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टीबी(टà¥à¤¯à¥‚बर कà¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸)के मरीजों के लिठसपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में तीन दिन के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर रोज खà¥à¤°à¤¾à¤• वाली नई दवा आ गई है। पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ दवा में सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में तीन दिन à¤à¤•-à¤à¤• दिन के आड़ में à¤à¤• बार खà¥à¤°à¤¾à¤• लेनी पड़ती थी। नई दवा में रोज खà¥à¤°à¤¾à¤• लेनी पड़ेगी। हालांकि कोरà¥à¤¸ छह महीने का ही होगा, जैसा कि पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ दवा का था। नई दवा के साथ अंबेडकर असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² सहित सà¤à¥€ सरकारी और पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में इलाज शà¥à¤°à¥‚ कर दिया गया है।
नई दवा में मरीजों के लिठकई तरह की राहत है। पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ दवा में à¤à¤• à¤à¥€ दिन की à¤à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• छूट जाने पर कोरà¥à¤¸ अधूरा रह जाता था और नठसिरे से छह महीने का कोरà¥à¤¸ करना पड़ता था। नई दवा की खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने वाले मरीज अगर à¤à¤•ाध दिन खà¥à¤°à¤¾à¤• लेना à¤à¥‚ल जाà¤à¤‚ तो कोरà¥à¤¸ में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी। इलाज à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ नहीं होगा। केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ की गाइड लाइन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सरकारी के अलावा निजी असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में नई दवाà¤à¤‚ उपलबà¥à¤§ करा दी गई हैं। टीबी का इलाज सरकारी के साथ-साथ पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में पूरी तरह से मà¥à¤«à¥à¤¤ में मà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ कराने के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ हैं। इस दवा से इलाज पूरी तरह से मà¥à¤«à¥à¤¤ किया जाना है। दवाओं की सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ सीधे सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ विà¤à¤¾à¤— के माधà¥à¤¯à¤® से कराई जा रही है। सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ विà¤à¤¾à¤— ने कà¥à¤› दवा दà¥à¤•ानों को अधिकृत करते हà¥à¤ वहां फà¥à¤°à¥€ सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ कर रही है। मरीज उन दà¥à¤•ानों में परà¥à¤šà¥€ दिखाकर मà¥à¤«à¥à¤¤ में दवा ले सकते हैं। नई दवा के डोज में छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठघà¥à¤²à¤¨à¥‡ वाली दवा बनाई गई है। नई दवा मरीज के वजन के हिसाब से दी जा रही है। अंबेडकर असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में टीबी à¤à¤‚ड चेसà¥à¤Ÿ विà¤à¤¾à¤— के à¤à¤šà¤“डी डॉ. आरके पंडा ने बताया कि नई दवा मरीजों के लिठबेहद असर कारक है।
बदलाव की जरूरत इसलिà¤
तीन दिन वाले दवा के कोरà¥à¤¸ में मरीजों को कई परेशानी हो रही थी। à¤à¤• दिन à¤à¥€ दिन दवा लेने में चूक होने पर कोरà¥à¤¸ अधूरा हो जाता था और मरीजों को उसी समय से नठसिरे से कोरà¥à¤¸ पूरा करना पड़ता था। नई गोली में वे सारे कंपोजिशन हैं, जिससे गलती से दवा à¤à¤• दिन छूट जाने पर दवा का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ रहेगा। दवा का काेरà¥à¤¸ अधूरा नहीं रहेगा।
26 हजार मरीजों का पंजीयन
पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में टीबी के इलाज के लिठमहज 25 हजार 889 लोगों का नाम पंजीयन है। जबकि वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• संखà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤• लाख जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है। रायपà¥à¤° जिले में सबसे अधिक 14 हजार 188 मरीज हैं। इनमें केवल 2 हजार 848 का पंजीयन है। दà¥à¤°à¥à¤— जिले में 13 हजार 340 टीबी में केवल 3080 ही इलाज करवा रहे हैं। बिलासपà¥à¤° में 10 हजार 644 मरीजों में 2 हजार 569 का विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ में इलाज चल रहा है। डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° टीबी मरीजों का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• इलाज नहीं होने के कारण बीमारी बढ़ती ही जा रही है। टीबी का इलाज नहीं होने पर यह à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤° टीबी का रूप ले लेता है। यह सबसे घातक है।
टीबी के लिठजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ असरदार
साधारण टीबी के साथ-साथ à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤°(मलà¥à¤Ÿà¥€à¤ªà¤² डà¥à¤°à¤— रेजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स)यानी खतरनाक टीबी के मरीजों की संखà¥à¤¯à¤¾ तेजी से बढ़ रही है। टीबी से पीड़ित मरीजों के लिठनई दवा बीडा कà¥à¤µà¥€à¤²à¤¿à¤¨ मà¥à¤«à¥à¤¤ में दिठजाने के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ हैं, विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जो मरीज दवा का कोरà¥à¤¸ पूरा नहीं करते, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤° यानी खतरनाक सà¥à¤¤à¤° का टीबी हो जाता है। इलाज नहीं होने पर यह जानलेवा à¤à¥€ हो जाता है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में 60 से 70% à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤° टीबी के मरीज इलाज से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हो जाते हैं। नई दवा से 70 से 90% ठीक होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ है
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