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कà¥à¤› सरल जीव तो बगैर सांस के à¤à¥€ जी सकते हैं। अधिकांश जीव ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ का उपयोग करते हैं और कारà¥à¤¬à¤¨ डाई ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ से निजात पा लेते हैं। ज़मीन पर रहने वाले बड़े जंतॠइस काम के लिठकà¥à¤› विशेष अंगों यानी फेफड़ों का उपयोग करते हैं। हम अपनी पसलियों की गति से और सीने व उदर के बीच सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ à¤à¤• गà¥à¤®à¥à¤¬à¤¦à¤¨à¥à¤®à¤¾ मांसपेशी (डायाफà¥à¤°à¤¾à¤®, मधà¥à¤¯à¤ªà¤¾à¤Ÿ) के संकà¥à¤šà¤¨ से फेफड़ों को फà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। जब डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® का संकà¥à¤šà¤¨ होता है तो वह नीचे की ओर à¤à¥à¤• जाता है जिससे उदर के अंदर की जगह कम हो जाती है, जबकि सीने के अंदर की जगह बढ़ जाती है। सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में पà¥à¤°à¥à¤· डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® का उपयोग जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ करते हैं।
मनà¥à¤·à¥à¤¯ में सांस का मूल ततà¥à¤µ यह है कि वातावरण की हवा और फेफड़ों
सांस लेना और छोड़नाः सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿-1 आराम की मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ है; इसमें डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® ऊपर की ओर उठा हà¥à¤† दिख रहा है। सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿-2 में सांस खींची जा रही है; इसमें पसलियां मांस पेशियों की मदद से ऊपर की ओर उठरही हैं और डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® नीचे की ओर खींचा जा रहा है। सांस छोड़ते समय फिर से सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿-1 को दोहराया जाà¤à¤—ा।
गैसों का आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨: नाक या मà¥à¤‚ह से पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करके शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नली से होती हà¥à¤ˆ वातावरण की हवा छोटी नलियों, और छोटी नलियों, अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ महीन नलियों से होती हà¥à¤ˆ अंततः हवा से à¤à¤°à¥‡ इन बà¥à¤²à¤¬à¥à¤²à¥‹à¤‚ तक पहà¥à¤‚च जाती है। इसी तरह शरीर में घूम चà¥à¤•ा खून à¤à¥€ बारीक होती जाती शिराओं में से होता हà¥à¤† इन हवा के बà¥à¤²à¤¬à¤²à¥‹à¤‚ के इरà¥à¤¦à¤—िरà¥à¤¦ बिठे रकà¥à¤¤à¤¨à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के जाल तक पहà¥à¤‚च जाता है। यहां पहà¥à¤‚चकर खून कारà¥à¤¬à¤¨ डाई ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ छोड़ देता है और ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ गà¥à¤°à¤¹à¤£ कर लेता है। फिर यह ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨-मà¥à¤•à¥à¤¤ खून हà¥à¤°à¤¦à¤¯ में से होता हà¥à¤† धमनियों के सहारे फिर से शरीर के समसà¥à¤¤ अंगों तक पहà¥à¤‚च जाता है।
के बीच गैसों का आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ हो। यदि सांस लेने से संबंधित मांसपेशियां लकबा गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हो जाà¤à¤‚ तो à¤à¥€ सांस लेने का कारà¥à¤¯ कृतà¥à¤°à¤¿à¤® फेफड़ों की मदद से चल सकता है। यह à¤à¥€ कतई ज़रूरी नहीं है कि सांस लेने व छोड़ने के लिठवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अपने सीने की धौंकनी को फà¥à¤²à¤¾à¤¤à¤¾-पिचकाता रहे। सांस लेनेछोड़ने का काम तो सीने को हिलाठडà¥à¤²à¤¾à¤ बगैर à¤à¥€ हो सकता है। इसके लिठवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को à¤à¤• सà¥à¤Ÿà¥€à¤² के बरà¥à¤¤à¤¨ में रख देना होगा जिसके अंदर हवा का दबाव कà¥à¤°à¤®à¤¶à¤ƒ कम-जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ किया जाà¤à¤—ा। à¤à¤• मिनट में लगà¤à¤— 15 बार हवा के दबाब में 360 गà¥à¤°à¤¾à¤®/वरà¥à¤— सेंटीमीटर का उतार-चढ़ाव परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होगा। वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को जब à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤°à¤•ोषà¥à¤ में रखा जाता है तो जलà¥à¤¦à¥€ ही वह सामानà¥à¤¯ अरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में सांस लेना बंद कर देता है। उसके फेफड़ों में हवा का फैलना-दबना ही गैसों के आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है।
कितनी हवा चाहिठफेफड़ों को
