सेवन करना.
शारीरिक रूप से ऐक्टिव ना रहना.
वॉक, योग, एक्सर्साइज या खेल-कूद इत्यादि बिल्कुल ना करना.

इस समस्या से बचाव के उपाय

आंतों में मल जमने की समस्या बयस्कों को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करती है, जिससे उनकी दिनचर्या बाधित रहती है. जबकि बच्चों में यह समस्या उनकी शारीरिक और मानसिक ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है. इसलिए इस समस्या से बचाव के लिए ये उपाय जरूर अपनाएं...

हर दिन कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं.
दिन के भोजन में रसीली सब्जी और दाल जरूर खाएं.
रात का भोजन हल्का रखें. इसमें दाल-रोटी-सब्जी की जगह खिचड़ी या दलिया खाया जा सकता है.
दोपहर के भोजन में दही जरूर खाएं.
रात को भोजन के दो घंटे बाद दूध जरूर पिएं.
ताजे फल और हरी सब्जियां अधिक खाएं, ऐसा करने से शरीर को फाइबर की प्राप्ति होती है और फाइबर आंतों की क्लीनिंग का काम करते हैं.
खाना खाने और सोने-जागने का समय निर्धारित करें. इससे शरीर की बायॉलजिकल क्लॉक सही रहती है और मल त्याग सही से होता है.
शारीरिक रूप से ऐक्टिव रहें. खेल-कूद संभव ना हो तो हर दिन कम से कम 40 मिनट की वॉक, योग और स्ट्रेचिंग जरूर करें.


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