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दवा लेते समय हम लोग आमतौर पर कई गलतियां कर बैठते हैं। इन गलतियों से किस तरह बचें, इस बारे में देश के बेहतरीन डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ से जानकारी लेकर बता रहे हैं लोकेश के. à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€
100 बात की 7 बात
कà¥à¤› दवाओं को सà¥à¤¬à¤¹ में खाली पेट लेना जरूरी होता है। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤¬à¤¹ ही लेना चाहिà¤à¥¤ किसी दिन अगर à¤à¥‚ल जाà¤à¤‚ तो उसे दिन में जब à¤à¥€ याद आठले लें। इससे दवा à¤à¤²à¥‡ ही 100 फीसदी काम न करे, लेकिन 70 से 80 तक काम कर जाती है।
थाइरॉइड की दवाओं के साथ गैस की दवाà¤à¤‚ à¤à¥€ लेनी हो तो पहले थाइरॉइड की दवाà¤à¤‚ लें, फिर 30 मिनट के बाद ही गैस की दवा लें।
आंख, कान में दी जाने वाली लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ दवाओं का उनके खà¥à¤²à¤¨à¥‡ के बाद जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ 30 दिनों तक ही उपयोग करें। इसके बाद हटा दें।
अगर किसी को नà¥à¤¯à¥‚रो की दवा चल रही हो, चाहे वह मिरà¥à¤—ी की हो या कà¥à¤› और। दवा को सही समय पर ही लेना चाहिà¤à¥¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ 20 से 30 मिनट की देरी कर सकते हैं। इन दवाओं को समय पर न लेने से शरीर में दवा की कमी होने लगती है, दोबारा दौरे की आशंका बनने लगती है।
विटामिन-डी के सपà¥à¤²à¤¿à¤®à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ अमूमन दूध के साथ लेने के लिठकहा जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह विटामिन वसा में घà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² होते हैं। इससे शरीर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आसानी से जजà¥à¤¬ कर पाता है। जो दूध नहीं पीते, वे पानी के साथ ले सकते हैं।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° दवाà¤à¤‚ लिवर में पहà¥à¤‚चने के बाद ही सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ होती हैं। इसलिठअगर किसी का लिवर खराब है या फैटी लिवर की गंà¤à¥€à¤° परेशानी है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° कई पà¥à¤°à¤•ार की दवाà¤à¤‚ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नहीं लिखते।
जब परेशानी कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• हो यानी लंबे समय से दवा चल रही हो तो लोग कई बार à¤à¥‚ल जाते हैं। जैसे: शà¥à¤—र, बीपी, किडनी की परेशानी आदि में। à¤à¤¸à¥‡ में Pill Case या Medicine Organiser आदि नाम से à¤à¤¸à¥‡ बॉकà¥à¤¸ मिलते हैं जिनमें à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ या महीनेà¤à¤° की दवा डोज के हिसाब से रख दी जाती है। इन बॉकà¥à¤¸ की कीमत 60 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ से शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है। ये ऑनलाइन और ऑफलाइन इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ नामों से खोजने पर मिल जाà¤à¤‚गे।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के परà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤¸à¥‡ समà¤à¥‡à¤‚
