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अंडाशय कैंसर (Ovarian cancer)

अंडाशय कैंसर की स्टेजअंडाशय कैंसर के लक्षणअंडाशय कैंसर का कारणअंडाशय कैंसर का निदानअंडाशय कैंसर की रोकथामअंडाशय कैंसर का इलाज

अंडाशय के अंदर किसी भी हिस्से में विकसित होने वाले ट्यूमर को ओवेरियन कैंसर (अंडाशय कैंसर) के नाम से जाना जाता है। वैसे तो अंडाशय में विकसित होने वाले ज्यादातर ट्यूमर कैंसरयुक्त नहीं होते हैं, लेकिन इनका कैंसरग्रस्त बनना संभव होता है। यदि सरल भाषा में कहें तो ओवेरियन कैंसर में अंडाशय के अंदर विकसित होने वाले गैर कैंसरकारी और कैंसरयुक्त सभी प्रकार के ट्यूमर आते हैं। ट्यूमर की संरचना विज्ञान के अनुसार ओवेरियन कैंसर को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है। ओवेरियन कैंसर की संरचना विज्ञान (HIstology) ही उसके इलाज, देखभाल और उससे होने वाली जटिलताओं निर्धारित करती है। पेडू व पेट में दर्द होना, पेट फूलना, बार-बार पेशाब जाना और भूख कम लगना आदि ओवेरियन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। इसके इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी आदि को शामिल किया जाता है।

अंडाशय कैंसर की स्टेज
अंडाशय कैंसर की गंभीरता के अनुसार उसे अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है, जो कुछ इस प्रकार हैं -

स्टेज 1 - जब कैंसर सिर्फ एक या दोनों अंडाशय तक ही सीमित हो।
स्टेज 2 - जब एक या दोनों अंडाशय के साथ-साथ कैंसर गर्भाशय तक फैल गया हो या फिर फैलोपियन ट्यूब तक फैल गया हो।
स्टेज 3 - जब अंडाशय के मौजूद कैंसर लसीका ग्रंथि तक या फिर पेट के किसी अन्य हिस्से में फैल गया हो।
स्टेज 4 - यदि दोनों अंडाशयों में कैंसर होने के साथ-साथ कैंसर लिवर या पेट के किसी अन्य अंग तक फैल गया हो।

अंडाशय कैंसर के लक्षण

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि अंडाशय में कैंसर विकसित होने पर किसी प्रकार के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि, अगर अंडाशय के अलावा कैंसर किसी अन्य हिस्से में तक फैल गया है, तो लक्षण विकसित होने लगते हैं। लेकिन अमेरिकन कैंसर सोसायटी (American Cancer Society) ने 2007 में अंडाशय कैंसर के कुछ शुरुआती लक्षणों की लिस्ट जारी की थी। उनके अनुसार अंडाशय में कैंसर होने से भी कुछ लक्षण विकसित हो सकते हैं और उनमें निम्न शामिल हैं -

पेडू या पेट में दर्द होना
पेट फूलना
बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना
भूख न लगना
खाना खाते समय जल्दी पेट भर जाना


अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण लंबे समय तक रहते हैं या फिर समय के साथ-साथ ये और बदतर हो रहे हैं, तो आपको जल्द से जल्द किसी गाइनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि उपरोक्त बताए गए लक्षण सिर्फ अंडाशय कैंसर का ही संकेत देते हैं, लेकिन स्थिति की पुष्टि करने के लिए इसकी जांच कराना बहुत जरूरी होता है।

अंडाशय कैंसर का कारण

महिलाओं के प्रजनन अंग अंडाशय (Ovaries) में होने वाले ट्यूमर को अंडाशय कैंसर कहा जाता है। हालांकि, अभी तक अंडाशय में कैंसर विकसित होने के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ ऐसे कारक हैं, जो अंडाशय कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं -

