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जब कोई महिला नैचुरली कंसीव नहीं कर पाती है तो इस स्थिति में आईवीएफ ट्रीटमेंट की मदद से गर्भधारण करवाया जाता है। आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने का मतलब है कि महिला की फर्टिलिटी पॉवर कम है या प्रजनन तंत्र में कोई समस्‍या है जिसके कारण वह गर्भधारण नहीं पा रही थीं। ऐसे में आईवीएफ ट्रीटमेंट से गर्भधारण करने के बाद भी गर्भपात का खतरा बना रहता है।

नैचुरल प्रेग्‍नेंसी की तुलना में आईवीएफ से प्रेगनेंट होने पर मिसकैरेज का खतरा ज्‍यादा होता है। अगर आप आईवीएफ ट्रीटमेंट ले रही हैं तो कुछ बातों का ध्‍यान रखकर आप मिसकैरेज से बच सकती हैं।

​प्रोजेस्‍टेरोन पर दें ध्‍यान

प्रेग्‍नेंसी को बनाए रखने के लिए आपको नियमित सही मात्रा में प्रोजेस्‍टेरोन लेने की जरूरत है। आप इसे गोली, जेल, इंजेक्‍शन के रूप में ले सकती हैं। इसके लिए आप अपने डॉक्‍टर से सलाह ले सकती हैं। आपकी स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति के आधार पर डॉक्‍टर आपको बताएंगे कि आपके लिए प्रोजेस्‍टेरोन लेने का सही तरीका क्‍या है।

​टीएसएच लेवल भी है जरूरी

कुछ अध्‍ययनों में खून में टीएसएच हार्मोन के असामान्‍य स्‍तर और मिसकैरेज एवं गर्भधारण से जुड़ी अन्‍य समस्‍याओं की बात सामने आई है। आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने से पहले टीएसएच लेवल चेक करवाएं और ट्रीटमेंट के दौरान भी इस पर नजर रखें।

इसके अलावा हिस्‍टेरोस्‍कोपी करवाने की सलाह दी जाती है। आईवीएफ से पहले आप हिस्‍टेरोस्‍कोपी करवा सकती हैं। इससे गर्भधारण करने में आ रही मुश्किलों का कारण बन रही गर्भाशय से जुड़ी अनेक समस्‍याओं को देखा जा सकता है। हिस्‍टेरोस्‍कोपी से मिसकैरेज का खतरा कम हो जाता है और गर्भधारण की संभावना में सुधार आता है।

ब्‍लड टेस्‍ट भी करवा लें

खून में किसी भी तरह के विकार का पता लगाने के लिए आप ब्‍लड टेस्‍ट करवा सकती हैं। खून में थक्‍के बनने और खून गाढ़ा होने की स्थिति में भ्रूण तक सही ब्‍लड सर्कुलेशन होने में दिक्‍कत हो सकती है और इससे मिसकैरेज का खतरा भी बढ़ सकता है। दवा की मदद से खून से संबंधी विकारों को ठीक करने में मदद मिल सकती है।

​जीवनशैली पर दें ध्‍यान

आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने से पहले आप अपनी जीवनशैली में कुछ सकारात्‍मक बदलाव कर लें। ओवरवेट हैं ताे वजन घटाएं और धूम्रपान और शराब से दूर रहें।

इसके अलावा फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए कोई दवा डॉक्‍टर ने बताई है जो उसका सेवन जरूर करें। कुछ मामलों में एक खुराक छूटने पर भी मिसकैरेज हो सकता है।

​गर्भाशय ग्रीवा का रखें ध्‍यान

कई बार फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का असर गर्भाशय ग्रीवा पर पड़ सकता है और इससे डिलीवरी से पहले ही गर्भाशय ग्रीवा का मुंंह खुल सकता है। यह गर्भपात का कारण बन सकता है। अगर आपको पहले इस तरह की कोई दिक्‍कत हो चुकी है, तो इस बार डॉक्‍टर से इस विषय में बात कर लें।

अगर आपकी उम्र 42 या इससे अधिक है तो आपमें मिसकैरेज का खतरा 50 पर्सेंट बढ़ जाता है और बच्‍चे में भी क्रोमोसोमल असामान्‍यता का खतरा अधिक रहता है। इस स्थिति में आप डोनर एग की मदद ले सकती हैं।

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