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° डॉकà¥à¤Ÿà¤° दवाओं की डोज लिखते समय शॉरà¥à¤Ÿà¤•ट का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते हैं। हालांकि मरीज को यह चिंता कम रहती है कि पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤¶à¤¨ की लिखावट समठमें आà¤à¤—ी या नहीं, लेकिन इस बात की परवाह जरूर होती है कि केमिसà¥à¤Ÿ इसे सही समठपाà¤à¤—ा या नहीं। अगर आपको à¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° का परà¥à¤šà¤¾ ठीक से समठनहीं आता तो कà¥à¤› शॉरà¥à¤Ÿà¤•ट जानना आपके लिठअचà¥à¤›à¤¾ होगा।
doctor slip
Tab टैबलेट
Cap कैपà¥à¤¸à¥‚ल
Gtt डà¥à¤°à¥‰à¤ªà¥à¤¸
PO मà¥à¤‚ह से
Amp इंजेकà¥à¤¶à¤¨ रूप में
Ml मिली लीटर
Mg मिली गà¥à¤°à¤¾à¤®
Gm गà¥à¤°à¤¾à¤®
AC खाने से पहले
PC खाने के बाद
OD दिन में à¤à¤• बार
BD/BDS दिन में दो बार
TD/TDS दिन में तीन बार
QD/QDS दिन में चार बार
SOS जब जरूरत लगे
केमिसà¥à¤Ÿ की à¤à¥‚मिका
कà¥à¤› दिन पहले मैं à¤à¤• केमिसà¥à¤Ÿ की दà¥à¤•ान पर गया था। केमिसà¥à¤Ÿ से बात कर ही रहा था कि वहां पर à¤à¤• सजà¥à¤œà¤¨ आà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने केमिसà¥à¤Ÿ को बताया कि उनका बेटा जो 4 साल का है उसे सरà¥à¤¦à¥€, बà¥à¤–ार और उलà¥à¤Ÿà¥€ हो रही है। कोई दवा दे दो। केमिसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ उस शखà¥à¤¸ की पà¥à¤•ार सà¥à¤¨à¤•र 1 मिनट में ही à¤à¤®à¤¬à¥€à¤¬à¥€à¤à¤¸ डिगà¥à¤°à¥€à¤§à¤¾à¤°à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° बन गया और फटाफट अपने à¤à¤• साथी को 4-5 दवाà¤à¤‚ निकालने के लिठकह दिया। यह सब सà¥à¤¨à¤•र मà¥à¤à¤¸à¥‡ रहा नहीं गया। मैंने उस शखà¥à¤¸ से कहा कि अगर आपको बà¥à¤°à¤¾ न लगे तो à¤à¤• बात पूछूं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, पूछिà¤à¥¤ मैंने कहा कि आप इस केमिसà¥à¤Ÿ को डॉकà¥à¤Ÿà¤° कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ समठरहे हैं? यह तो सिरà¥à¤« दà¥à¤•ानदार है। आपके बचà¥à¤šà¥‡ की उमà¥à¤° कितनी है, उसका वजन कितना है, कà¥à¤¯à¤¾ उसे किसी दवा से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, कà¥à¤¯à¤¾ आपने पहले कोई दवा दी है, कà¥à¤¯à¤¾ आप कोरोना को à¤à¥‚ल गà¤, कà¥à¤¯à¤¾ उसे सारी वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ लग चà¥à¤•ी हैं? à¤à¤¸à¥€ बातों को जाने बिना केमिसà¥à¤Ÿ आपके बचà¥à¤šà¥‡ के लिठदवा दे रहा है। दवा कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में दी जाà¤à¤—ी, यह बात केमिसà¥à¤Ÿ नहीं बता सकता। आपको जो दवा बताई गई है, इसमें à¤à¤‚टिबायोटिक à¤à¥€ शामिल है, जिसके साथ डॉकà¥à¤Ÿà¤° कई बार पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¥€ लिखते हैं। कà¥à¤¯à¤¾ यह खतरे वाली बात नहीं है? आपको पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बचà¥à¤šà¥‡ को दिखाना चाहिà¤à¥¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बाद ही दवा लेनी चाहिà¤à¥¤ मेरी राय उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पसंद आई और वह वहां से निकल गठऔर बता कर गठकि आप ठीक कह रहे हैं। मैं à¤à¥€ अपनी दवा लेकर निकल गया।
कà¥à¤¯à¤¾ फारà¥à¤®à¤¾à¤¸à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ लिख सकते हैं दवा...