फेफड़ों की बनावट खूब सà¥à¤ªà¤‚जी होती है और इनकी सतह का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¤«à¤² 100 वरà¥à¤— मीटर के लगà¤à¤— होता है। हवा व खून को अलग-अलग रखने वाली à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ अतà¥à¤¯à¤‚त महीन होती है। यह हमारे शरीर का सबसे दà¥à¤°à¥à¤¬à¤² हिसà¥à¤¸à¤¾ है। सात में से तकरीबन à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ फेफड़े के रोग से मरता है। ये रोग किसी संकà¥à¤°à¤®à¤£, धूल अथवा दोनों के मिले-जà¥à¤²à¥‡ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से हो सकते हैं। वैसे फेफड़ों के पास अतिरिकà¥à¤¤ गà¥à¤‚जाइश काफी होती है कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¤• ही फेफड़ों के सहारे à¤à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤•ार जी सकता है। फेफड़ों की अपेकà¥à¤·à¤¾ हृदय रोगों से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लोग मरते हैं। किनà¥à¤¤à¥ इसका कारण यह है कि हृदय का कोई हिसà¥à¤¸à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ नहीं है। जिसके बगैर à¤à¥€ काम चल सके। यदि हृदय आधा हो, तो शायद आप पांच मिनट à¤à¥€ नहीं जी पाà¤à¤‚गे।
विशà¥à¤°à¤¾à¤® करता कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ घणà¥à¤Ÿà¥‡ लगà¤à¤— à¤à¤• घन फà¥à¤Ÿ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ का उपयोग करता है। कड़ी मेहनत के दौरान यह खपत दस गà¥à¤¨à¤¾ तक बढ़ सकती है। मनà¥à¤·à¥à¤¯ जितनी ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की खपत करता है उससे थोड़ी कम कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ (आयतन में कम) उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करता है। जब सांस में ली जाने वाली हवा में कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ की मातà¥à¤°à¤¾ 3 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक हो जाठतो हम गहरी सांस लेने लगते हैं। जब यह 6 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक हो जाठतो हम बà¥à¤°à¥€ तरह हांफने लगते हैं। इसका à¤à¤• उदाहरण देखिà¤à¥¤ यदि किसी पनडà¥à¤¬à¥à¤¬à¥€ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ 200 घन फà¥à¤Ÿ हवा हो, और सामानà¥à¤¯ कामकाज करते समय वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ 1 घन फà¥à¤Ÿ कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ घंटा उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करे और यदि इस कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ को वहां से कृतà¥à¤°à¤¿à¤® ढंग से न हटाया जाà¤, तो 24 घंटे के अंदर उस पनडà¥à¤¬à¥à¤¬à¥€ के सारे लोग बà¥à¤°à¥€ तरह हांफने लगेंगे।
कारà¥à¤¬à¤¨ डाई ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ (CO2)की à¤à¥‚मिका
हमारे खून में अधिकांश ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ और कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ रासायनिक रूप से संयोजित सà¥à¤µà¤°à¥‚प में रहती है। यदि आप 100 इकाई आयतन खून में पंप दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ व कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ निकालें तो लगà¤à¤— 1820 इकाई आयतन ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ तथा 50-60 इकाई आयतन कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ निकलेगी। इसका अरà¥à¤¥ है कि à¤à¤• इकाई आयतन खून में लगà¤à¤— उतनी ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ होती है जितनी हवा के à¤à¤• इकाई आयतन में। खून में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ हिमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¥€à¤¨ नामक लाल रंजक से जà¥à¤¡à¤¼ जाती है। आप चाहे कितनी गहरी सांस लें या चाहे शà¥à¤¦à¥à¤§ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ लें, यह रंजक तो उतनी ही ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ जोड़ेगा। दूसरी ओर यदि हवा में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ थोड़ी कम हो जाà¤, तो à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ नहीं होता कि यह रंजक कम ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ ले ले।
कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ खून में मूलतः सोडियम बाई कारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ के रूप में पाई जाती है। चूंकि विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ दà¥à¤°à¥à¤¬à¤² अमà¥à¤² सोडियम के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤ªà¤°à¥à¤§à¤¾ करते हैं, इसलिठहोता यह है कि यदि आप ज़रूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सांस लें तो आपके खून में से काफी सारी कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ निकल à¤à¤¾à¤—ती है। दूसरी ओर यदि आप à¤à¤¸à¥€ हवा में सांस लें जिसमें 7 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ है तो आपका खून बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ सोख लेता है। दोनों ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में आपको अजीब लगेगा। यदि आप à¤à¤• कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ पर बैठकर गहरी-गहरी सांसें जलà¥à¤¦à¥€-जलà¥à¤¦à¥€ लेने लगें तो संà¤à¤µ है कि à¤à¤• मिनट में आपकी उंगलियों में à¤à¥à¤¨à¤à¥à¤¨à¤¾à¤¹à¤Ÿ होने लगे। यदि आप इसके बाद à¤à¥€ जारी रखेंगे तो शायद आपके हाथ-पैरों में à¤à¤‚ठन (Cramps) होने लगेगी। कà¥à¤› लोगों को इससे à¤à¤šà¥à¤›à¤¿à¤• पेशियों में à¤à¤‚ठन (Convulsions) होने लगते हैं। और यदि इस लेख का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पाठक यह कोशिश करे तो à¤à¤•-दो की मृतà¥à¤¯à¥ निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ है।
