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यूरिया बढ़ने से किडनी के काम करने की क्षमता कम हो जाती है। इसके बाद टॉक्सिन शरीर से बाहर नहीं निकल पाता है जिससे बॉडी में इंफेक्शन फैलने लगता है। यूरिया का टॉक्सिन जब ब्रेन तक पहुंचता है तो ब्रेन शिथिल हो जाता है। ब्रेन से सही सिग्नल नहीं मिलने के कारण शरीर भी पूरी तरह से शिथिल पड़ जाता है।

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