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दरअसल, इस बीमारी में मस्तिष्‍क में दो प्रोटीन, एमिलॉयड बीटा और टाउ का निर्माण होता है, जो न्यूरॉन्स को परेशान करते हैं और उसे नष्ट करते हैं। इससे मस्तिष्‍क की स्मृति क्षमता में कमी आती है। जॉन्स हॉपकिंस मेडिसिन के रेडियोलॉजिस्ट लीड लेखक डॉ डीन वोंग ने कहा कि अल्जाइमर के इस अध्‍ययन में सबसे बड़ी समस्‍या वास्‍तविक समय में प्रोटीन विकसित करने की थी।

उन्होंने कहा कि हमारे सामने अल्जाइमर एक ऐसी चुनौती थी, जिसका अब तक कोई निदान नहीं है। इसे ठीक नहीं किया जा सकता है यह रोगी के मौत के साथ ही खत्‍म होती है। उन्‍होंने कहा कि 'हम इन न्यूरोडिजेनरेटिव विकारों के लिए निदान और उपचार को तेज करने के लिए नए रेडियो-फार्मास्यूटिकल्स की पहचान करने के लिए काम कर रहे हैं।' पिछले अध्ययन में, टीम ने लगभग 550 को कम करने से पहले 550 संभावित ट्रैसर अणुओं का परीक्षण किया था।

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