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गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की पथरी का होना à¤à¤• आम सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾ है और यह 11 वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से लगà¤à¤— 1 को हो ही जाता है।
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की पथरी कैसे बनते हैं?
जब मूतà¥à¤° में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿ, यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और सिसà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ जैसे कà¥à¤› पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का कंसंटà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ बà¥à¤¨à¥‡ लगता है, तो वे कà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¤² बनाने लगते हैं जो गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ से जà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ लगते हैं और धीरे-धीरे आकार में बढ़ कर पथरी का रूप लेने लगते हैं।
पथरी कितने पà¥à¤°à¤•ार की होती हैं?
80% पथरी कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® के बने पतà¥à¤¥à¤° होते हैं, और कà¥à¤›à¥‡à¤• कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿ तथा कà¥à¤› कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® फॉसà¥à¤«à¥‡à¤Ÿ के होते हैं।
बाकी पतà¥à¤¥à¤° यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पतà¥à¤¥à¤°, संकà¥à¤°à¤®à¤£ पतà¥à¤¥à¤° और सिसà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ पतà¥à¤¥à¤° होते हैं।
पथरी बनने के जोखिम कारक:
कà¥à¤› बीमारियों, दवाओं, गलत आहार की आदतों से पथरी बनने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है जैसे-
मूतà¥à¤° में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® या ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿ की अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• मातà¥à¤°à¤¾à¥¤
आहार में कम कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ वाले आहार, पशॠपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में या आहार में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में सोडियम का सेवन जैसे कारक।
कम पानी पीने से और तरल पदारà¥à¤¥ की कमी से निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण होने पर।
कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, विटामिन डी और विटामिन सी की अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने पर।
मधà¥à¤®à¥‡à¤¹, उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª, मोटापा, गाउट, हाइपरपरथायरायडिजà¥à¤® से पीड़ित लोगों में या जिनकी गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• बाईपास या बैरियाटà¥à¤°à¤¿à¤• सरà¥à¤œà¤°à¥€ हà¥à¤ˆ है उन लोगों में पथरी होने की शिकायत अधिक होती है, ।
वंशानà¥à¤—त कारक: सिसà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ जैसे कà¥à¤› पतà¥à¤¥à¤° परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में पाठजाते हैं जो आनà¥à¤µà¤‚शिक विकारों के बारे में बताते हैं।
बार-बार पथरी का होना – यदि किसी को पहले से गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की पथरी की शिकायत रही है, तो à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में फिर से दूसरी पथरी होने का खतरा अधिक होता है, खासकर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में। 10 – 30% पà¥à¤°à¥à¤· अगले 5 साल में फिर से पतà¥à¤¥à¤° का शिकार हो सकते हैं।
लकà¥à¤·à¤£:
यह पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ के आकार और उनके सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर निरà¥à¤à¤° करता है।
पथरी की वजह से जो सबसे आम लकà¥à¤·à¤£ उà¤à¤°à¤¤à¥‡ हैं वो है पेट या उसके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ का होना जो कमर तक बढ़ सकता है। पतà¥à¤¥à¤° निकालते समय दरà¥à¤¦ का होना सबसे आम है। इसमें गंà¤à¥€à¤° कषà¥à¤Ÿà¤¦à¤¾à¤¯à¥€ दरà¥à¤¦ की लहरें à¤à¥€ उठतीं हैं जिसे ‘वृकà¥à¤• शूल’ कहा जाता है जो 20-60 मिनट तक रहता है।
पेशाब करने में कठिनाई, मूतà¥à¤° में रकà¥à¤¤ या उलà¥à¤Ÿà¥€ हो सकती है।
मूतà¥à¤° से रेत जैसे कठोर कण निकल सकते हैं।
पथरी मूतà¥à¤° के रासà¥à¤¤à¥‡ में फंसा रह सकता है जिससे पेशाब करà¥à¤®à¥‡ में बाधा उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है और दरà¥à¤¦ होता है।
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ में अगर पथरी बहà¥à¤¤ छोटा हो तो वे रà¥à¤•ावट पैदा नहीं करते हैं, जिससे पथरी का कोई लकà¥à¤·à¤£ नहीं दिखता है।
निदान:
