Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
गर्भ मेंबच्चा उल्टा होना (ब्रीच डिलीवरी)
गर्भ में बच्चा उल्टा होने यानि ब्रीच अवस्था का मतलब है कि शिशु जन्म लेने के लिए सिर नीचे की बजाय नितंब नीचे की अवस्था में है। ब्रीच अवस्था कई तरह की होती है, जैसे कम्पलीट, इनकम्पलीट, फ्रेंक, सिंगल फुटलिंग या डबल फुटलिंग ब्रीच।
कुछ डॉक्टर आपके पेट पर दबाव डालकर ब्रीच शिशु की अवस्था बदलने का प्रयास कर सकते हैं। इसे अंग्रेजी में एक्सटर्नल सेफेलिक वर्जन (ईसीवी) कहा जाता है। सभी महिलाओं का ईसीवी नहीं किया जा सकता है और यदि स्वास्थ्य समस्याएं हों, तो ऐसा करने का प्रयास भी नहीं किया जाता।
यदि प्रसव नलिका में शिशु के सिर की बजाय पहले नितंब या पैर आ जाएं, तो योनि के जरिये प्रसव करवाना मुश्किल हो सकता है। इस वजह से अधिकांश डॉक्टर ब्रीच शिशु की डिलीवरी के लिए सिजेरियन ऑपरेशन को सबसे सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
पेट में उल्टा बच्चा (ब्रीच) होने का क्या मतलब है?
पूरी गर्भावस्था के दौरान आपका शिशु गर्भ में घूमता रहता है और अपनी अवस्था बदलता रहता है। जब आप गर्भावस्था के अंतिम चरण पर पहुंचती हैं, करीब 36 सप्ताह के आसपास तो अधिकांश शिशु श्रोणि में सिर नीचे वाली अवस्था में आ जाते हैं। जो शिशु सिर नीचे की अवस्था में हो और उसका चेहरा आपकी रीढ़ की हड्डी की तरफ हो तो इसे एंटीरियर अवस्था कहा जाता है। यह गर्भस्थ शिशु की जन्म लेने की सबसे आम अवस्था होती है और नॉर्मल डिलीवरी के लिए यह सबसे आसान रहती है।
कभी-कभार शिशु उल्टी अवस्था में होते हैं। जब शिशु के सिर की बजाय उसका नितंब नीचे की तरफ हो, तो इस अवस्था को अंग्रेजी में ब्रीच पॉजिशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि सिर की बजाय शिशु का नितंब या पैर पहले बाहर आएंगे।
तीसरी तिमाही के दौरान तक ब्रीच अवस्था आमतौर पर अस्थाई होती है। बहुत से शिशु जन्म से पहले घूमकर सिर नीचे वाली अवस्था में आ जाते हैं। हालांकि, यदि 36 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद भी आपका शिशु गर्भ में उल्टा ही है, तो उसके सीधी अवस्था में आने की संभावना बहुत कम होती है।
ब्रीच की अलग-अलग अवस्थाएं कौन सी हैं?
गर्भ में आपके शिशु की अवस्था को देखते हुए कई तरह की ब्रीच अवस्थाएं (प्रेजेंटेशन) हो सकती हैं।
कम्प्लीट ब्रीच जब शिशु का नितंब नीचे की तरफ हो और कूल्हे और घुटने मुड़कर पालथी वाली अवस्था में हों। आपको अपने पेट के निचले हस्से में शिशु के पैर चलाने की हलचल महसूस हो सकती है। इनकम्प्लीट ब्रीच इसमें शिशु का एक घुटना इस तरह मुड़ा होता है कि उसका वह पैर नितंब के साथ लगा होता है, वहीं दूसरी टांग इस तरह फैली होती है कि उसका पैर चेहरे के नजदीक होता है।
फ्रेंक ब्रीच फ्रेंक ब्रीच अवस्था में शिशु की दोनों टांगे ऊपर की तरफ फैली होती है, जिससे दोनों पैर उसके चेहरे के पास होते हैं।
सिंगल फुटलिंग ब्रीच सिंगल फुटलिंग ब्रीच अवस्था में शिशु का एक पैर ग्रीवा की तरफ होता है।
डबल फुटलिंग ब्रीच डबल फुटलिंग ब्रीच अवस्था में शिशु के दोनों पैर ग्रीवा की तरफ होते हैं।
ब्रीच गर्भावस्था होने के क्या कारण होते हैं?