फारà¥à¤®à¤¾à¤¸à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ बनने के लिठकम से कम D.Pharm. (डिपà¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ इन फारà¥à¤®à¤¾) का सरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤•ेट चाहिà¤à¥¤ B.Pharm. और M.Pharm. à¤à¥€ हो सकते हैं।
इसके अलावा Pharm.D (D.Pharm. नहीं) के सरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤•ेट के लिठ12वीं के बाद 6 साल की पढ़ाई करनी होती है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने वाली बात यह है कि केमिसà¥à¤Ÿ की दà¥à¤•ान खोलने के लिठà¤à¥€ फारà¥à¤®à¤¾ का सरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤•ेट होना चाहिà¤, लेकिन किसी à¤à¥€ तरह की फारà¥à¤®à¤¾ का सरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤•ेट वाला शखà¥à¤¸ दवा नहीं लिख सकता।
अहम बात यह है कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° केमिसà¥à¤Ÿ की दà¥à¤•ानों पर डिपà¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ सरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¿à¤•ेट वाले à¤à¥€ मौजूद नहीं होते। सेलà¥à¤¸à¤®à¥ˆà¤¨ ही दवा बता देते हैं। सीधे कहें तो दवा लिखने का अधिकार सिरà¥à¤« डॉकà¥à¤Ÿà¤° को है।
chemist
इन दवाओं को डॉकà¥à¤Ÿà¤° के परà¥à¤šà¥‡ के बिना न लें
सà¥à¤•ेडà¥à¤¯à¥‚ल X की दवाà¤à¤‚: इनमें नींद की दवाà¤à¤‚ आती हैं। इन दवाओं को कोई à¤à¥€ केमिसà¥à¤Ÿ बिना डॉकà¥à¤Ÿà¤° के परà¥à¤šà¥‡ के नहीं दे सकता। इतना ही नहीं, उसे डॉकà¥à¤Ÿà¤° की उस परà¥à¤šà¥€ की à¤à¤• कॉपी à¤à¥€ रखनी होती है और साथ में दवाओं का पूरा हिसाब à¤à¥€à¥¤
सà¥à¤•ेडà¥à¤¯à¥‚ल H की दवाà¤à¤‚: इनमें कà¥à¤› रिसà¥à¤• वाली दवाà¤à¤‚ शामिल होती हैं, मसलन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की दवाà¤à¤‚। ये दवाà¤à¤‚ à¤à¥€ बिना डॉकà¥à¤Ÿà¤° के परà¥à¤šà¥‡ के नहीं देनी चाहिà¤, लेकिन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° केमिसà¥à¤Ÿ की शॉप पर बिना परà¥à¤šà¥‡ के दे दी जाती हैं।
आपके खाने और दवा का संबंध
जब कोई डॉकà¥à¤Ÿà¤° कोई दवा लिखता है तो अमूमन उसके साथ हिदायत à¤à¥€ दी जाती है कि किस दवा को कब और किस तरह खाना है। इसमें कहा जाता है कि खाने से पहले, खाने के बीच में या फिर खाने के बाद लेना है। दरअसल, इसकी वजह यह है कि हमारे पेट की पीà¤à¤š वैलà¥à¤¯à¥‚ (कितना à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤• होगा) खाली पेट अलग और खाने के बाद अलग होती है। खाने में कà¥à¤¯à¤¾ खा रहे हैं, इस पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करता है। साथ ही, हर दवा à¤à¤• खास पीà¤à¤š वैलà¥à¤¯à¥‚ पर बेहतर काम करती है। इसलिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° इस तरह की हिदायत देते हैं। जानें, कौन-सी दवाà¤à¤‚ कब खानी चाहिà¤:
खाने से पहले (खाली पेट)
थाइरॉइड की दवाà¤à¤‚: इस दवा को बà¥à¤°à¥‡à¤•फसà¥à¤Ÿ, चाय यानी किसी à¤à¥€ चीज को लेने से 30-45 मिनट पहले लेना चाहिà¤à¥¤ अगर कोई शखà¥à¤¸ थाइरॉइड की दवाà¤à¤‚ खाली पेट लेना à¤à¥‚ल जाता है तो à¤à¥€ उसे जब याद आà¤, दवा ले लेनी चाहिà¤à¥¤ यह नहीं सोचना चाहिठकि खाली पेट लेना à¤à¥‚ल गठतो उस दिन लेनी ही नहीं है।
गैस की दवाà¤à¤‚: अगर कोई शखà¥à¤¸ थाइरॉइड की दवाà¤à¤‚ लेता है तो उसे गैस की दवाà¤à¤‚ इसके 30 मिनट बाद ही लेनी चाहिठऔर बà¥à¤°à¥‡à¤•फसà¥à¤Ÿ से 15 से 30 मिनट पहले।