आपके शरीर के सामानà¥à¤¯ कामकाज के लिठजरूरी है कि आपके खून व विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंगों में सही मातà¥à¤°à¤¾ में कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ मौजूद रहे। इसे हम यों à¤à¥€ कह सकते हैं कि कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ जहर à¤à¥€ है और जीवन की अनिवारà¥à¤¯à¤¤à¤¾ à¤à¥€ है। सांस लेने-छोड़ने का नियमन पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ इस तरह किया जाता है कि खून में कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ का à¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ सà¥à¤¤à¤° बना रहे। जब वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® के कारण खून में कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ती है तो आप हांफने लगते हैं। यदि इसकी मातà¥à¤°à¤¾ कम हो जाठतो आप धीमी गति से सांस लेने लगते हैं, और यह तà¤à¥€ सामानà¥à¤¯ गति पर पहà¥à¤‚चती है जब कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर पहà¥à¤‚च जाà¤à¥¤ सांस की गति का नियमन करने बाला à¤à¤• कारक और à¤à¥€ है जो गति को तेज़ कर देता है। यह कारक है खून में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾; जैसे ही यह मातà¥à¤°à¤¾ à¤à¤• मानक सà¥à¤¤à¤° से नीचे हो जाती है, सांस की गति तेज़ हो जाती है। किनà¥à¤¤à¥ नियमन का यह तरीका तà¤à¥€ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² होता है जब आप अतà¥à¤¯à¤‚त कठोर परिशà¥à¤°à¤® करें।
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में पहà¥à¤‚चने वाले खून की लगातार जांच की जाती है। जांच का यह काम कà¥à¤› हद तक तो मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की कोशिकाà¤à¤‚ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही करती हैं, जबकि इसके लिठकà¥à¤› विशेष अंग à¤à¥€ होते हैं। ये अंग कैरोटिड धमनी में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ दाबमापियों के पास सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होते हैं। दरअसल सांस लेना व छोड़ना à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है जो खून के संघटन पर निरà¥à¤à¤° है।
वासà¥à¤¤à¤µ में सांस लेना व छोड़ना शरीर की उन कई सारी गतिविधियों में से à¤à¤• है जो हमारी कोशिकाओं का अंदरà¥à¤¨à¥€ परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ à¤à¤•-सा बनाठरखने का काम करती हैं। चूंकि सांस की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ सबसे आसान है, इसलिठइसका अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ हà¥à¤† तथा इसने अनà¥à¤¯ à¤à¤¸à¥‡ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾-कलापों को समà¤à¤¨à¥‡ में मदद दी। रोचक बात यह à¤à¥‚॒ रहता है जब हम अपने फेफड़ों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किसी और काम (जैसे बोलने या गाने) के लिठकर रहे होते हैं। आमतौर पर नियमन अचेतन सà¥à¤¤à¤° पर चलता रहता है। किनà¥à¤¤à¥ यदि इसमें खलल पड़े, मसलन हम सांस रोक लें या 7 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ यà¥à¤•à¥à¤¤ हवा में सांस लें तो हमें हवा की à¤à¥‚ख लगती है। यह à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ अनà¥à¤à¥‚ति है जो शरीर सबसे पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• मानता है। यह हमारे शरीर की आम कारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ है - जब तक हमारा शरीर ठीक-ठाक काम करता रहे, हमारा दिमाग उस पर अधिक धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं देता। किनà¥à¤¤à¥ कà¥à¤› गड़बड़ होते ही उस और पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता से धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया जाता है। कà¥à¤› ज़रूरतें à¤à¤¸à¥€ हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हमारी चेतना à¤à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤•ार पहचानती है। हम जानते हैं कि कब हमें हवा, पानी या à¤à¥‹à¤œà¤¨ की कमी हो रही है। बदकिसà¥à¤®à¤¤à¥€ से, हमें इस बात का à¤à¤¾à¤¨ नहीं हो पाता कि हमें à¤à¥‹à¤œà¤¨ के किसी खास घटक का अà¤à¤¾à¤µ हो रहा है।
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