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की पथरी का निदान अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¥‹à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ या सीटी सà¥à¤•ैन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाता है। à¤à¤•à¥à¤¸-रे और इंटà¥à¤°à¤¾à¤µà¥‡à¤¨à¤¸ पाइलोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ à¤à¥€ निदान के लिठउपयोगी होते हैं।
सीटी सà¥à¤•ैन अधिक सटीक होता है लेकिन रोगी को विकिरण का सामना करना पड़ता है।
पथरी किस पà¥à¤°à¤•ार का है यह जानने के लिà¤, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® / ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿ / यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और साइटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ का 24 घंटे का मूतà¥à¤° आकलन आवशà¥à¤¯à¤• होता है।
मूतà¥à¤° में संकà¥à¤°à¤®à¤£ है या नहीं या मूतà¥à¤° अमà¥à¤²à¥€à¤¯ अथवा कà¥à¤·à¤¾à¤°à¥€à¤¯ है, यह देखने के लिठमूतà¥à¤° की जाà¤à¤š उपयोगी है।
उपचार:
पथरी का उपचार इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि मूतà¥à¤° पथ में पतà¥à¤¥à¤° का आकार कितना है और किस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर है।
5 मिमी से कम की पथरी आमतौर पर विशिषà¥à¤Ÿ उपचार के बिना बाहर निकल जाते हैं। तरल पदारà¥à¤¥ का सेवन और दरà¥à¤¦ निवारक दवाà¤à¤‚ लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की बीमारी गंà¤à¥€à¤° हो जाने पर इंटà¥à¤°à¤¾à¤µà¥‡à¤¨à¤¸ तरल पदारà¥à¤¥ और अनà¥à¤¯ दवाà¤à¤‚ लेने के साथ-साथ उपचार के लिठअसà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की à¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
बड़ी पथरी यानी 9 मिमी से अधिक के लिठपरà¥à¤•à¥à¤¯à¥‚टेनियस नेफà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¿à¤¥à¥‹à¤Ÿà¥‹à¤®à¥€ या शॉक-वेव लिथोटà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤¸à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ऑपरेशन करके निकलने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
लगà¤à¤— 10-20% पथरी के मामलों में सरà¥à¤œà¤°à¥€ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
बचाव:
आहार और आदतों में कà¥à¤› बदलाव करके गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की पथरी को रोका जा सकता है
अचà¥à¤›à¤¾ मूतà¥à¤° पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ बनाठरखने के लिठसही मातà¥à¤°à¤¾ में पानी पीना चाहिà¤à¥¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन कम से कम 7- 8 गिलास पानी जरà¥à¤° पीना चाहिà¤à¥¤
आहार में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ होनी चाहिà¤à¥¤ दूध, दही, दाल, संतरे और अनà¥à¤¯ डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होते हैं
सही मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ खाà¤à¤‚- आमतौर पर दैनिक पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की जरूरत पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन 2-3 सरà¥à¤µà¤¿à¤‚ग से पूरी हो जाती है।
अपने à¤à¥‹à¤œà¤¨ में सोडियम की मातà¥à¤°à¤¾ 2-3 गà¥à¤°à¤¾à¤® तक कम करें। पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤¡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ जैसे कि हॉट डॉग, चटनी, डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ सूप, अचार इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ कम-से-कम खाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनमें नमक अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में होता है
विटामिन सी की अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• से बचें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि विटामिन सी से ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है जिसके फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प मूतà¥à¤° में बड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿ की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ सकती है।
पालक, बादाम, मूंगफली, अखरोट, बटर, बà¥à¤²à¥‚बेरी जैसे ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ से à¤à¤°à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के सेवन से à¤à¥€ बचें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बिना विटामिन डी की खà¥à¤°à¤¾à¤• न लें
नियमित वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® से बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र, बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° और शरीर के वजन को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनसे पथरी होने का खतरा कम होता है।
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