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हथियार शरीर के आर पार जाके शरीर कों छिदà¥à¤°à¤¿à¤¤ कर देता है उस पà¥à¤°à¤•ार का घाव छिदà¥à¤°à¤¿à¤¤ घाव कहलाता है। इस पà¥à¤°à¤•ार के घाव में शरीर में हमे दो घाव दिखाई देते हैं। à¤à¤• घाव वह जहां से हथियार शरीर के अनà¥à¤¦à¤° गया, तथा à¤à¤• घाव वह जहां से हथियार शरीर से बहार निकला। पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ घाव बहारी घाव कि तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में बड़ा दिखाई देता है।
1. Lacerated wound. चिरा फटा घाव -: à¤à¤¸à¥€ चोटे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के तब आती है, जब उस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पर धार दार हथियार से पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° किया गया है। धारदार हथियार से किये गठपà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° का परिणाम यह होता है, की उस वयकà¥à¤¤à¤¿ के शरीर के जिस à¤à¤¾à¤— में पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° होता है वहाठकी चमड़ी (tissue) चिर जाता है। जितना घातक हथियार होगा उतनी गंà¤à¥€à¤° चोटे आà¤à¤‚गी। lacerated चोटे आमतौर पर दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ और हमलों में देखी जाती है।
lacerated चोट जब लगती है,
मांस फट जाता है, चोट का किनारा असमतल और थेड़ा मेड़ा हो जाता है।
नील रंग या तो घाव की तà¥à¤µà¤šà¤¾ के चारो ओर या तो तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे रहता है।
2. Incised wound. चीरे वाला घाव :- à¤à¤• घà¥à¤®à¤¾à¤µà¤¦à¤¾à¤° हथियार के लगने से incised wound की चोटे आती है।
ताज़ी चोट लगने पर हेमाटोमा बनने लगता है।
12 घंटे में चोट का किनारा लाल रंग का, उसमे सूजन, रकà¥à¤¤ और लिमà¥à¤« दिखाई देता है ।
24 घंटे में घाव में सूखे खून का थकà¥à¤•ा दिखाई देता है जो की पपड़ी कही जाती है। और रकà¥à¤¤- कोषà¥à¤ क कलिया बनने लगती है।
36 घंटे में कैपिलरी (capillary) जाली पड़ने लगती है , बेसल कोशिकाओं में mitotic गतिविधि होती है।
2 से 3 दिनों में घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ वाली सतह में fibroblasts और capillary buds विकसित होने लगता है और घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ लगता है।
3 से 5 दिनों में सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ महीन रेशा दिखने लगता है, नाड़ी की मोटाई और विसà¥à¤®à¤°à¤£ दिखाई देने लगता है।
1 से 2 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में घाव का निशान बन जाता है।
3.Contusion wound. à¤à¥€à¤¤à¤°à¥€ चोट / नील :- नील चोट वह चोट है जब किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर या शरीर के किसी à¤à¥€ à¤à¤¾à¤— में पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° किया जाता है, वह पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° हाथ के मà¥à¤•à¥à¤•े से, पतà¥à¤¥à¤° से, चाबà¥à¤• से, बूट से, छड़ी से किया जाता है, तो उस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में चोटे आती है।
शà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤¤ में लाल रंग की होती है।
कà¥à¤› घंटे से 3 दिनों के à¤à¥€à¤¤à¤° नीली रंग की हो जाती है।
4 दिनों के बाद नीली काले रंग से à¤à¥‚री रंग की हो जाती है।
5 से 6 दिनों के बाद हरी रंग की चोट हो जाती है।
7 से 12 दिनों के बाद पिले रंग की चोट हो जाती है।
