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गर्भपात किसी भी महिला के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कष्टदायक होता है लेकिन यह स्थिति तब और भी ज्यादा खराब हो जाती है जब अपूर्ण, असफल, अधूरा और विफल गर्भपात हो जाता है. अपूर्ण, असफल, विफल, अधूरा गर्भपात के लक्षण क्या है तथा इसकी दवा और उपचार क्या हैं, इस बारे में विस्तार से जानकारी इस पोस्ट में देंगे.
गर्भपात या मिसकैरेज होना किसी भी महिला के लिए बुरे सपने जैसा होता है तथा शारीरिक रूप से भी काफी परेशान करने वाला होता हैं. यह परेशानी तब काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं जब पूर्ण, सफल गर्भपात नही होकर अपूर्ण, असफल गर्भपात हो जाता हैं और उस महिला के सामने एक और समस्या आती है की अधूरा गर्भपात में क्या करे तो इस बारे में विस्तार से वर्णन इस लेख में करेगें.
सही तरीके और डॉक्टर के संपर्क में रहकर किया गया पूर्ण और सफल गर्भपात में यह सुनिश्चित किया जाता हैं की इसके बाद गर्भाशय में कोई भी ऊतक या टिशू शेष नहीं रहे. इस लेख में हम असफल और अपूर्ण गर्भपात के कारण, लक्षण, उपचार तथा इसके जोखिम के बारे में विस्तार से जानेंगे.
विफल अपूर्ण असफल अधूरा गर्भपात के लक्षण, अपूर्ण गर्भपात की दवा के उपचार, अधूरा गर्भपात में क्या करे, अधूरे गर्भपात के लक्षण क्या है
अपूर्ण गर्भपात के लक्षण और उपचार के बारे में जानने से पहले हम यह जानते हैं की असफल या अधूरा गर्भपात क्या होता हैं. गर्भपात चाहे किसी भी प्रकार हो यानी चाहे प्राकृतिक तरीके से होने वाला मिसकैरेज हो अथवा जानबूझकर अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए होने वाला अबॉर्शन हो, यदि इसके बाद गर्भाशय में भ्रूण का कुछ अंश या टिशू रह जाता है या गर्भाशय से संबंधित अन्य विकार रह जाता है तो वो अधूरा या अपूर्ण गर्भपात कहलाता है. यदि समय पर असफल गर्भपात का पता नहीं लगे तो यह काफी नुकसानदायक साबित हो सकता हैं. अधूरा गर्भपात में क्या करे तो इस बारे में अपूर्ण गर्भपात की दवा उपचार के बारे मे आगे जानेंगे.
अधूरा गर्भपात के लक्षण । अपूर्ण गर्भपात के लक्षण
आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि हमें कैसे पता चलेगा कि गर्भपात पूर्ण हुआ है या अपूर्ण तो इस हेतु अधूरा गर्भपात के लक्षण को पहचान कर पता लगाया जा सकता है. तो आइए हम जानते हैं कि अधूरे गर्भपात के लक्षण क्या है तथा इस बारे में अन्य कौनसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
अगर गर्भपात के बाद खून बह रहा है और लगातार बढ़ रहा है यानी आपके गर्भाशय से हैवी ब्लीडिंग होना शुरू हो जाए और धीरे-धीरे यह रक्तस्त्राव बढ़ता जाए तो यह अधूरा गर्भपात के लक्षण हो सकता हैं.
गर्भपात के बाद पीठ दर्द, शरीर में जकड़न महसूस होना आदि भी इनकंप्लीट अबॉर्शन के लक्षण हो सकते हैं.
हैवी ब्लीडिंग की वजह से यदि आपको हर एक-दो घंटे में पैड चेंज करना पड़ रहा है तो यह अपूर्ण गर्भपात के लक्षण हो सकता है.
यदि गर्भपात के बाद रक्तस्राव के साथ खून के थक्के यानी ठोस कण भी निकल रहे है तो यह असफल गर्भपात के लक्षण हो सकता हैं.
श्रोणि क्षेत्र या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द होना तथा ऐंठन या संकुचन महसूस होना होना अधूरे गर्भपात के लक्षण होते हैं.
विफल गर्भपात के लक्षण यह भी है की ऐसा होने पर लगातार तेज बुखार आना, बेचैनी महसूस होना, चक्कर आना जैसी समस्याएं उत्पन होने लगती हैं.
इस तरह आपको यह तो जानकारी हो गई है की अधूरे गर्भपात के लक्षण क्या है तथा इस लेख में आगे हम अपूर्ण गर्भपात की दवा, उपचार के बारे में जानेंगे. अपूर्ण गर्भपात के लक्षण और उपचार के बारे में जानने से पहले यह जानना जरूरी है की उपयुक्त लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए तथा घरेलू उपाय से उपचार करने की जगह तुरंत किसी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए जिससे आप बहुत बड़ी समस्या से बच सकता है.