शà¥à¤—र की दवाà¤à¤‚: इसे अमूमन बà¥à¤°à¥‡à¤•फसà¥à¤Ÿ और डिनर से 15 से 20 मिनट पहले या फिर इतने ही समय बाद लेने के लिठकहा जाता है। अगर कोई शखà¥à¤¸ इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ ले रहा है तो यह अंतराल 5 से 10 मिनट का हो सकता है। शà¥à¤—र की दवा लेने के बाद खाने को à¤à¥‚लना नहीं चाहिà¤à¥¤ साथ ही, खाने के बाद शà¥à¤—र की दवाà¤à¤‚ उन लोगों को लेने के लिठकहा जाता है जिनकी शà¥à¤—र लेवल फासà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग में तो काबू में रहती है, बà¥à¤°à¥‡à¤•फसà¥à¤Ÿ या डिनर के बाद बहà¥à¤¤ बढ़ जाती है।
take pill
खाने के बीच लेनी हो दवा
इसमें अमूमन दो तरह की परेशानियों पैनकà¥à¤°à¤¿à¤†à¤¸ और किडनी में दवाà¤à¤‚ लेनी पड़ती हैं। डॉकà¥à¤Ÿà¤° यही हिदायत देते हैं कि à¤à¤• से दो बाइट के बाद इन दवाओं को लेना है। इनमें कà¥à¤› दवाओं को चबाकर लेना होता है, न कि निगलकर। इस तरह की बात अकà¥à¤¸à¤° डॉकà¥à¤Ÿà¤° बता देते हैं। अगर डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की à¤à¤¸à¥€ हिदायत हो तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जरूर मानें।
खाने के बाद लेनी हो दवा
यहां खाने से मतलब बà¥à¤°à¥‡à¤•फसà¥à¤Ÿ, लंच या डिनर कà¥à¤› à¤à¥€ हो सकता है या फिर तीनों। इसमें शà¥à¤—र समेत तमाम दवाà¤à¤‚ शामिल होती हैं।
à¤à¤‚टिबायोटिक और पेनिकलर: इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हमेशा खाने के 15 से 20 मिनट बाद ही लेना चाहिà¤à¥¤ इन दवाओं को कà¤à¥€ à¤à¥€ à¤à¥‚खे पेट यानी बà¥à¤°à¥‡à¤•फसà¥à¤Ÿ से पहले लेने के लिठनहीं कहा जाता है। जब à¤à¥€ इन दवाओं को लें तो à¤à¤• गिलास पानी पी लें। दरअसल, इन दवाओं को लेने पर पेट में à¤à¤¸à¤¿à¤¡ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में निकलता है। इन दवाओं के लेने के फौरन बाद यानी 20 मिनट तक चाय या कॉफी न पिà¤à¤‚ तो बेहतर है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि चाय या कॉफी की वजह से पेट में à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की मातà¥à¤°à¤¾ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ जाती है। अगर जरूरी न हो तो पेनकिलर और à¤à¤‚टिबायोटिक का सेवन किसी à¤à¥€ हाल में नहीं करना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤• साथ लेनी हो दवा
à¤à¤• साथ à¤à¤• से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गोलियों को निगलने में परेशानी हो सकती है। गले में फंस सकती हैं। इसलिठअगर à¤à¤• साथ 1 से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दवाà¤à¤‚ लेनी हो और डॉकà¥à¤Ÿà¤° ने फरà¥à¤• रखने के लिठनहीं कहा है तो हर 2 मिनट पर à¤à¤• दवा ले सकते हैं। अगर किडनी पेशंट हैं और डॉकà¥à¤Ÿà¤° ने पानी की मातà¥à¤°à¤¾ हर दिन 1 से डेढ़ लीटर तय की हà¥à¤ˆ है तो इसमें दवाओं के साथ लिया जाने वाला पानी à¤à¥€ शामिल होता है, इस बात का à¤à¥€ खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखें।
दो दवाओं में अंतराल
जब कोई डॉकà¥à¤Ÿà¤° दिनà¤à¤° में किसी दवा को दो बार लेने को कहते हैं तो इसका मतलब है कि 10 से 12 घंटे का फरà¥à¤• होना चाहिà¤à¥¤ यानी अगर कोई दवा सà¥à¤¬à¤¹ 9 से 10 बजे ली है तो उसकी दूसरी डोज शाम में 8 से 10 के बीच लेनी चाहिà¤à¥¤ वहीं अगर दिन में 3 बार लेने के लिठकहा गया है तो यह 8 घंटे का फरà¥à¤• होना चाहिà¤, लेकिन सà¥à¤¬à¤¹ 9 बजे लेने के बाद दूसरी डोज शाम को 5 बजे और तीसरी डोज रात को 1 बजे लेनी होगी जो परेशान करने वाली होगी कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि रात में बीच में उठकर नींद खराब करनी होगी। इसलिठयह फरà¥à¤• 6 घंटे का रखें और दवा à¤à¥€ सà¥à¤¬à¤¹ 8 बजे तक पहली डोज ले लें। दूसरी डोज दोपहर 2 से 3 बजे तक और तीसरी डोज रात 8 से 9 बजे के बीच ले सकते हैं।
पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• कितना जरूरी
à¤à¤‚टिबायोटिक लेने के बाद हमारी आंतों में मौजूद गà¥à¤¡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कम होने लगते हैं। हमारी पाचन कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमजोर होती है। लूज मोशंस लग सकते हैं। अमूमन 4 से 5 दिनों तक à¤à¤‚टिबायोटिक की सामानà¥à¤¯ डोज यानी दिन में à¤à¤• बार लेने से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बà¥à¤°à¤¾ असर नहीं पड़ता। जब दिन में 2 से 3 बार à¤à¤‚टिबायोटिक लेनी हो तो इस तरह की परेशानी हो सकती है। इसलिठकà¥à¤› डॉकà¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¥€ लिखते हैं, लेकिन आजकल जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° नहीं लिखते। इसकी à¤à¤• बड़ी वजह दवाओं की अधिकता बताते हैं। खासकर बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के मामले में दवाओं को याद रखने में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ परेशानी होती है। जब à¤à¤‚टिबायोटिक ले रहें हों तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछकर दही, छाछ, योगरà¥à¤Ÿ ले सकते हैं। खांसी या सरà¥à¤¦à¥€ है तो खटà¥à¤Ÿà¤¾ और फà¥à¤°à¤¿à¤œ आदि का ठंडा दही, योगरà¥à¤Ÿ न लें।
दवाओं के साथ लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ का जोड़
पानी की मातà¥à¤°à¤¾ अपनी जरूरत के हिसाब से ले सकते हैं। हां कà¥à¤› दवाओं को पानी में मिलाकर लेना चाहिà¤, à¤à¤¸à¥€ हिदायत दवाओं की पैकिंग पर लिखी होती है। इस बात को डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¥€ बता देते हैं।
पानी कितना गरम: सामानà¥à¤¯ दवाओं को सामानà¥à¤¯ पानी या गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में हलà¥à¤•ा ठंडा पानी दवा के साथ ले सकते हैं। कà¥à¤› दवाओं को गरम पानी या गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी में मिलाना होता है। इसकी हिदायत à¤à¥€ दी जाती है।
दवा लेने के बाद कितना पानी
अगर खाने के बीच में या खाने के फौरन बाद दवा लेनी पड़े तो उतना पानी ही काफी होगा, जितना गले से नीचे उतरने के लिठजरूरी हो यानी 2 से 3 घूंट। वजह यह होती है कि जब हम खाने के बीच में या फौरन बाद आधा या à¤à¤• गिलास या इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी पी लेते हैं तो खाने को पचाने के लिठजो पाचक रस निकलता है, पानी उसके असर को कम कर देता है। à¤à¥‹à¤œà¤¨ का पचना कà¥à¤› मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। इसलिठकहा जाता है कि खाने और पानी में 30 से 45 मिनट का फरà¥à¤• जरूर रखें। साथ ही, अगर कोई खाने के 30 मिनट बाद या खाने से 30 मिनट पहले दवा के साथ पानी ले रहा है तो आराम से à¤à¤• या दो गिलास पानी सकता है। à¤à¤‚टिबायोटिक आदि के साथ à¤à¤• गिलास पानी पी लें।
inhaler
इनहेलर उपयोग करते हैं तो जरूर पढ़ें
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ यानी दमा के मरीजों को कà¥à¤› दवाà¤à¤‚ à¤à¥‚खे पेट लेनी होती हैं। वहीं जब इनहेलर का उपयोग करना हो तो इन सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ªà¥à¤¸ को अपनाà¤à¤‚...
