टीबी के मरीज की पहचान कैसे करें?HealthPlanet

Posted on Tue 29th Nov 2022 : 13:52

ट्यूबरक्लोसिस रोग क्या होता है

ट्यूबरकुलोसिस को आम बोलचाल की भाषा में टीबी कहते हैं। यह शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, फेफड़ों में होने वाला टीबी सबसे आम प्रकार का होता है। कोरोना की तरह फेफड़ों में होने वाला टीबी भी खांसी और छींक के द्वारा एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।ट्यूबरकुलोसिस का खतरा उन लोगों को सबसे अधिक होता है जो जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी जैसे कि एड्स या डायबिटीज आदि होती है। साथ ही, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उन्हें भी इस बीमारी का खतरा अधिक होता है।
ट्यूबरक्लोसिस के प्रकार

ट्यूबरकुलोसिस मुख्यता दो प्रकार के होते हैं जिसमें लेटेंट ट्यूबरकुलोसिस और सक्रिय ट्यूबरकुलोसिस शामिल हैं।

लेटेंट ट्यूबरकुलोसिस

इस स्थिति में बैक्टीरिया आपके शरीर में होता है, लेकिन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली उसे सक्रिय नहीं होने देती है। लेटेंट ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण आपको अनुभव नहीं होते हैं और यह बीमारी के कारण नहीं फैलती है। हालांकि, अगर आपको लेटेंट ट्यूबरकुलोसिस है तो वह सक्रिय ट्यूबरकुलोसिस बन सकता है।

सक्रिय ट्यूबरकुलोसिस

इस स्थिति में बैक्टीरिया आपके शरीर में विकसित हो रहा होता है और आपको इसके लक्षण भी अनुभव होते हैं। अगर आपको सक्रिय ट्यूबरकुलोसिस है तो यह बीमारी के कारण दूसरे में फैल सकती है।

ट्यूबरकुलोसिस को अन्य दो भागों में बांटा जा सकता है जिसमें पल्मोनरी और एक्स्ट्रा पल्मोनरी शामिल हैं।

पल्मोनरी ट्यूबरक्लोसिस

यह फेफड़ों को प्रभावित करता है और ट्यूबरकुलोसिस का प्राथमिक रूप है। अधिकतर मामलों में यह बच्चों या बूढ़ों में देखने को मिलता है।

एक्स्ट्रा पल्मोनरी ट्यूबरक्लोसिस

यह फेफड़ों से अन्य जगहों पर होता है जैसे कि हड्डियां, किडनी और लिम्फ नोड आदि। ट्यूबरकुलोसिस का यह प्रकार प्राथमिक रूप से प्रतिरक्षा में अक्षम के मरीजों में होता है।
ट्यूबरक्लोसिस के लक्षण

ट्यूबरक्लोसिस होने पर आप खुद में अनेक लक्षणों (TB Symptoms in Hindi) का अनुभव कर सकते हैं। इसके लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

तीन सप्ताह से अधिक समय तक खांसी होना
सांस फूलना
सांस लेने में तकलीफ होना
शाम के दौरान बुखार का बढ़ जाना
सीने में तेज दर्द होना
अचानक से वजन का घटना
भूख में कमी आना
बलगम के साथ खून आना
फेफड़ों का संक्रमण होना
लगातार खांसी आना
अस्पष्टीकृत थकान होना
बुखार आना

आमतौर पर ट्यूबरकुलोसिस फेफड़ों को प्रभवित करता है, लेकिन यह दूसरे अंग जैसे कि गुर्दे, रीढ़ और मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है। इस स्थिति में लक्षण संक्रमित अंग पर निर्भर करते हैं।

कुछ मामलों में ट्यूबरकुलोसिस फेफड़ों के बाहर भी विकसित हो सकता है। इसमें छोटी ग्रंथियां, हड्डियां व जोडें, पाचन तंत्र, मूत्राशय व प्रजनन प्रणाली और मस्तिष्क व नसें (तंत्रिका तंत्र) शामिल हैं।

इनके लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

लकवा लगना
पेट में दर्द होना
ग्रंथियों में स्थिर सूजन होना
डायरिया की शिकायत होना
पीठ में अकड़न होना
प्रभावित हड्डी में दर्द और उसकी कार्यशीलता में कमी आना
भ्रम होना
सिर में स्थिर दर्द होना
कोमा की स्थिति होना

दौरा पड़ना

ट्यूबरक्लोसिस का यह प्रकार आमतौर पर उन लोगों को होता है जिसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है।

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