अपूर्ण गर्भपात के उपचार और दवा
विफल गर्भपात के बाद इसके उपचार हेतु तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए जो आपके अबॉर्शन की स्थिति और जांच के आधार पर उपचार और दवा के बारे में सलाह देंगे. असफल अपूर्ण गर्भपात के उपचार हेतु सामान्यत दो चरण होते हैं जो निम्न है-
1-अपूर्ण गर्भपात का परीक्षण करना
अधूरा गर्भपात के उपचार हेतु सबसे पहले तो गर्भाशय की जांच करके किसी विकार या भ्रूण के अवशेष की उपस्थिति का पता लगाया जाता है जिससे उपचार करने तथा दवा व शल्य चिकित्सा देने में आसानी रहती हैं. सामान्यत इस हेतु जो परीक्षण किए जाते है वो निम्नलिखित हैं-
एचसीजी परीक्षण द्वारा महिला के शरीर में एचसीजी के स्तर की जांच की जाती हैं जो सामान्यत अबॉर्शन के बाद कम होता जाता हैं. इस परीक्षण से एबॉर्शन के बाद के कई विकारों को पहचान करने में मदद मिलती हैं.
सोनोग्राफी या अल्ट्रासाऊंड परीक्षण
इस परीक्षण की मदद से गर्भाशय के कई विकारों के बारे में पता चलता है तथा गर्भाशय में उपस्थित टिशू के बारे में जानकारी प्राप्त होती हैं जो असफल गर्भपात के उपचार करने में सहायक होता हैं.
रक्त परीक्षण (Blood test)
रक्त परीक्षण के द्वारा ब्लड के प्रकार, आरएच कारक, ब्लीडिंग के खतरे आदि के बारे में पता लगाया जाता है जो उपचार करने और दवा देने में सहायक सिद्ध होता हैं.
2- अपूर्ण गर्भपात का उपचार करना
अपूर्ण गर्भपात के उपचार करने हेतु आवश्यक परीक्षण करने के बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर इसकी गंभीरता के अनुसार उपचार किया जाता हैं. यदि अपूर्ण गर्भपात की दवा की जरूरत होती तो तो दवा दी जाती हैं और यदि ज्यादा गंभीर समस्या हो तो सर्जरी चिकित्सा की जाती हैं. इस बारे में विस्तार से जानकारी निम्नलिखित हैं -
प्राकृतिक तरीके से उपचार
इनकंप्लिट अबॉर्शन के बाद कई बार सामान्य स्थिति होने पर डॉक्टर गर्भाशय से टिशू को प्राकृतिक तरीके से निकलने तक इंतजार करने का कहते है क्योंकि यदि हैवी ब्लीडिंग नही हो रही हो तो यह एक सामान्य स्थिति हो सकती हैं जिसमे ऊतक रक्त के साथ निकल जाते हैं.
अपूर्ण गर्भपात की दवा
यदि अबॉर्शन के बाद विभिन्न परीक्षणों में ज्यादा गंभीर समस्या नहीं पाई जाए तथा गर्भावस्था की शुरुआत में ही एबॉर्शन हो जाए तो अधुरा असफल गर्भपात की दवा से इस समस्या से निजात दिलाई जाती हैं. इस स्थिति में डॉक्टर अपूर्ण गर्भपात की दवा हेतु सामान्यत मिसोप्रोस्टोल का प्रयोग करते हैं. एक बात का ध्यान रखे की कभी भी इनकंप्लीट अबॉर्शन का इलाज और दवा का सेवन स्वयं मर्जी से नहीं करें क्योंकि यह एक आपातकालीन स्थिति होती हैं इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर उनसे अच्छे से ट्रिटमेंट लेवें.
सर्जरी से अपूर्ण गर्भपात के उपचार
ज्यादा रक्तस्राव होने तथा संक्रमण के लक्षण प्रकट होने पर और 10 सप्ताह से ज्यादा प्रेगनेंसी के बाद इनकंप्लिट अबॉर्शन होता हैं तो सर्जरी द्वारा उपचार होने की संभावना रहती हैं जिसके तहत वैक्यूम की सहायता से बचे हुए टिश्यू को गर्भाशय से निकला जाता हैं. गर्भपात के बाद रक्तस्राव ज्यादा होने पर खून चढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती हैं.
इस प्रकार आप अपूर्ण गर्भपात के लक्षण और उपचार के बारे में तो अच्छी तरह जान चुके हैं. अब हम असफल गर्भपात के कारण के बारे में जानेंगे.
अधूरा गर्भपात के कारण
अब तक आप यह तो जान चुके हैं की अधूरे गर्भपात के लक्षण क्या है तथा अब हम इसके कारण के बारे में जानते हैं जो निम्नलिखित हैं -
विफल गर्भपात के 50% मामलों में इसका कारण भ्रूण में गुणसूत्र संबंधी विसंगतियां होती हैं तथा इसे रोका भी नही जा सकता हैं.
गर्भाशय से संबंधित विकार भी असफल गर्भपात के कारण बन सकते हैं.
अधूरे गर्भपात के कारण में कुछ बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, गुर्दे की बीमारी, थायराइड की समस्या, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, ल्यूपस, थ्रोम्बोफिलिया आदि भी होती हैं.
किसी दवा के लगातार सेवन और शराब, कैफीन का सेवन भी अपूर्ण गर्भपात के कारण बन सकते हैं.
कई बार महिला की अधिक आयु भी अधूरा गर्भपात का कारण बन सकती है.
महिला के कम या अधिक वजन होने से भी इनकंप्लिट एबॉर्शन हो सकता हैं.
इसके अलावा गर्भवती महिला के देखभाल में कमी, पेट पर चोट लगने, यौन संक्रमण आदि कारण से भी असफल गर्भपात हो सकता हैं.
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