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अंडकोष में सूजन या पानी का भरना कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है. जैसे अंडकोष पर चोट लगने के कारण या नसों में सूजन आने के कारण या कई बार तो स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी अंडकोष में सूजन आ सकती है. हालांकि एक तथ्य ये भी है कि कुछ लोगों में हाइड्रोसील की समस्या वंशानुगत या जन्मजात भी हो सकती है.
पुरुष अंडकोष (Testicular Pain) में दर्द के कारण (Causes of Testicular Pain)
जैसा कि हमने पहले की चर्चा की कि टेस्टिकल्स में दर्द होने के बहुत सारे कारण होते हैं, चलिये इनके बारे में विस्तार से जानते हैं-
चोट लगना-अंडकोष बहुत अधिक संवेदनशील होता है, और आसानी से उनको नुकसान पहुंचा सकता है। यदि इसपर हल्का-सा भी दबाव पड़ता है तो इसमें दर्द हो सकता है। पुरानी चोट भी इसका दर्द बाद में उभार सकती है।
इंगुइनल हर्निया- इसे ग्रोइन हर्निया के नाम से भी जाना जाता है। इसमें छोटी आंत का कुछ भाग आपके अंडकोष में आकर दर्द और सूजन पैदा करता है। यह हर्निया अक्सर भारी सामान उठाने के कारण होता है।
तोरसिओं- इस स्थिति में स्पेर्मटिक मुड़ जाती है। जिसके कारण टेस्टिकल्स की ओर जाने वाला रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। यह बहुत तेज दर्द का कारण बनता है। समय रहते इसका इलाज न हो तो अंडकोष हमेशा के लिए खराब भी हो सकता है।
अधिवृषण यानी एपीडिड्यमिटिस की समस्या- अधिवृषण एक नली जैसी होती है जो की आपके दोनों टेस्टिकल्स के पीछे की ओर स्थित होती है। इसमें अधिवृषण में जलन होने लगती है और सूजन भी आने लगती है। एपीडिड्यमिस में जलन होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे चोट लगना, बैक्टीरिया द्वारा संक्रमण, सेक्स द्वारा फैलने वाला संक्रमण जिस हम एस.टी.डी. के नाम से जानते है। एपीडिड्यमिटिस ज्यादातर 18 से 36 वर्ष के पुरुषों में ज्यादा पाया जाता है।
ओरचीटिस- इस रोग में आपके टेस्टिकल्स में जलन होने लगती है, जो कि बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के कारण होता है। यह जलन एक या दोनों अंडकोष में होती है और इसमें अंडकोष में सूजन और दर्द रहने लगता है। और यह ज्यादातर 45 या उससे बड़ी उम्र के पुरुषों में अधिक देखने को मिलता है।
अन्य बीमारियां- पुरुष के अंडकोष में दर्द के लिए कई अन्य बीमारियां भी जिम्मेदार होती हैं। डायबिटिक नेफ्रोपैथी के कारण अंडकोष की नसों को नुकसान भी पहुँच सकता है। यह भी दर्द का प्रमुख कारण बनता है। इसके अलावा क्लैमीडिया जैसे यौन संचारित रोग भी अंडकोष में दर्द के लिए जिम्मेदार होते हैं।
हाइड्रोसील-हाइड्रोसील के कारण भी अंडकोषों में दर्द होता है। हाइड्रोसील एक ऐसा रोग है, जिसमें अंडकोषों में पानी भर जाता है और पानी भरने के कारण इनका आकार बढ़ने लगता है। ये एक खतरनाक बीमारी है क्योंकि पानी ज्यादा होने पर कई बार अंडकोष फट जाता है जिससे व्यक्ति की मौत हो जाती है। ऐसी स्थिति होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है।
हार्निया-छोटी आंत का कुछ भाग जब नीचे की तरफ आ जाता है तो वह अंडकोष में प्रेशर बनाता है जिसकी वजह से भी दर्द हो सकता है। इसे ग्रेइन हर्निया भी कहा जाता है, इसकी वजह से अंडकोष में तेज दर्द और सूजन हो सकता है। ज्यादातर भारी सामन उठाने की वजह से ऐसा हो सकता है। वर्क आउट करते समय सही स्पोर्ट्स सपोर्टर पहनने की सलाह दी जाती है।
वैरिकोसील-यदि व्यक्ति के अंडकोष में सूजन हो जाये तो उसके कारण भी दर्द हो सकता है। वैरिकोसील ऐसी स्थिति है जिसमें अंडकोष के अंदर की नसें बड़ी हो जाती हैं जिसके कारण अंडकोष बड़ा हो जाता है और दर्द होता है। टेस्टिस के दर्द को कम करने के लिए आप सपोर्टर का सहारा ले सकते हैं। सपोर्टर का प्रयोग ज्यादातर एथलीट करते हैं। सपोर्टर आपके अंडकोष को आरामदायक स्थिति में रखता है जिसके कारण दर्द नहीं होता। सपोर्टर अंडकोष को बढ़ने से भी रोकता है।
डायबिटीज- पुरुष के अंडकोष में दर्द के अंडकोष से संबंधित बीमारियों के लिए कई अन्य बीमारियां भी जिम्मेदार हैं। डायबिटिक नेफ्रोपैथी के कारण अंडकोष की नसे क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, यह भी दर्द का प्रमुख कारण है। इसके अलावा क्लैमीडिया जैसे यौन संचारित रोग भी अंडकोष में दर्द के लिए जिम्मेदार होते हैं।
टेस्टिकल कैंसर-टेस्टिस में दर्द का कारण टेस्टिकुलर कैंसर भी हो सकता है। इसके लिए हमेशा सतर्क रहने की जरूरत होती है। अगर अंडकोष में कोई गांठ है और आपके अंडकोष में दर्द और सूजन है तो इसकी तुरंत जांच करायें। ये कैंसर अंडकोष से शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकता है। टेस्टिकुलर कैंसर का इलाज संभव है इसके सफल होने का प्रतिशत 95 प्रतिशत है।
एपीडिड्यमिटिस-एपीडिड्यमिटिस की वजह से टेस्टिकल्स की नसों में जलन और दर्द होने लगता है। इसका कारण चोट या इंफेक्शन भी हो सकता है। एपीडिड्यमिस में जलन होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे चोट लगना, बैक्टीरिया द्वारा संक्रमण और STD की वजह से भी एपीडिड्यमिटिस ज्यादातर 18 से 36 वर्ष के पुरुषों में ज्यादा पाया जाता है।
कोनायम-अंडकोष में खून प्रवाहित करने वाली नाड़ियों के अन्दर खून जमा होने के कारण शारीरिक शक्ति कम हो जाती है और उस हिस्से में कम संवेदनशीलता महसूस होती है। इस वजह से या तो यहां कभी-कभी सूजन आ जाती है।
ऑर्किटिस-ये समस्या वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से होती है। इसमें भी जलन और दर्द होता है, इसकी वजह से अंडकोष में सूजन और दर्द होता है। इसमें आपको एक या दोनों अंडकोष में कोमलता या शिथिलता, जो सप्ताहों तक आपको महसूस होती है। इसका भी समय रहते इलाज न किया जाय तो यह अंडकोष की कार्य क्षमता को प्रभावि करता है।
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