पेट में शिशु के उल्टा होने का आमतौर पर कोई स्पष्ट कारण नहीं होता। कुछ कारक शिशु के ब्रीच अवस्था में होने का खतरा बढ़ा देते हैं, जैसे कि:
आपके गर्भ में जुड़वा या इससे ज्यादा शिशु हैं।
आप पहले भी गर्भवती हो चुकी हैं।
आपके गर्भ में बहुत ज्यादा या बहुत कम एमनियोटिक द्रव है।
आपके गर्भाशय में असामान्यताएं हैं।
आपको प्लेसेंटा प्रिविया है (प्लेसेंटा ने गर्भाशय को मुख को पूरी तरह ढक रखा है)।
आपका जन्म ब्रीच अवस्था में हुआ था या आपके भाई-बहन या माता-पिता का जन्म ब्रीच अवस्था में हुआ था।
आपके शिशु का वजन जन्म के समय कम है।
आपके शिशु का जन्म समय से पहले हो रहा है।
आपके शिशु को कुछ भ्रूणीय असामान्यताएं हैं।
आप अधिक उम्र में माँ बन रही हैं।
हालांकि, उपर्युक्त जोखिमों के बिना भी शिशु ब्रीच अवस्था में हो सकता है।
गर्भावस्था के अंतिम चरण में शिशु ब्रीच अवस्था में हो तो क्या होगा?
जो शिशु गर्भावस्था के अंत तक भी पेट में उल्टी अवस्था में हों, तो उनके अपने आप सीधी अवस्था में आने की संभावना बहुत ही कम होती है। अधिकांश ब्रीच शिशुओं का जन्म सिजेरियन ऑपरेशन के जरिये होता है, मगर इस चरण पर पहुंचने से पहले आपके शिशु को सिर नीचे वाली अवस्था में लाना शायद संभव हो सकता है।
कुछ डॉक्टर शिशु को सीधी अवस्था में लाने का प्रयास कर सकते हैं। हाथ से की जाने वाली इस प्रक्रिया को एक्सटर्नल सेफेलिक वर्जन (ईसीवी) कहा जाता है।
ईसीवी की प्रक्रिया 36 सप्ताह की गर्भावस्था से लेकर प्रसव शुरु होने तक आजमाई जा सकती है। यदि आप भी ईसीवी करवाने का निर्णय लें, तो यह केवल अनुभवी डॉक्टर के द्वारा ही की जानी चाहिए। यह प्रक्रिया अस्पताल में की जाएगी, आमतौर पर डिलीवरी रूम या ऑपरेशन थियेटर के पास ताकि यदि कोई समस्या हो तो तुरंत सी-सेक्शन डिलीवरी की जा सके। इस प्रक्रिया से पहले, इसके दौरान और बाद में शिशु के दिल की धड़कन पर नजर रखी जाएगी।
ईसीवी करवाने की सलाह सभी महिलाओं को नहीं दी जाती है। यदि कोई जटिलताएं हों या आपके शिशु के स्वास्थ्य को लेकर कोई चिंता हो, तो यह प्रक्रिया नहीं आजमाई जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि आपको हाल ही में योनि से रक्तस्त्राव हुआ है या आपके गर्भ में जुड़वा या इससे ज्यादा शिशु हैं, तो शिशु की अवस्था बदलने की कोशिश करना सुरक्षित नहीं होगा।
ईसीवी के कारगर साबित होने की संभावना तब और ज्यादा होती है जब आप पहले भी माँ बन चुकी हों या गर्भ में पर्याप्त एमनियोटिक द्रव हो। हालांकि, कई बार शिशु अपनी स्थिति से हिलता नहीं है या फिर दोबारा ब्रीच अवस्था में आ जाता है, इसे अंग्रेजी में पर्सिसटेंट ब्रीच प्रेजेंटेशन कहा जाता है।।
यदि आपका शिशु 36 सप्ताह की गर्भावस्था में ब्रीच अवस्था में हो, तो डॉक्टर आपके साथ डिलीवरी के विकल्पों पर चर्चा करेंगी और आपके लिए बेहतर कदम चुनने में मदद करेंगी।
अगर पेट में बच्चा उल्टा हो तो क्या नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है?
अधिकांश डॉक्टर ब्रीच अवस्था वाले शिशु का जन्म सिजेरियन के जरिये करवाने की सलाह देते हैं। यदि आप नॉर्मल डिलीवरी करवाना चाहें, तो डॉक्टर आपके साथ इसके संभावित जोखिम और फायदों पर चर्चा करेंगी। निम्न स्थितियों में डॉक्टर नॉर्मल डिलीवरी पर विचार कर सकती हैं:
आप और आपके शिशु को जटिलताएं होने का खतरा बहुत कम है।
ऐसे कोई अन्य कारण नहीं है, जिससे योनि के जरिये जन्म देना ज्यादा खतरनाक हो।
आपकी पहले भी नॉर्मल डिलीवरी हो चुकी है।
आपकी डॉक्टर को ब्रीच शिशुओं का नॉर्मल डिलीवरी के जरिये जन्म करवाने का अनुभव है।
आपके अस्पताल या मेटरनिटी होम में जरुरत पड़ने पर सी-सेक्शन की सुविधा है।
जब आपने सभी विकल्पों के बारे में अच्छे से विचार कर लिया हो, तो आपके और शिशु के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।
प्रसव के दौरान आप और आपके शिशु पर नजदीकी निगरानी रखी जाएगी। वैसे, आपको सिजेरियन ऑपरेशन के लिए भी तैयार रहना होगा, क्योंकि यदि प्रसव सही से आगे न बढ़े या प्रसव से जुड़ी कोई जटिलताए हों तो सी-सेक्शन करना पड़ेगा।
यदि शिशु ब्रीच अवस्था से न पलटे तो क्या मेरी सिजेरियन डिलीवरी होगी?