कई इनहेलर में हर उपयोग के बाद दवा की मातà¥à¤°à¤¾ कितनी बची है, यह दिखाती है। जब यह शूनà¥à¤¯ पर आ जाठतो दवा अमूमन खतà¥à¤® हो जाती है। इसके बाद रिफिल करना जरूरी होता है। फिर हर उपयोग के बाद पहले इनहेलर को 4 से 5 बार शेक करें।
अगर इनहेलर का उपयोग à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ तक नहीं किया है कि इनहेलर का माउथ साफ हो। अगर नहीं हो तो उसे किसी साफ सूखे कपड़े से साफ कर दें और à¤à¤• बार हवा में सà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡ कर दें।
इसके बाद सीधे खड़े रहें या बैठे à¤à¥€ हैं तो सीधे होकर बैठें।
फिर इनहेलर को सीधा रखते हà¥à¤ अपने हाथ का अंगूठा इनहेलर के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में और इनहेलर के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ यानी कनसà¥à¤¤à¤° या बटन पर तरà¥à¤œà¤¨à¥€ या मधà¥à¤¯à¤®à¤¾ या फिर दोनों उंगलियों को रख दें।
इसके बाद इनहेलर के बटन को दबाने से पहले सांस को बाहर छोड़ दें।
मà¥à¤‚ह में इनहेलर रखने के बाद दांतों से दबा लें, काटें नहीं और अपने होठों से इनहेलर को जकड़ लें। इसके बटन दबाà¤à¤‚ तो बटन दबाने के साथ ही सांस को अंदर की ओर खींचे और 8 से 10 सेकंड या जितनी देर होलà¥à¤¡ कर सकते हैं, करें ताकि इनहेलर में मौजूद दवा सांस की नली से होते हà¥à¤ फेफड़ों तक आसानी से और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में पहà¥à¤‚चे। इससे दवा की पूरी उपयोगिता सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ होगी। फिर सांस छोड़ दें।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जानकारी के लिठयू-टà¥à¤¯à¥‚ब पर जाà¤à¤‚ और How to correctly use an asthma inhaler टाइप करें। आपको असà¥à¤¥à¤®à¤¾ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने के सही तरीकों से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ कई विडियो मिल जाà¤à¤‚गे।
आंख-कान में दवा लेते समय कà¥à¤¯à¤¾ करें?
कà¤à¥€ à¤à¥€ बिना डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के कोई à¤à¥€ दवा आंख और कान में न डालें। कई लोग घर में रखी पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ दवा आंखों में खà¥à¤œà¤²à¥€ या लाली आने पर, कान में खà¥à¤œà¤²à¥€ या दरà¥à¤¦ होने पर डाल लेते हैं। यह गलत है। इनमें सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤‡à¤¡ हो सकता है। इन चंद बूंदों की वजह से कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में सफेदी आ जाती है। इससे कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की पारदरà¥à¤¶à¤¿à¤¤à¤¾ कम हो जाती है यानी दिखने में परेशानी à¤à¥€ हो सकती है। इसी तरह कान और नाक में à¤à¥€ परेशानी हो सकती है।
आंख में दवा डालने का तरीका
अगर घर में कोई दूसरा शखà¥à¤¸ है तो उसे दवा डलवाने के लिठबà¥à¤²à¤¾ लें। अगर घर में अकेले हों तो खà¥à¤¦ से ही डाल सकते हैं। वैसे बेहतर होगा कि दवाई कोई दूसरा शखà¥à¤¸ डाल दे।
बैठकर या खड़े होकर à¤à¥€ ले सकते हैं, लेकिन बेहतर है पीठके बल लेटकर आई डà¥à¤°à¥‰à¤ª लेना।
कई लोग आंखों के बीच में दवा डलवाते हैं। इससे दवा कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ तक पूरा असर नहीं डाल पाती। बेहतर है कि डà¥à¤°à¥‰à¤ª नाक के बगल वाले आंखों के कॉरà¥à¤¨à¤° में डालें।
आई डà¥à¤°à¥‰à¤ª की à¤à¤• बूंद ही काफी होती है। इसलिठजब à¤à¥€ आंखों में डà¥à¤°à¥‰à¤ª डालें, à¤à¤• बूंद ही डालें। इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ डालने पर दवा की बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦à¥€ ही होती है।
जब इस तरह की दवा ले लेते हैं तो आंखों को 3-4 बार पलक à¤à¤ªà¤•ाà¤à¤‚ (बà¥à¤²à¤¿à¤‚क करें), न कि आंखों को बंद कर लें।