पारिवारिक समस्या - जिन महिलाओं को अंडाशय कैंसर हो चुका है या अभी भी है, तो उसके करीबी रिश्ते की महिलाओं जैसे बहन, बेटी या मां आदि को भी ओवेरियन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। यहां तक की ब्रेस्ट और आंत के कैंसर भी इसके खतरे को बढ़ा सकते हैं।
बढ़ती उम्र - जिन महिलाओं की उम्र 50 से अधिक हो जाती है, तो उन्हें कम उम्र की महिलाओं की तुलना में ओवेरियन कैंसर होने का खतरा अधिक रहता है। वहीं जिन महिलाओं की उम्र 60 से अधिक हो जाती है, उनके लिए अंडाशय कैंसर होने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
प्रसव - एक अध्ययन के अनुसार जिन महिलाओं में बच्चे को जन्म नहीं दिया है, उन्हें अंडाशय कैंसर होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है। अध्ययन के अनुसार महिला के जितने बच्चों को जन्म देती है, उसके अनुसार ही अंडाशय कैंसर होने का खतरा कम होता रहता है। हालांकि, ज्यादा प्रसव करने से अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है।
गर्भनिरोधक गोलियां और हार्मोनल थेरेपी - जो महिलाओं गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, उनमें अंडाशय कैंसर होने का खतरा कम रहता है। वहीं जो महिलाएं हार्मोनल थेरेपी ले चुकी हैं, उन्हें ओवेरियन कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है।
मोटापा - मोटापा कई बीमारियों की जड़ है, जिसमें से एक ओवेरियन कैंसर भी है। जिन महिलाओं का वजन अत्यधिक बढ़ गया है, उनमें अंडाशय कैंसर होने का खतरा काफी अधिक बढ़ जाता है।

अंडाशय कैंसर का निदान

अभी तक ऐसा कोई विशेष टेस्ट तैयार नहीं किया गया है, जिसे सिर्फ ओवेरियन कैंसर का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, कुछ तरीकों की मदद से इस स्थिति का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर सबसे पहले आपका शारीरिक परीक्षण करते हैं और आपके लक्षणों के बारे में पूछते हैं। इसके बाद कुछ अन्य टेस्ट कराने को कहा जाता है, जो अंडाशय कैंसर की पुष्टि करने में मदद करते हैं -

पेल्विक इग्जाम
अल्ट्रासाउंड
ब्लड टेस्ट (कैंसर मार्कर के रूप में)
बायोप्सी (प्रभावित हिस्से से ऊतक का सैंपल लेना और उसकी माइक्रोस्कोपिक जांच करना)

अंडाशय कैंसर की रोकथाम

ओवेरियन कैंसर के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है, इसलिए इसकी रोकथाम करने के सटीक तरीकों के बारे में भी अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। हालांकि, कुछ तरीके हैं जिनकी मदद से अंडाशय कैंसर होने के जोखिम को कुछ हद तक किया जा सकता है -

अगर आपको लगता है कि आपको अंडाशय कैंसर होने का खतरा है, तो डॉक्टर से बात करके आप गर्भनिरोधक गोलियां ले सकती हैं।
समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच कराना भी अंडाशय कैंसर को रोकने और उसके सफल इलाज के लिए बहुत जरूरी है।
कैंसर समेत किसी भी बीमारी के खतरे को कम करने के लिए अच्छी जीवनशैली की आदतें और पर्याप्त पोषण जरूरी होता है।

अंडाशय कैंसर का इलाज

अंडाशय कैंसर का इलाज उसकी स्टेज, प्रकार और महिला की उम्र के अनुसार किया जाता है। यदि कोई महिला अंडाशय कैंसर से ग्रसित है, तो उसका इलाज करने के लिए सबसे पहले बायोप्सी टेस्ट की मदद से कैंसर की स्टेज का पता लगाया जाता है। ओवेरियन कैंसर के लिए उपलब्ध उपचार विकल्प कुछ इस प्रकार हैं -

सर्जरी - ओवेरियन कैंसर का इलाज करने के लिए की गई सर्जरी के दौरान गाइनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजिस्ट प्रोसीजर के दौरान कैंसर से प्रभावित ऊतकों को निकाल देते हैं। साथ ही कैंसर ग्रस्त ऊतकों के आसपास के हिस्से को भी हटा दिया जाता है, ताकि कैंसर फैल न पाए।
कीमोथेरेपी - इस कीमो भी कहा जाता है, जिसमें मरीज को कुछ खास दवाएं दी जाती हैं। ये दवाएं शरीर के अंदर जाकर कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करने का काम करती हैं।
रेडिएशन थेरेपी - इसमें उच्च ऊर्जा वाली विकिरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी मदद से कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद मिलती है।

ओवेरियन कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन कुछ मामलों में यह काफी लंबे समय तक चलता है और यह काफी थकाऊ प्रक्रिया भी हो सकती है। यदि अंडाशय कैंसर का समय पर पता चल पाए तो इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। लेकिन इसका समय पर पता लगना बहुत जरूरी होता है, इसलिए अगर आपको कोई भी ऐसा लक्षण महसूस होता है, जिससे आपको लगता है कि आप अंडाशय कैंसर से ग्रसित हो सकती हैं, तो आपको बिना किसी भी प्रकार की देरी किए डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

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