ब्रीच अवस्था वाले अधिकांश शिशुओं का जन्म सिजेरियन ऑपरेशन के जरिये होता है, क्योंकि बहुत से विशेषज्ञ इसे ही ब्रीच शिशु की डिलीवरी का सबसे सुरक्षित तरीका मानते हैं। आपको सिजेरियन करवाने की जरुरत होगी या नहीं, यह निम्नलिखित बातों पर निर्भर करेगा:
यदि शिशु ब्रीच अवस्था में है, तो उसकी एकदम सही अवस्था क्या है।
आप ईसीवी आजमाने का विकल्प चुनती हैं या नहीं और यह सफल होता है या नहीं।
आपकी और गर्भस्थ शिशु की सेहत।
आपको सिजेरियन ऑपरेशन करवाने की सलाह दी जा सकती है, यदि:
यह आपका पहला शिशु है।
आपके शिशु का एक या दोनों पैर उसके नितंब से नीचे हैं (फुटलिंग ब्रीच), या वह घुटने टेकने वाली अवस्था (नीलिंग ब्रीच) में हैं, हालांकि, ये अवस्थाएं आमतौर पर कम ही होती हैं।
आपके गर्भ में जुड़वा शिशु हैं और पहला शिशु ब्रीच अवस्था में है।
आपको प्री-एक्लेमप्सिया या कोई अन्य जटिलता है, जिसका मतलब है कि आपकी या शिशु की सेहत को खतरा है।
आपका शिशु सामान्य से बड़ा है और उसका संभावित वजन 4 किलो से ज्यादा हो।
आपके शिशु का संभावित वजन 2 किलो से कम है।
आपका शिशु ऐसी विशिष्ट अवस्था में है, जैसे कि गर्दन पीछे की तरफ झुकी हुई है, ऐसे में सिर का बाहर आना और मुश्किल हो सकता है।
आपका पहले भी सिजेरियन ऑपरेशन हो चुका है।
आपका श्रोणि क्षेत्र संकरा है।
आपकी अपरा नीचे की तरफ स्थित है।
ब्रीच अवस्था वाले शिशु का जन्म पूर्वनियोजित सिजेरियन ऑपरेशन के जरिये करवाने से आपको शिशु के जन्म की योजना बनाने का समय मिल जाता है। शिशु की केवल अवस्था ही उल्टी होती है, वैसे उसके स्वस्थ होने की पूरी संभावना होती है। इसलिए उसका जन्म बिना किसी जटिलता के आसानी से हो सकता है।
इस बीच ऑपरेशन से ठीक पहले भी अस्पताल में आपका अल्ट्रासाउंड किया जाएगा ताकि पता चल सके कि शिशु ने अपनी अवस्था बदली है या नहीं।
पूर्व नियोजित ब्रीच सिजेरियन ऑपरेशन भी अन्य पूर्वनियोजित सिजेरियन की तरह ही होता है। अंतर सिर्फ इतना है कि जन्म के समय सिर की बजाय उसकी टांगे या नितंब पहले बाहर आएंगे।
यदि शिशु ब्रीच अवस्था में हो और प्रसव समय से पहले शुरु हो जाए तो क्या होगा?
यदि आपका प्रसव समय से पहले शुरु हो जाए या पानी की थैली ड्यू डेट या पूर्व नियोजित सिजेरियन की तारीख से पहले ही फट जाए तो तुरंत डॉक्टर से बात करें।
ब्रीच शिशु का घर पर जन्म करवाने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि ब्रीच शिशु की नॉर्मल डिलीवरी करवाने में जटिलताएं होने का उच्च जोखिम रहता है।
यदि गर्भ में आपका शिशु उल्टा हो और आपका प्रसव समय से पहले (प्रीमैच्योर) शुरु हो जाए तो डॉक्टर शायद आपातकालीन सिजेरियन डिलीवरी ही करेंगी।
| --------------------------- | --------------------------- |