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गरुड़ासन योग के लाभ
इस आसन के अभ्यास से मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित होता है जिससे मन को अपार शांति मिलती है। इसके नियमित अभ्यास से अंडकोष (Testicle) को बढ़ने से रोक जा सकता है। यह पैरों और जांघों को मजबूत बनाता है। इसका नियमित अभ्यास से गुदा, मलाशय तथा मूत्राशय के रोगियों को आराम पहुंचता है।
गरुड़ासन योग के लाभ
इस आसन के अभ्यास से मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित होता है जिससे मन को अपार शांति मिलती है।
इसके नियमित अभ्यास से अंडकोष (Testicle) को बढ़ने से रोक जा सकता है।
यह पैरों और जांघों को मजबूत बनाता है।
इसका नियमित अभ्यास से गुदा, मलाशय तथा मूत्राशय के रोगियों को आराम पहुंचता है।
यह जोड़ों की सक्रियता बढ़ाता है, घुटनों, पैरों एवं जोड़ों का दर्द दूर करता है।
यह आपके हाथों को मजबूत बनाता है और कोहनी के दर्द से छुटकारा दिलाता है।
गरुड़ासन योग की सावधानी
बहुत गंभीर गठिया में इस आसन को नहीं करनी चाहिए।
नसों में सूजन होने पर इसको करने से बचना चाहिए।
हड्डियों तथा जोड़ों में चोट होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए
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