नोट: आंखों को बंद करने की जरूरत रेटिना वाली समसà¥à¤¯à¤¾ जिसमें आंखों में पà¥à¤¤à¤²à¥€ को फैलाकर जांच की जाती है, दवा उसमें ही पड़ती है।
कान में दवा डालते समय
1. इसे à¤à¥€ लेटकर लेना बेहतर है। अगर लेटने की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ न हो तो बैठकर या फिर खड़े होकर ले लें।
2. दवा लेने से पहले जिस कान में दवा लेनी है, उसे ऊपर की तरफ उठा लें। जिस कान में दवा ले चà¥à¤•े हैं 30 से 45 सेकंड उसे ऊपर की ओर रखें। इसके बाद दूसरे कान में दवा डलवाà¤à¤‚।
दवाà¤à¤‚ सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करते समय सावधानियां
दवाà¤à¤‚ हमें टैबà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ, सिरप, इंजेकà¥à¤¶à¤¨, डà¥à¤°à¥‰à¤ª आदि रूपों में मिलती हैं। बीमारी के पà¥à¤°à¤•ार और मरीज की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के आधार पर दवा का रूप दिया जाता है। जब हम टैबलेट लेते हैं तो वह पूरे पतà¥à¤¤à¥‡ (सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤ª) में 10, 15 या इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गोली के सेट में होती है। हम à¤à¤• बार में à¤à¤• गोली निकालते हैं और ले लेते हैं। इससे दूसरी टैबà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ के रैपर को खोलने की जरूरत नहीं होती। लेकिन जब हम सिरप या आई डà¥à¤°à¥‰à¤ª आदि लेते हैं तो पूरी बोतल को खोलना पड़ता है यानी दवाओं का संपरà¥à¤• हवा से हो जाता है। यहां धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने वाली बात यह है कि जब दवाओं की पैकिंग होती है तो बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सावधानी बरती जाती है। इसमें तापमान से लेकर बाहरी हवा से संपरà¥à¤• का à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ तरह से धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाता है।
आंख-कान में दी जाने वाली लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ दवाओं को खà¥à¤²à¤¨à¥‡ के बाद उसका उपयोग 30 दिनों तक ही करनी चाहिà¤à¥¤ जिस दिन से उपयोग करना शà¥à¤°à¥‚ करें, उसकी तारीख उस पर लिख दें ताकि 30 दिनों के बाद उसे हटा दें।
सही तापमान पर करें सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°
दवाओं को किस तरह सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करना है, यह आमतौर पर पैकिंग पर लिखा होता है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° दवाओं को 30 डिगà¥à¤°à¥€ सिलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ से कम तापमान पर सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करना सही रहता है। अमूमन इतना तापमान सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ दोनों मौसम में हमारे कमरे का होता है। अगर, गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कमरे का तापमान 30 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाठतो इसे फà¥à¤°à¥€à¤œ में सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° कर सकते हैं। कà¥à¤› दवाओं जैसे: इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ या कà¥à¤› इंजेकà¥à¤¶à¤¨ को फà¥à¤°à¤¿à¤œ में 5 से 10 डिगà¥à¤°à¥€ सिलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ पर रखना होता है।
गोली को पीसकर कर सकते हैं सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°?
किसी को दवा निगलने में परेशानी हो तो जिस समय दवा लेनी हो, उसी समय उसे तोड़कर या पीसकर ले सकते हैं। लेकिन पीसकर सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करने से वह दवा हवा के संपरà¥à¤• में आ जाती है। इससे उसकी कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कम हो सकती है। उसी दिन कà¥à¤› देर में ही खा लेना चाहिà¤à¥¤
यह à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे...