2 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के बाद नारà¥à¤®à¤² हो जाती है।
4. Abrasion wound. खरोंच :- यह घाव वाहन दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾, उंगली के नाख़ून से , काटने या दांत काटने या किसी हथियार के वार से शरीर में लगने से शरीर की तà¥à¤µà¤šà¤¾ की ऊपरी सतह में खरोंच आ जाती है, जसको abrasion wound कहते है। इस चोट का कोई निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ आकार नहीं होता है। यह चोट सूखने में गहरा à¤à¥‚रा या काला à¤à¥€ हो जाता है , जब ये चोटे ठीक होती है, तो इनका कोई सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ निशान à¤à¥€ नहीं रह जाता।
ताजी खरोच :- चमकदार लाल रंग की होती है।
12 से 24 घंटे :- लिमà¥à¤« और चमकदार लाल रकà¥à¤¤ निकलता है और सà¥à¤– कर पपड़ी पद जाती है।
2 से 3 दिन में लाल à¤à¥‚री रंग की पपड़ी पड़ जाती है।
4 से 7 दिनों में à¤à¤ªà¤¿à¤¥à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤® पपड़ी के निचे डिफेकà¥à¤Ÿ को कवर करता है।
7 दिनों के बाद पपड़ी सà¥à¤– जाती है, सिकà¥à¥œà¤¤à¥€ है और निकल जाती है।
5. Gunshot wound. बंदूक की गोली की चोट :- यह घाव बनà¥à¤¦à¥‚क की गोली लगने से होता है, जो की इसके नाम से ही सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ हो रहा है। GUNSHOT WOUND à¤à¥€ कई पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤• होते है जैसे :-
à¤à¤‚टà¥à¤°à¥‡à¤‚स घाव ,
कांटेकà¥à¤Ÿ शॉट ,
कà¥à¤²à¥‹à¤œ शॉट,
नियर शॉट,
मारà¥à¤œà¤¿à¤¨à¤² à¤à¤¬à¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¨,
6. Burn wound. जलने का घाव :- यह घाव जलने पर होता है जिसमे शरीर की ऊपरी तà¥à¤µà¤šà¤¾ जल या à¤à¥à¤²à¤¸ सी जाती है जो की शरीर के tissues ऊतक को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¤à¥€ है।
आग लगने से शरीर या शरीर का कोई अंग जल जाना,
रासायनिक जà¥à¤µà¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² पदारà¥à¤¥ का शरीर या शरीर के किसी अंग में गिर जाना,
विदà¥à¤¯à¥à¤¤à¥ के संपरà¥à¤• में आने से आग लग जाने के कारण शरीर या शरीर के किसी à¤à¤¾à¤— का जल जाना।
7. Stab wound. कोंचने का घाव :- à¤à¤¸à¤¾ घाव/ चोट तेज धारदार या नà¥à¤•ीली चीज के लगने पपर होता है।
चाकू, कटार , नाख़ून, सà¥à¤ˆ, à¤à¤¾à¤²à¤¾ ,पेंच ,आदि से लगने वाली चोटों को stab wound की चोट कही जाà¤à¤à¤—ी।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ में जब चाकू , सà¥à¤ˆ या ऊपर बताई गयी अनà¥à¤¯ चीजों से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में कोंचा जाता है ,तो वह वासà¥à¤¤à¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में घà¥à¤¸ जाती है जो की à¤à¤• लमà¥à¤¬à¤¾ गहरा घाव करती है।
8.Puncture wound. छिदà¥à¤°à¤¿à¤¤ घाव :- à¤à¤¸à¤¾ घाव शरीर में किसी नà¥à¤•ीली और तेज चीज लगने से होता है जो की शरीर में घà¥à¤¸à¤¤à¥€ है और छेद बना देती है। कà¥à¤› छिदà¥à¤°à¤¿à¤¤ घाव सतह तक ही होते है और कà¥à¤› तो सतह से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गहराई तक हो जाते है जो की शà¥à¤°à¥‹à¤¤ पर आधारित होते है की घाव किस चीज से हà¥à¤† है। छिदà¥à¤°à¤¿à¤¤ घाव में आमतौर पर अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ नहीं होता, आमतौर पर ये घाव बिना किसी हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª के काफी जलà¥à¤¦à¥€ बंद हो जाते है।
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