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ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में सोते समय, नाक में एयर फ्लो कम हो जाता है। क्योंकि इसमें नाक और मुंह के ऊपरी हिस्से में हवा भर जाती है। यह बीमारी तीन प्रकार की होती है, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, सेंट्रल स्लीप एपनिया और कॉन्प्लेक्स स्लीप एपनिया।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea)

यह एपनिया का कॉमन टाइप है। इसमें एयर पैसेज में रुकावट के कारण ब्रीदिंग प्रॉब्लम होने लगती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, स्लीप एपनिया के 90-96 प्रतिशत मामले इसी से जुड़े होते हैं।

सेंट्रल स्लीप एपनिया (Central Sleep Apnea)

इस डिसऑर्डर में ब्रीदिंग बार-बार रुकती है और कुछ देर बार खुद ही शुरू हो जाती है। इसका कारण मसल्स को ब्रेन से प्रॉपर सिग्नल नहीं मिलना होता है।

कांप्लेक्स स्लीप एपनिया (Complex Sleep Apnea)

इस डिसऑर्डर में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सेंट्रल स्लीप एपनिया दोनों के लक्षण होते हैं। इसमें भी रोगी को सोते समय सांस रुकने की प्रॉब्लम होती है।

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