पैरासिटामॉल à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं: चूंकि पैरासिटामॉल ओटीसी की दवा है, इसलिठलोग इसे अपनी सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° उपयोग कर लेते हैं। लेकिन इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जरूरी होने पर ही इसे लें। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लेने से पेट में अलà¥à¤¸à¤° और à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ की परेशानी à¤à¥€ हो सकती है।
à¤à¤‚टिबायोटिक का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोग: वैसे तो यह शरीर में इमà¥à¤¯à¥‚निटी की मजबूती में मदद के लिठदी जाती है ताकि शरीर बीमारी से लड़ सके, लेकिन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोग से शरीर की इमà¥à¤¯à¥‚निटी कमजोर हो जाती है। फिर à¤à¤‚टिबायोटिक दवाओं का असर ही कम हो जाता है।
पेनकिलरà¥à¤¸: वैसे तो यह दरà¥à¤¦ को दबाने में मदद करता है, लेकिन बहà¥à¤¤à¤¾à¤¯à¤¤ में उपयोग किडनी समेत तमाम अंगों पर बà¥à¤°à¤¾ असर डालता है।
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ में ली जाने वाली दवा: मोनामाइन ऑकà¥à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤œ इनहिबिटर गà¥à¤°à¥à¤ª की दवा लेने के साथ पनीर, मीट, सोया सॉस, बीयर और वाइन आदि का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं करना चाहिà¤à¥¤
खांसी को दबाने वाले सिरप: ये दवाà¤à¤‚ खांसी आने की उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ को कम करते हैं। इसे सपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚ट कहते हैं। खांसी की वजह पर असर करने वाली दवा बलगम बाहर निकालती है। इसे à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤°à¥‡à¤‚ट कहते हैं। अगर किसी को सूखी खांसी है तो सपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚ट का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें और अगर बलगम वाली खांसी है तो à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤°à¥‡à¤‚ट का। गलत दवा का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² आपकी तकलीफें बढ़ा सकता है। आमतौर पर खांसी की दवाà¤à¤‚ उतनी असरदार नहीं होतीं जितना विजà¥à¤žà¤¾à¤ªà¤¨à¥‹à¤‚ में दावा किया जाता है। आपके लिठसही कफ सिरप का फैसला डॉकà¥à¤Ÿà¤° ही कर सकता है।
आम गलतियां : बिना पूछे दवा बंद करना
जब कोई डॉकà¥à¤Ÿà¤° दवा लिखते हैं तो उसे तय दिन तक लेने के लिठबताते हैं। साथ में यह à¤à¥€ बोलते हैं कि इतने दिनों के बाद फिर दिखाने के लिठजाना है। हम अमूमन à¤à¤¸à¤¾ नहीं करते। जैसे ही फायदा दिखने लगता है जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लोग अपनी सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° दवा को बंद कर देते हैं या फिर उसकी मातà¥à¤°à¤¾ को कम कर देते हैं। अगर फायदा नहीं दिखता है तो कà¥à¤› लोग मातà¥à¤°à¤¾ को बढ़ा देते हैं। यह पूरी तरह गलत है। न हमें मातà¥à¤°à¤¾ कम या बंद करनी चाहिठऔर न बढ़ानी चाहिà¤à¥¤ हर दवा की डोज तय होती है। मान लें किसी को कोई à¤à¤‚टिबायोटिक चल रही हो। यह कोरà¥à¤¸ 5 दिनों के लिठहै। उस शखà¥à¤¸ को फायदा 3 दिन में ही हो जाता है और वह दवाई लेना बंद कर देता है। à¤à¤¸à¤¾ करना उस शखà¥à¤¸ के लिठनà¥à¤•सानदायक होगा। अगर किसी बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को पूरी तरह खतà¥à¤® होने में 5 दिन तक à¤à¤‚टिबायोटिक दवा लेना जरूरी है तो वह सिरà¥à¤« 3 दिन तक दवाई देने से खतà¥à¤® नहीं होगा। यह à¤à¥€ मà¥à¤®à¤•िन है कि वह शरीर में ही छà¥à¤ªà¤•र बैठजाठऔर कà¥à¤› दिनों के बाद वह फिर से सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ होकर बीमार कर दे। वहीं, कई बार दवाओं में मौजूद कोई à¤à¤• सालà¥à¤Ÿ फायदा नहीं पहà¥à¤‚चा रहा होता है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° कोई à¤à¤¸à¥€ दवा लिखते हैं जिसमें दो-तीन तरह के सालà¥à¤Ÿ मौजूद होते हैं जो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फायदा पहà¥à¤‚चाते हैं। इसलिठदवाओं की मातà¥à¤°à¤¾ को खà¥à¤¦ से घटानी या बढ़ानी नहीं चाहिà¤à¥¤ इससे बहà¥à¤¤ नà¥à¤•सान है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° को न बताना
जब à¤à¥€ हम दो या तीन चिकितà¥à¤¸à¤¾ पदà¥à¤§à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से à¤à¤• साथ इलाज करा रहे हों तो हम इसकी जानकारी अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ यानी हर विधा के डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ को जरूर दें ताकि अगर कोई जरूरी बात हो, खानपान में कोई धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने की जरूरत हो तो मरीज को इससे परेशानी न हो। साथ ही इस बात का à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ दवाओं के साथ अगर होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¥€ और आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में से कोई à¤à¤• या दोनों चल रहे हों तो सà¤à¥€ की दवाओं के बीच में 30 मिनट से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ का फरà¥à¤• जरूर रखें ताकि सà¤à¥€ को शरीर सही तरीके से जजà¥à¤¬ कर सके।
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